में दीवार से कूद कांडा की कोठी में गया वो पिछले दरवाज़े से भाग गया – दुष्यंत चौटाला – मेरे समर्थकों ने उन्हें भगा दिया – गोपाल कांडा | पढ़िए सच्चाई क्या है ?

गुस्ताखी माफ़ हरियाणा -पवन कुमार बंसल

सिरसा।2009 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में सिरसा से निर्दलीय विधायक चुने गए गोपाल कांडा को लेकर उस समय की घटनाओं पर एक बार फिर सियासी बहस तेज हो गई है। पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला और स्वयं गोपाल कांडा के हालिया बयानों में विरोधाभास सामने आया है, लेकिन हमारी पड़ताल में दोनों के दावे पूरी तरह सही नहीं पाए गए।

दुष्यंत चौटाला का दावा है कि चुनाव परिणाम के बाद गोपाल कांडा को तेजाखेड़ा ले जाने के लिए उनके समर्थक कांडा के घर की दीवार कूदकर अंदर गए, लेकिन कांडा पिछले गेट से भाग निकले। वहीं गोपाल कांडा का कहना है कि यह सरासर झूठ है और उन्हें दुष्यंत चौटाला के समर्थकों ने ही वहां से भगाया था।

पड़ताल में सामने आई सच्चाई
हमारी जांच के अनुसार, चुनाव जीतने के बाद गोपाल कांडा सिरसा स्थित अपनी कोठी में ही मौजूद थे। उस समय कांग्रेस को बहुमत नहीं मिला था और इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) अपने पक्ष में समर्थन जुटाने में लगा हुआ था। लोकदल के कार्यकर्ताओं ने कांडा की कोठी को घेर रखा था और वे उन्हें अपने साथ ले जाना चाहते थे। इसी दौरान गोपाल कांडा तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा के संपर्क में थे, लेकिन लोकदल कार्यकर्ताओं के घेराव के कारण वह कोठी से बाहर नहीं निकल पा रहे थे।

बताया जाता है कि भूपिंदर हुड्डा ने सिरसा के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से संपर्क किया। पुलिस अधिकारी ने स्पष्ट किया कि यदि गोपाल कांडा सुरक्षा की मांग करते हैं, तो उन्हें सुरक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके बाद पुलिस सुरक्षा में कांडा को उनकी कोठी से निकालकर सिरसा एयरफोर्स स्टेशन पहुंचाया गया, जहां से वे दिल्ली रवाना हुए। दिल्ली पहुंचकर कांडा ने भूपिंदर हुड्डा से मुलाकात की और बाद में वे हरियाणा सरकार में गृह मंत्री बने।

हालांकि, यह भी एक तथ्य है कि बाद में एयर होस्टेस गीतिका शर्मा सुसाइड केस में नाम आने के बाद गोपाल कांडा को मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा।

दूसरा मौका भी हाथ से निकला
राजनीतिक गलियारों में इसे कांडा का “दुमछल्ला” भी कहा जाता है कि एक बार फिर वे मंत्री बनते-बनते रह गए। बाद के एक चुनाव में भाजपा को भी पूर्ण बहुमत नहीं मिला था। उस समय सिरसा की सांसद सुनीता दुग्गल उन्हें विमान से दिल्ली ले जा रही थीं और माना जा रहा था कि उनका मंत्री बनना तय है, लेकिन इस पर वरिष्ठ भाजपा नेता उमा भारती ने आपत्ति जता दी, जिससे कांडा का यह सपना अधूरा रह गया।

इस तरह 2009 के घटनाक्रम को लेकर दुष्यंत चौटाला और गोपाल कांडा दोनों के दावे पूरी तरह सच नहीं हैं। वास्तविकता यह है कि उस समय सत्ता संतुलन, राजनीतिक जोड़तोड़ और प्रशासनिक हस्तक्षेप के बीच गोपाल कांडा को सुरक्षा में सिरसा से दिल्ली पहुंचाया गया था, जिसने हरियाणा की राजनीति की दिशा ही बदल दी थी।

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