बिहार में 65 लाख मतदाताओं के नाम हटाने पर चुनाव आयोग का सुप्रीम कोर्ट से दो टूक

  • रिपोर्ट- मंजय वर्मा

पटना। बिहार में चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों के बीच आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि किसी भी मतदाता से उसका अधिकार नहीं छीना जाएगा। आयोग ने स्पष्ट किया कि बिना नोटिस दिए किसी भी मतदाता का नाम वोटर लिस्ट से बाहर नहीं किया जाएगा।

एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयोग ने बताया कि SIR प्रक्रिया के तहत हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं कि सभी पात्र मतदाताओं का नाम फाइनल सूची में शामिल रहे। सख्त दिशानिर्देश जारी किए गए हैं कि किसी भी मतदाता का नाम गलत तरीके से न हटे।

हाल ही में आयोग पर 65 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाने के आरोप लगे थे। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए आयोग ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट दायर कर कहा कि नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होगी। सभी मतदाताओं को दस्तावेज जमा करने के पर्याप्त अवसर दिए जा रहे हैं और बूथ स्तर पर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।

चुनाव आयोग के अनुसार, इस कार्य के लिए 38 जिला निर्वाचन अधिकारी, 243 निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी, 2,976 सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी, 77,895 बूथ स्तरीय अधिकारी, 2,45,716 स्वयंसेवक और 1,60,813 बूथ स्तरीय एजेंट नियुक्त किए गए हैं।

1 अगस्त को जारी ड्राफ्ट लिस्ट में 7.89 करोड़ मतदाताओं में से 7.24 करोड़ ने ही अपने दस्तावेज जमा किए हैं। जिन मतदाताओं के दस्तावेज नहीं मिले हैं, उनकी जानकारी समय-समय पर सभी राजनीतिक दलों को भेजी जा रही है। बिहार से बाहर रहने वाले मतदाताओं के लिए अखबारों में 246 विज्ञापन प्रकाशित किए गए हैं।

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