ऐलनाबाद, 13 मई( एम पी भार्गव ) पिछले 48 घंटों में देश के सामने आई दो परस्पर विरोधी तस्वीरों ने जनता के बीच तीखी बहस छेड़ दी है। एक तरफ केंद्र सरकार जनता से त्याग की अपील कर रही है, तो दूसरी तरफ असम में नए मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण समारोह भव्यता के साथ आयोजित किया गया। यह शब्द आज जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में किसान नेता आत्मा राम झोरड़ ने कहें। उन्होंने कहा कि 10 मई के बाद प्रधानमंत्री ने देशवासियों से एक नहीं बल्कि दो बार अपील की है कि वे खाना पकाने में तेल का कम उपयोग करें, सोना खरीदना टालें, वाहनों में ईंधन बचाएं और विदेश यात्राओं पर अंकुश लगाएं। इसका कारण देश की आर्थिक स्थिति बताया गया है। इसके ठीक दो दिन बाद असम में मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया गया। इस समारोह में करोड़ों रुपये की सजावट, लाखों रुपये की लाइटिंग और आतिशबाजी, हजारों वाहनों का काफिला और देश भर से आए वीआईपी मेहमानों के लिए विशेष विमान व्यवस्था की गई। लाखों लोगों को कार्यक्रम स्थल तक लाने-ले जाने में हजारों लीटर ईंधन की खपत हुई। आत्माराम झोरड़ ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि “यदि देश वास्तव में कठिन दौर से गुजर रहा है तो त्याग की शुरुआत ऊपर से होनी चाहिए। जब जनता को चूल्हा धीमा करने को कहा जा रहा है, तो शपथ समारोह में करोड़ों रुपये क्यों जलाए जा रहे है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का उदाहरण देते हुए कहा कि “शास्त्री जी ने देश से एक वक्त का खाना छोड़ने की अपील की थी और पहले खुद उसका पालन किया था। आज की स्थिति में उपदेश और आचरण में दिन-रात का फर्क दिखाई देता है जो नहीं होना चाहिए।
झोरड़ ने कहा कि लोकतंत्र में जनता जागरूक है। डिजिटल युग में “तेल बचाओ” का भाषण और “करोड़ों का शपथ समारोह” दोनों ही तस्वीरें जनता के मोबाइल पर साथ-साथ दिखाई दे रही हैं। उन्होंने कहा कि देश को मैनेजर नहीं बल्कि जनता के साथ खड़े होने वाले नेता की जरूरत है। अगर देश वास्तव में आर्थिक संकट से जूझ रहा है तो शपथ ग्रहण जैसे कार्यक्रम सादगी से आयोजित करने चाहिए, अन्यथा जनता को त्याग का उपदेश देने का कोई फायदा नही है.
