Run for Khadi: गांधी जयंती पर ‘रन फॉर खादी’ से दिया स्वदेशी अपनाने का संदेश, 100 से अधिक युवाओं ने लिया हिस्सा
Run for Khadi: रामपुर: गांधी जयंती के अवसर पर रामपुर में खादी और ग्रामोद्योग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत उत्तर प्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग विभाग, मेरा युवा भारत एवं जीटी भारत के संयुक्त तत्वावधान में खादी ग्रामोद्योग सेवा सदन, सीओडी फार्म, आगापुर रोड पर कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं और आमजन को खादी के महत्व, स्वदेशी उत्पादों को अपनाने तथा स्थानीय कत्तिनों और बुनकरों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के प्रति जागरूक किया गया।
गांधी जयंती के मौके पर आयोजित कार्यक्रमों में ‘रन फॉर खादी’ खादी जागरूकता रैली, ‘हस्ताक्षर फॉर खादी’ और चरखा डेमो प्रमुख आकर्षण रहे। कार्यक्रम के दौरान युवाओं और खादी कामगारों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और खादी को जन-जन तक पहुंचाने का संदेश दिया।
Run for Khadi: ‘रन फॉर खादी’ में युवाओं और खादी कामगारों की भागीदारी
कार्यक्रम के तहत आयोजित ‘रन फॉर खादी’ जागरूकता रैली में 100 से अधिक युवाओं एवं खादी कामगारों ने हिस्सा लिया। रैली का उद्देश्य खादी के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना और अधिक से अधिक लोगों को स्वदेशी उत्पादों के इस्तेमाल के लिए प्रेरित करना रहा।
खादी यात्रा का संचालन जिला ग्रामोद्योग अधिकारी, जिला युवा अधिकारी एवं निदेशक आरसेटी द्वारा किया गया। रैली के दौरान प्रतिभागियों ने खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों के प्रति जागरूकता फैलाने का संदेश दिया। इस आयोजन में युवाओं की भागीदारी को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना गया, क्योंकि युवाओं के माध्यम से खादी और स्वदेशी उत्पादों की परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
कार्यक्रम में शामिल प्रतिभागियों ने खादी के महत्व को समझने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले उत्पादों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। आयोजन के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि खादी केवल एक कपड़ा नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय रोजगार से जुड़ा महत्वपूर्ण माध्यम भी है।
Run for Khadi: खादी जागरूकता रैली का क्या रहा उद्देश्य?
‘रन फॉर खादी’ के आयोजन का मुख्य उद्देश्य युवाओं और आमजन को खादी तथा ग्रामोद्योग उत्पादों के प्रति जागरूक करना रहा। इसके साथ ही देश की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने और स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहित करने का संदेश भी दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान लोगों से खादी को अपनाने और स्थानीय कत्तिनों तथा बुनकरों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में सहयोग करने का आह्वान किया गया। आयोजकों का संदेश रहा कि स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले उत्पादों का इस्तेमाल करने से कारीगरों और कामगारों को प्रोत्साहन मिलता है।
खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र बड़ी संख्या में कत्तिनों, बुनकरों और अन्य कामगारों की आजीविका से जुड़ा है। ऐसे में खादी के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाले कार्यक्रमों को स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने से जोड़कर देखा गया।

Run for Khadi: ‘हस्ताक्षर फॉर खादी’ और चरखा डेमो का आयोजन
गांधी जयंती के अवसर पर केवल जागरूकता रैली ही नहीं, बल्कि ‘हस्ताक्षर फॉर खादी’ और चरखा डेमो का भी आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को खादी की परंपरा और इसके पीछे जुड़े श्रम के बारे में जागरूक करने का प्रयास किया गया।
चरखा डेमो के जरिए खादी निर्माण की पारंपरिक प्रक्रिया से लोगों को परिचित कराया गया। चरखा खादी की पहचान से जुड़ा हुआ है और महात्मा गांधी के स्वदेशी विचारों में इसका विशेष महत्व रहा है। कार्यक्रम के दौरान चरखे के प्रदर्शन के माध्यम से खादी की परंपरा और इसके सामाजिक महत्व को सामने रखा गया।
वहीं, ‘हस्ताक्षर फॉर खादी’ के माध्यम से लोगों को खादी अपनाने के प्रति जागरूक किया गया। कार्यक्रम में युवाओं की भागीदारी ने यह संदेश दिया कि स्वदेशी उत्पादों और स्थानीय कारीगरों को बढ़ावा देने में नई पीढ़ी भी अपनी भूमिका निभा सकती है।
यह भी पढ़ें- Rampur RLD Minority Conference: रामपुर में राष्ट्रीय लोक दल अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ का सम्मेलन, संगठन विस्तार और जनसंपर्क पर जोर
Run for Khadi: स्थानीय कत्तिनों और बुनकरों को मिलेगा प्रोत्साहन
कार्यक्रम के दौरान स्थानीय कत्तिनों और बुनकरों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में सहयोग करने का आह्वान किया गया। खादी से जुड़े कामगारों के लिए स्थानीय बाजार और उपभोक्ताओं का समर्थन महत्वपूर्ण माना जाता है। जब लोग स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले खादी एवं ग्रामोद्योग उत्पादों को खरीदते और इस्तेमाल करते हैं, तो इससे इनसे जुड़े कामगारों को प्रोत्साहन मिलता है।
आयोजन के माध्यम से लोगों को यह संदेश दिया गया कि स्वदेशी उत्पादों को अपनाना स्थानीय स्तर पर रोजगार और पारंपरिक हुनर को बढ़ावा देने की दिशा में एक कदम हो सकता है। इसी उद्देश्य से खादी को दैनिक जीवन में शामिल करने के लिए जागरूकता पैदा की गई।
Run for Khadi: जिला ग्रामोद्योग अधिकारी ने किया खादी अपनाने का आह्वान
जिला ग्रामोद्योग अधिकारी भूपेन्द्र सिंह ने खादी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि खादी पहनना स्थानीय कत्तिनों और बुनकरों के साथ जुड़ने तथा स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने आमजन से खादी को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “आइए, हम सब मिलकर खादी अपनाएं, सार्वजनिक जीवन में खादी को हिस्सा बनाएं और इस गौरवशाली परंपरा को नई पहचान दें।”
भूपेन्द्र सिंह ने लोगों से अपील की कि खादी को केवल विशेष अवसरों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसे सार्वजनिक जीवन का हिस्सा बनाने की दिशा में भी प्रयास किए जाएं। उनके अनुसार खादी से जुड़ना स्थानीय कत्तिनों और बुनकरों के काम को प्रोत्साहित करने के साथ स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
Run for Khadi: गांधी जयंती पर स्वदेशी और खादी का संदेश
गांधी जयंती के अवसर पर आयोजित ‘रन फॉर खादी’ सहित अन्य कार्यक्रमों ने स्वदेशी उत्पादों और खादी के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया। आयोजन में युवाओं और खादी कामगारों की भागीदारी से यह भी स्पष्ट हुआ कि खादी की परंपरा को आगे बढ़ाने में नई पीढ़ी की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
कार्यक्रम के माध्यम से आमजन को खादी एवं ग्रामोद्योग उत्पादों के इस्तेमाल के लिए जागरूक किया गया। साथ ही स्थानीय कत्तिनों और बुनकरों को रोजगार से जोड़ने और उनके कार्य को प्रोत्साहित करने में सहयोग की अपील की गई।
रामपुर में आयोजित इन कार्यक्रमों के जरिए गांधी जयंती को खादी, स्वदेशी और स्थानीय रोजगार से जोड़ते हुए लोगों तक जागरूकता का संदेश पहुंचाया गया। ‘रन फॉर खादी’, ‘हस्ताक्षर फॉर खादी’ और चरखा डेमो जैसे आयोजनों ने खादी की परंपरा और इसके महत्व को लोगों के बीच सामने रखा। आयोजन का मुख्य संदेश यही रहा कि खादी को अपनाकर स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा दिया जा सकता है और स्थानीय कत्तिनों तथा बुनकरों के कार्य को भी प्रोत्साहन दिया जा सकता है।
