सी एम योगी कहते हैं मंदिर-मठ पर अतिक्रमण नहीं, फिर काशी राज काली मंदिर का रास्ता घेरने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं?”

  • रिपोर्ट- पंकज झां… 

वाराणसी। धर्म और आस्था की राजधानी कही जाने वाली काशी में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और सरकारी दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गोदौलिया स्थित काशी राज काली मंदिर, जो काशी राज धर्म कार्य निधि ट्रस्ट के अधीन संचालित है, आज कथित अतिक्रमण की समस्या से जूझ रहा है। आरोप है कि कुछ लोगों ने मंदिर तक पहुंचने वाले मार्ग के आसपास कब्जा कर श्रद्धालुओं की आवाजाही को प्रभावित कर दिया है, जबकि इस संबंध में कई बार शिकायतें किए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

स्थानीय श्रद्धालुओं और ट्रस्ट से जुड़े लोगों का कहना है कि मंदिर के मार्ग पर हो रहे कथित अतिक्रमण से न केवल दर्शनार्थियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि काशी की प्राचीन धार्मिक विरासत भी खतरे में पड़ती दिखाई दे रही है। उनका आरोप है कि मंदिर के आसपास की मूल संरचना और ऐतिहासिक पहचान को धीरे-धीरे समाप्त करने की कोशिश की जा रही है।

बताया जाता है कि काशी राज धर्म कार्य निधि ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने कई बार मौके पर पहुंचकर संबंधित लोगों को अतिक्रमण हटाने के लिए कहा। कई बार आपत्ति दर्ज कराई गई, समझाने का प्रयास किया गया, लेकिन कथित रूप से अतिक्रमण करने वालों पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। स्थिति यह है कि मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को संकरे और बाधित मार्ग से होकर गुजरना पड़ रहा है, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

मामले की जानकारी जिला प्रशासन को भी लिखित रूप से दी जा चुकी है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जिला अधिकारी को शिकायत सौंपे जाने के बाद भी अभी तक न तो कोई प्रभावी जांच दिखाई दी है और न ही किसी प्रकार की सख्त कार्रवाई सामने आई है। यही कारण है कि अब स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि आखिर प्रशासन की चुप्पी का कारण क्या है?

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सार्वजनिक मंचों से कई बार स्पष्ट कह चुके हैं कि मंदिरों, मठों और ट्रस्टों की संपत्तियों पर अवैध अतिक्रमण किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री लगातार धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और संरक्षण की बात करते रहे हैं। ऐसे में गोदौलिया स्थित काशी राज काली मंदिर से जुड़े इस विवाद ने एक बड़ा प्रश्न खड़ा कर दिया है—यदि सरकार की नीति स्पष्ट है और शिकायतें प्रशासन तक पहुंच चुकी हैं, तो फिर कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है?

श्रद्धालुओं का कहना है कि यह केवल एक रास्ते का मामला नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, काशी की धार्मिक धरोहर और कानून के समान अनुपालन का प्रश्न है। उनका मानना है कि यदि मंदिरों और ट्रस्टों की संपत्तियों को सुरक्षित रखने के सरकारी दावे वास्तविकता में बदलने हैं, तो ऐसे मामलों में तत्काल और निष्पक्ष कार्रवाई आवश्यक है।

स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए, मंदिर के मार्ग को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए, दोषी पाए जाने वाले लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए तथा काशी की ऐतिहासिक धार्मिक धरोहर की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

अब सबकी निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं। काशी पूछ रही है—जब मुख्यमंत्री स्वयं कहते हैं कि मंदिर और मठ की भूमि पर कोई अतिक्रमण नहीं कर सकता, तो फिर काशी राज काली मंदिर के मार्ग पर उठ रहे इन आरोपों का समाधान कब होगा?

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