Cyber Fraud: दुर्ग पुलिस का बड़ा खुलासा, 1,242 म्यूल बैंक खातों का नेटवर्क बेनकाब; 122 आरोपी गिरफ्तार, 3 करोड़ रुपये फ्रीज
साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क पर पुलिस की कार्रवाई
दुर्ग: छत्तीसगढ़ के दुर्ग पुलिस ने साइबर ठगी और ऑनलाइन सट्टे से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस जांच में 1,242 म्यूल (Mule) बैंक खातों की पहचान की गई, जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधों से ठगी गई रकम को एक खाते से दूसरे खाते में भेजने के लिए किया जा रहा था। इस कार्रवाई के दौरान 117 म्यूल खाताधारकों और 5 म्यूल एजेंटों सहित कुल 122 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। साथ ही करीब 3 करोड़ रुपये की संदिग्ध राशि को फ्रीज कराया गया है।
क्या होते हैं म्यूल बैंक अकाउंट?
पुलिस के अनुसार, म्यूल बैंक अकाउंट ऐसे बैंक खाते होते हैं जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधी अपनी पहचान छिपाने और ठगी के पैसों को इधर-उधर ट्रांसफर करने के लिए करते हैं। गिरोह के सदस्य लोगों को कमीशन, नौकरी या घर बैठे आसान कमाई का लालच देकर उनके बैंक खाते अपने कब्जे में ले लेते थे। इसके बाद उन्हीं खातों के जरिए साइबर ठगी, ऑनलाइन सट्टा, फर्जी निवेश (Fake Investment), डिजिटल अरेस्ट और शेयर ट्रेडिंग फ्रॉड से प्राप्त रकम का लेन-देन किया जाता था।
ऐसे फंसाए जाते थे लोग
जांच में सामने आया कि गिरोह पहले लोगों को आसान कमाई का झांसा देता था। इसके बाद उनसे—
- बैंक खाता
- एटीएम कार्ड
- पासबुक
- चेकबुक
- मोबाइल नंबर
- सिम कार्ड
इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी
ले ली जाती थी। बाद में इन्हीं खातों का इस्तेमाल साइबर अपराधों में होने वाले पैसों के लेन-देन के लिए किया जाता था। कई खाताधारकों को इस बात की जानकारी तक नहीं होती थी कि उनका बैंक खाता अवैध गतिविधियों में इस्तेमाल हो रहा है।
सात महीने चला विशेष अभियान
दुर्ग पुलिस के अनुसार, 1 जनवरी 2026 से 29 जुलाई 2026 तक विशेष अभियान चलाया गया। इस दौरान पुलिस मुख्यालय की साइबर शाखा, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C), राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP), विभिन्न राज्यों से प्राप्त शिकायतों और बैंकों से मिली सूचनाओं का विश्लेषण किया गया।
जांच के दौरान—
- बैंक खातों के लेन-देन
- KYC दस्तावेज
- इंटरनेट बैंकिंग लॉग
- UPI ट्रांजेक्शन
- अन्य डिजिटल साक्ष्यों
की गहन पड़ताल की गई। इसी जांच के आधार पर 18 मामलों में 1,242 संदिग्ध म्यूल खातों की पहचान की गई।
3 करोड़ रुपये की राशि कराई गई फ्रीज
पुलिस ने कार्रवाई के दौरान संदिग्ध लेन-देन से जुड़ी करीब 3 करोड़ रुपये की राशि को फ्रीज कराया है ताकि आगे उसका इस्तेमाल या निकासी न हो सके। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में अन्य खातों और आरोपियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
बैंक अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
जांच एजेंसियां अब इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि कहीं बैंकिंग प्रक्रिया में किसी कर्मचारी या अधिकारी की लापरवाही अथवा संलिप्तता तो नहीं रही। यदि जांच में किसी बैंक अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
क्यों गंभीर है यह मामला
साइबर ठगी के मामलों में अपराधी सीधे अपने खातों का उपयोग नहीं करते, बल्कि म्यूल अकाउंट के जरिए पैसे कई स्तरों पर ट्रांसफर कर देते हैं, जिससे जांच एजेंसियों के लिए असली अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। दुर्ग पुलिस की यह कार्रवाई ऐसे नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।
आगे क्या होगा?
दुर्ग पुलिस अब पूरे नेटवर्क की वित्तीय कड़ियों की जांच कर रही है। डिजिटल साक्ष्यों, बैंक रिकॉर्ड और गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर अन्य संदिग्ध खातों और नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान की जा रही है। पुलिस ने लोगों से भी अपील की है कि वे किसी भी व्यक्ति को कमीशन या आसान कमाई के लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड या बैंकिंग जानकारी उपलब्ध न कराएं।
