बुलंदशहर हर्निया ऑपरेशन मामला: मानवाधिकार आयोग सख्त, डीएम-सीएमओ को 15 सितंबर तक रिपोर्ट या व्यक्तिगत पेशी के निर्देश
बुलंदशहर: हर्निया ऑपरेशन के बाद एक युवक की हालत बिगड़ने के मामले में मानवाधिकार आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय संगठन मंत्री देवेन्द्र सिंह राणा की शिकायत पर सुनवाई करते हुए आयोग ने बुलंदशहर के जिलाधिकारी (डीएम) और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को 15 सितंबर 2026 तक आयोग के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने अथवा विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
मानवाधिकार आयोग के सदस्य ब्रज भूषण ने 29 जुलाई 2026 को पारित आदेश में कहा कि आयोग द्वारा पहले मांगी गई रिपोर्ट निर्धारित समयसीमा तक प्रस्तुत नहीं की गई। ऐसे में अधिकारियों को अंतिम अवसर दिया जा रहा है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि तय समय के भीतर आदेश का पालन नहीं किया गया तो विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।
ऑपरेशन के बाद बिगड़ी युवक की हालत
शिकायत के मुताबिक, बुलंदशहर जिले के ग्राम अमरपुर, विकासखंड ऊंचागांव, तहसील स्याना निवासी करीब 20 वर्षीय हैदर, पुत्र जावेद खान, गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही का शिकार हुआ। हैदर के पिता चाय की छोटी दुकान चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं।
बताया गया कि 1 अप्रैल 2026 को हुई अल्ट्रासाउंड (यूएसजी) जांच में युवक को राइट इंगुइनल हर्निया की पुष्टि हुई थी। इसके बाद 2 अप्रैल 2026 को बुलंदशहर के काला आम स्थित सुधीर नर्सिंग होम एंड हार्ट सेंटर में डॉ. सुधीर कुमार अग्रवाल द्वारा हर्निया का ऑपरेशन किया गया।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि ऑपरेशन के तुरंत बाद मरीज की हालत गंभीर हो गई। उसके शरीर में अत्यधिक सूजन, असहनीय दर्द, फ्लूइड कलेक्शन (पानी भरना) और प्रभावित हिस्से का नीला पड़ जाना जैसी गंभीर समस्याएं सामने आईं। इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने समुचित इलाज या किसी उच्च स्तरीय अस्पताल में रेफर करने के बजाय मरीज को घर भेज दिया। वर्तमान में भी युवक दर्द और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहा है।
पहले भी मांगी गई थी रिपोर्ट
मानवाधिकार आयोग ने इससे पहले 19 मई 2026 को डीएम और सीएमओ को 28 जुलाई 2026 तक विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध कराने तथा शिकायतकर्ता को जांच प्रक्रिया में शामिल करने के निर्देश दिए थे। हालांकि निर्धारित समयसीमा तक आयोग को कोई रिपोर्ट नहीं मिली।
इसी को गंभीरता से लेते हुए आयोग ने अब 15 सितंबर 2026 तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने या व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का अंतिम निर्देश जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है।
शिकायतकर्ता ने उठाई ये मांगें
आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय संगठन मंत्री देवेन्द्र सिंह राणा ने आयोग से मामले की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराने, सभी चिकित्सकीय अभिलेख सुरक्षित रखने, संबंधित चिकित्सक एवं अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई करने, पीड़ित युवक को सरकारी खर्च पर बेहतर इलाज उपलब्ध कराने तथा आर्थिक सहायता और उचित मुआवजा देने की मांग की है।
संगठन ने कहा है कि पीड़ित को न्याय दिलाने और दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित कराने के लिए उसका संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।
