लगभग 100 वर्षों बाद पुनर्जीवित हुआ ऐतिहासिक कादियां–ब्यास रेल परियोजना : रवनीत सिंह बिट्टू

39.68 किलोमीटर लंबी नई ब्रॉडगेज रेल लाइन पर लगभग ₹1,400 करोड़ की लागत आएगी, पंजाब में संपर्क, पर्यटन एवं विकास को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

  • रिपोर्ट: ललित शर्मा

चंडीगढ़/गुरदासपुर: पंजाब के माझा क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में भारत सरकार ने लंबे समय से लंबित कादियां–ब्यास नई रेल लाइन परियोजना को पुनर्जीवित कर दिया है। आज रेल भवन में मीडिया को संबोधित करते हुए रेल एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री श्री रवनीत सिंह बिट्टू ने इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी तथा माननीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव जी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पंजाब में रेलवे अवसंरचना को सुदृढ़ करने तथा क्षेत्रीय विकास को गति देने के लिए केंद्र सरकार निरंतर प्रतिबद्ध है।

कादियां–ब्यास रेल लिंक के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए श्री रवनीत सिंह बिट्टू ने बताया कि प्रस्तावित रेल लाइन गुरदासपुर जिले के कादियां को अमृतसर जिले के ब्यास से जोड़ेगी। लगभग 39.68 किलोमीटर लंबी इस ब्रॉडगेज रेल लाइन की अनुमानित लागत करीब ₹1,400 करोड़ है। इस परियोजना का क्रियान्वयन उत्तरी रेलवे द्वारा किया जाएगा। प्रस्तावित रेल मार्ग कादियां, धपाई, घुमान, बुटाला, सठियाला और ब्यास जैसे महत्वपूर्ण कस्बों एवं गांवों से होकर गुजरेगा।

इससे माझा क्षेत्र के अनेक इलाकों को पहली बार रेल नेटवर्क से सीधा जुड़ाव मिलेगा तथा स्थानीय लोगों की आवाजाही और परिवहन सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार होगा। परियोजना के अंतर्गत अत्याधुनिक रेलवे अवसंरचना विकसित की जाएगी, जिसमें घुमान और बुटाला में दो क्रॉसिंग स्टेशन, 11 प्रमुख पुल, 121 लघु पुल, 54 रोड अंडर ब्रिज (RUB), आधुनिक सिग्नलिंग एवं दूरसंचार प्रणाली तथा भारत की स्वदेशी ट्रेन टक्कर-रोधी प्रणाली ‘कवच’ का प्रावधान शामिल है।

Historic Qadian-Beas rail project revived after nearly 100 years: Ravneet Singh Bittu

परियोजना के इतिहास का उल्लेख करते हुए श्री बिट्टू ने कहा कि कादियां–ब्यास रेल लिंक की परिकल्पना ब्रिटिश काल में की गई थी। वर्ष 1928–29 में तत्कालीन नॉर्थ-वेस्टर्न रेलवे द्वारा इस परियोजना को स्वीकृति दी गई थी तथा 1930 के दशक के प्रारंभ तक निर्माण कार्य का एक बड़ा हिस्सा पूरा भी कर लिया गया था।

हालांकि बाद में बदलती परिस्थितियों और विकास प्राथमिकताओं के कारण यह परियोजना बंद कर दी गई। उन्होंने बताया कि परियोजना के रणनीतिक एवं विकासात्मक महत्व को देखते हुए इसे बाद में सामाजिक रूप से वांछनीय रेल संपर्क परियोजना (SDRCP) के रूप में पुनर्जीवित किया गया तथा वर्ष 2010–11 के पूरक रेल बजट में शामिल किया गया। विभिन्न कारणों और प्रक्रियागत बाधाओं के चलते परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी, लेकिन अब इसे पुनः गति प्रदान की गई है तथा लगभग ₹1,400 करोड़ की संशोधित विस्तृत अनुमान रिपोर्ट तैयार की गई है।

श्री बिट्टू ने कहा कि यह रेल लाइन केवल क्षेत्रीय संपर्क को ही मजबूत नहीं करेगी, बल्कि आपातकालीन परिस्थितियों में अमृतसर–पठानकोट रेलखंड के वैकल्पिक मार्ग के रूप में भी कार्य करेगी, जिससे उत्तरी भारत में रेलवे संचालन की मजबूती और लचीलापन बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को व्यापक लाभ मिलेगा। किसानों को अपनी कृषि उपज के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध होंगे, परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स सुविधाएं सुदृढ़ होंगी, व्यापार, वाणिज्य एवं लघु उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा तथा निर्माण और संचालन चरणों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। इसके अतिरिक्त माझा क्षेत्र में निवेश और आर्थिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

यह परियोजना कई प्रमुख धार्मिक एवं आध्यात्मिक स्थलों तक पहुंच को भी आसान बनाएगी, जिनमें अहमदिया मुस्लिम समुदाय के जन्मस्थल कादियां, डेरा बाबा जैमल सिंह, ब्यास, श्री दरबार साहिब डेरा बाबा नानक, गुरुद्वारा अचल साहिब, गुरुद्वारा भक्त नामदेव जी (घुमान), गुरुद्वारा साहिब पातशाही पंजवीं (बुर्ज साहिब), गुरुद्वारा बाबा राजा राम जी, पंडोरी धाम, राम शरणम मंदिर तथा शिरडी साईं मंदिर (गुरदासपुर) प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि बेहतर रेल संपर्क से धार्मिक पर्यटन को उल्लेखनीय बढ़ावा मिलेगा तथा देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों की यात्रा अधिक सुगम होगी।

अंत में श्री रवनीत सिंह बिट्टू ने कादियां, ब्यास, घुमान, बुटाला, सठियाला तथा पूरे माझा क्षेत्र के लोगों को इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए बधाई दी और आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार परियोजना से संबंधित सभी आवश्यक स्वीकृतियां शीघ्र प्राप्त कर इसके समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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