50 हजार के ऋण से खड़ा किया मोमबत्ती का कारोबार, अब हर महीने 17 हजार की बचत कर कमलेश बनीं मिसाल
एनआरएलएम की योजना ने दिया नया जीवन: पति के अपाहिज होने पर नहीं हारीं हिम्मत, 7 अन्य महिलाओं को भी दिया रोजगार
-डीएम ने जज्बे को किया सलाम: कार्यालय में बुलाकर किया सम्मानित, कहा- हर महिला बने आत्मनिर्भर
- रिपोर्ट: शाहबाज़ खां
रामपुर के शाहबाद विकास खंड के ग्राम चकरपुर कदीम की रहने वाली 36 वर्षीय कमलेश ने यह साबित कर दिया है कि मुश्किलें इंसान के हौसले से बड़ी नहीं होतीं। फरवरी 2025 में एक सड़क दुर्घटना में ई-रिक्शा चालक पति के अपाहिज होने के बाद, कमलेश ने ‘राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन’ (एनआरएलएम) के तहत 50 हजार रुपये का ऋण लेकर मोमबत्ती निर्माण का व्यवसाय शुरू किया। आज वह न केवल हर महीने 15 से 17 हजार रुपये की बचत कर अपने तीन बच्चों की परवरिश कर रही हैं, बल्कि अपने समूह की अन्य महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ रही हैं। उनके इसी अदम्य साहस को देखते हुए जिलाधिकारी ने उन्हें कार्यालय बुलाकर विशेष रूप से सम्मानित किया है।
रुद्रपुर से वापसी और किस्मत की करारी चोट
कमलेश के परिवार की आर्थिक स्थिति हमेशा से चुनौतीपूर्ण थी। हालात सुधारने के लिए वह पहले अपना जिला छोड़कर रुद्रपुर गईं, लेकिन वहां पर्याप्त कमाई न होने पर उन्हें लौटना पड़ा। वापसी के बाद उनके पति ने एक ई-रिक्शा किराए पर लेकर चलाना शुरू किया। सब कुछ पटरी पर लौटता दिख ही रहा था कि फरवरी 2025 में किस्मत ने एक बार फिर करारी चोट की। एक हादसे में उनके पति गंभीर रूप से घायल हो गए और पैरों से अपाहिज होकर घर बैठ गए। नौ साल के बेटे और सात व चार साल की दो छोटी बेटियों समेत पूरे परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी अचानक कमलेश के कंधों पर आ गई।
एनआरएलएम योजना से मिली संजीवनी
घोर निराशा के बीच कमलेश को एनआरएलएम की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने खुद को ‘शिव स्वयं सहायता समूह’ से जोड़ा, जिसमें कुल 14 महिलाएं शामिल हैं। कमलेश अपनी लगन के चलते इस समूह की अध्यक्ष बनीं। जब समूह के खाते में 1 लाख 10 हजार रुपये की सीआईएफ (कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड) राशि आई, तो कमलेश ने हार मानकर बैठने के बजाय 50 हजार रुपये का ऋण लिया। इसी पैसे से उन्होंने मोमबत्ती बनाने का कार्य शुरू किया, जो उनके और उनके परिवार के लिए संजीवनी साबित हुआ।
मेहनत लाई रंग, अब बाजार में छाईं कमलेश
पिछले एक साल से मोमबत्ती का व्यवसाय कर रहीं कमलेश आज आर्थिक रूप से पूरी तरह आत्मनिर्भर हैं। इस काम में उनके साथ समूह की सात अन्य महिलाएं भी जुड़ी हुई हैं। कमलेश के बनाए उत्पाद अब आसपास के बाजारों तक पहुंच रहे हैं। विभागीय अधिकारियों के सहयोग से उन्होंने मुरादाबाद में दीवाली के अवसर पर स्टॉल लगाकर मात्र दो दिन में पांच हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया था। आज उनके व्यवसाय से होने वाली आय से न केवल परिवार की जरूरतें पूरी हो रही हैं, बल्कि प्रतिमाह 15 से 17 हजार रुपये की बचत भी हो रही है, जिससे बच्चों की शिक्षा सुचारू रूप से चल रही है।
डीएम की नई पहल: ‘संघर्ष से सफलता तक’ का सम्मान
कमलेश की इस प्रेरणादायक यात्रा को देखते हुए जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने एक सकारात्मक पहल की है। उन्होंने कमलेश को अपने कार्यालय में आमंत्रित कर सम्मानित किया। डीएम का मानना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर जो महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं, उन्हें जिला स्तर पर पहचान और सम्मान मिलना चाहिए। जिलाधिकारी ने कहा कि कठिन परिस्थितियां व्यक्ति की हिम्मत की परीक्षा लेती हैं। कमलेश ने विपरीत हालात में स्वयं सहायता समूह के जरिए जो मुकाम हासिल किया है, वह पूरे समाज के लिए एक मिसाल है। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि जनपद में ऐसी प्रेरणादायी महिलाओं की पहचान कर उन्हें प्रोत्साहित किया जाए, ताकि ज्यादा से ज्यादा महिलाएं स्वरोजगार अपनाकर आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें।
