सफाई कर्मचारी अपनी मांगों को पूरा करवाने के लिए सरकार के नुमाइंदों के घरों के आगे गंदगी को इकट्ठा होने दें ना कि सड़कों पर- बियानी
Ellenabad/ Haryana, August 21 ( डॉ एम पी भार्गव , विशेष संवाददाता ): “सफाई कर्मचारियों की आवाज दबाकर सरकार जनता के स्वास्थ्य से कर रहीं है खिलवाड़”यह बक्तब्य सिरसा वेलफेयर एसोसिएशनस के संयोजक समाज सेबी आनन्द बियानी ने सफाई कर्मचारियों से अनुरोध करते हुए कहा कि प्रदेश की जनता के स्वास्थ्य की चिंता करते हुए वह सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करके बड़प्पन दिखाएं।
बियानी ने सफाई कर्मचारियों के नेताओं से संपर्क करने के बाद में यह भी जाना कि ठेका प्रथा होने के कारण उनको मिलने वाला वेतन मात्र 8-9 हजार रु है जिसके कारण उनका जीवन ज्ञापन करना मुश्किल बना हुआ है उन्होंने यह भी कहा कि इतनी कम तनख्वाह पाने के कारण आज उनकी धहैनिय व्यवस्था की जिम्मेवार प्रदेश की भाजपा सरकार है, आज इसी कारण से उनके बच्चे उच्च शिक्षा प्राप्त नहीं कर पा रहे। ऐसे मे सरकार को इन कर्मचारियों की मांगो को मानते हुए उनके परिवारों की शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं निशुल्क करें ताकि यह भी पढ़ लिखकर योग्य बन सके तथा अपने परिवारों का उत्थान कर सके।
उन्होंने यह भी कहा कि आज प्रदेश की निकम्मी सरकार जिसे जनता के स्वास्थ्य की भी चिंता नहीं और सफाई कर्मचारियों की मानी गई मांगों को लागू करने में नाकामयाब रही है। सफाई कर्मचारियों को चाहिए कि बह गंदगी के ढेर बीजेपी नेताओं के घरों के आगे इकठा होने दे ना की आम रास्तो पर ताकि आम जन का साथ उन्हें मिल सके।बियानी ने कहा कि प्रदेश की मौजूदा सरकार ने उनसे बादा खिलाफ़ी की इस मे आम जनता का क्या दोस, इस लिए यह गंदगी के ढेर शहरों में लगने की बजाये सरकार के नुमाइंदों के घरों के आगे होने चाहिए ताकि उन्हें सरकार के बादा खिलाफी का अहसास हो।
प्रदेश में सफाई व्यवस्था लगातार बिगड़ रही है जगह-जगह कूड़े के ढेर, गंदे नाले और जलभराव आम जनता के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुके हैं। इसका असर केवल शहर की सुंदरता पर नहीं, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य और जीवन पर भी पड़ रहा है, सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर सफाई कर्मचारी अपनी जायज़ मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, तो सरकार उनकी बात सुनने के बजाय समस्या को लंबा क्यों खींच रही है? सफाई कर्मचारी कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं हैं—वे हमारे शहरों और गांवों को स्वच्छ रखने वाले आवश्यक कर्मचारी हैं। उनके अधिकारों, वेतन, सुरक्षा उपकरणों, नियमित रोजगार और अन्य उचित मांगों पर सरकार को संवेदनशीलता के साथ बातचीत करनी चाहिए।
सरकार को यह समझना होगा कि सफाई व्यवस्था कोई वैकल्पिक सेवा नहीं है। यदि कर्मचारी काम से बाहर हैं और व्यवस्था चरमरा रही है, तो इसका सबसे सीधा असर आम परिवारों पर पड़ता है। कूड़े के ढेर किसी पार्टी के घर के सामने नहीं, आम आदमी के घर और मोहल्ले के आसपास जमा होते हैं। मैं प्रदेश की जनता से अपील करता हूं कि इस मुद्दे को केवल सफाई कर्मचारियों की समस्या न समझें। यह हर नागरिक के स्वास्थ्य, सम्मान और सुरक्षित वातावरण का सवाल है।
जनता को अपनी आवाज लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से उठानी चाहिए और सरकार से जवाब मांगना चाहिए—
जब कर्मचारियों की मांगें जायज़ हैं तो सरकार उन्हें मान क्यों नहीं रही?
अगर मांगें गलत हैं तो सरकार बातचीत करके समाधान क्यों नहीं निकाल रही? और जब जनता के स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है तो सरकार चुप क्यों बैठी है?
सरकार को टकराव का रास्ता छोड़कर तत्काल सफाई कर्मचारियों से बातचीत करनी चाहिए, उनकी जायज़ मांगों का समाधान करना चाहिए और प्रदेश में सफाई व्यवस्था सामान्य करने के लिए ठोस कार्ययोजना सामने रखनी चाहिए। यह लड़ाई किसी राजनीतिक दल की नहीं, स्वच्छता, स्वास्थ्य और सम्मान की लड़ाई है।
आइए, हम सब शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करें—
“सफाई कर्मचारी का सम्मान करो, जनता के स्वास्थ्य का ध्यान करो।”
“कूड़ा नहीं चाहिए—जवाब चाहिए, समाधान चाहिए।” यहीं आम जनता की मांग है।
