ड्रोन के बढ़ते खतरे पर CISF का ‘टेक्नोलॉजी कवच’, DFI के साथ समझौता, अब महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा होगी और अभेद्य
New Delhi. देश की महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील अवसंरचनाओं की सुरक्षा को आधुनिक तकनीक से लैस करने की दिशा में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने बड़ा कदम उठाया है। आसमान से मंडराते संभावित खतरों और अनधिकृत ड्रोन गतिविधियों का मुकाबला करने के लिए CISF ने Drone Federation of India (DFI) के साथ 28 अगस्त 2026 को समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता देश की महत्वपूर्ण औद्योगिक एवं रणनीतिक संपत्तियों की सुरक्षा व्यवस्था को नई तकनीकी धार देने वाला माना जा रहा है।
समझौते पर CISF की ओर से डॉ. सी. डी. नाइक, उप महानिरीक्षक (DIG) एवं प्रधानाचार्य, MPRTC तथा Drone Federation of India की ओर से श्री स्मित शाह, अध्यक्ष, DFI ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर CISF के महानिदेशक श्री प्रवीर रंजन सहित वरिष्ठ अधिकारी और DFI के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

समझौते की सबसे अहम कड़ी RTC Behror को ड्रोन एवं काउंटर-ड्रोन तकनीक के Centre of Excellence के रूप में विकसित करना है। यहां आधुनिक तकनीकों के प्रशिक्षण, अनुसंधान, संयुक्त अभ्यास और परिचालन क्षमता को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
CISF और DFI के सहयोग से ड्रोन संबंधी मानक संचालन प्रक्रियाएं (SOPs) विकसित की जाएंगी। संयुक्त प्रशिक्षण एवं अभ्यासों के साथ-साथ स्वदेशी ड्रोन फॉरेंसिक्स क्षमता विकसित करने की दिशा में भी काम होगा। इससे सुरक्षा बलों को संदिग्ध अथवा अनधिकृत ड्रोन गतिविधियों की पहचान, निगरानी और उससे निपटने की क्षमता और मजबूत होगी।
तकनीक के इस दौर में ड्रोन जहां निगरानी, आपदा प्रबंधन और अन्य सकारात्मक कार्यों में उपयोगी साबित हो रहे हैं, वहीं संवेदनशील एवं महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों के आसपास अनधिकृत ड्रोन गतिविधियां सुरक्षा के लिए नई चुनौती भी बन रही हैं। ऐसे समय में CISF का यह तकनीकी कदम बेहद महत्वपूर्ण है।
नई क्षमता से CISF के जवानों और अधिकारियों को ड्रोन की पहचान, निगरानी, तकनीकी विश्लेषण और काउंटर-ड्रोन प्रणालियों के प्रभावी इस्तेमाल का प्रशिक्षण मिलेगा। यानी अब सुरक्षा व्यवस्था केवल जमीन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आसमान से आने वाले संभावित खतरे पर भी पैनी नजर रहेगी।
देश के हवाई अड्डों, औद्योगिक इकाइयों, ऊर्जा प्रतिष्ठानों और अन्य महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला CISF लगातार अपनी क्षमताओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ रहा है। DFI के साथ यह समझौता इसी तकनीकी आधुनिकीकरण की कड़ी है।
यह पहल केवल एक समझौता नहीं, बल्कि बदलते सुरक्षा परिदृश्य के अनुरूप ‘स्मार्ट सिक्योरिटी’ की दिशा में बड़ा कदम है। ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक के क्षेत्र में विशेषज्ञता विकसित होने से CISF भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों के लिए और अधिक तैयार हो सकेगा।
आसमान में मंडराता खतरा हो या जमीन पर संवेदनशील प्रतिष्ठान—CISF अब हर दिशा में सुरक्षा का कवच मजबूत करने की तैयारी में है। तकनीक, प्रशिक्षण और तत्परता के इस संगम से देश की महत्वपूर्ण अवसंरचना की सुरक्षा को नई ताकत मिलने की उम्मीद है।
