बैंक की बड़ी लापरवाही: जीवित बुजुर्ग महिला को मृत दिखाकर 6 महीने से रोकी पेंशन, खाते से निकाल लिए 85 हज़ार रुपये

गुरदासपुर (पंजाब): राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही वृद्धावस्था पेंशन योजना बुजुर्गों के लिए जीवन का सहारा मानी जाती है, लेकिन गुरदासपुर ज़िले के वडाला ग्रंथियाँ गाँव में एक बुजुर्ग महिला के साथ जो हुआ, वह न सिर्फ हैरान करने वाला है, बल्कि सरकारी सिस्टम की लापरवाही की पोल खोलता है।

दरअसल, बैंक और संबंधित विभाग ने एक जीवित विधवा महिला को अपने रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया, जिसके चलते पिछले छह महीने से उसकी पेंशन बंद कर दी गई है। इतना ही नहीं, उल्टा बैंक ने महिला के खाते से लगभग ₹85,000 रुपये भी निकाल लिए। जब महिला ने अधिकारियों से इसकी शिकायत की और अपनी बीमारी तथा पारिवारिक स्थिति के बारे में बताया, तो किसी ने भी उसकी बात नहीं सुनी।

महिला ने बताया कि उसका एक बेटा किसी गंभीर बीमारी (संभावित कैंसर) से जूझ रहा है, दूसरा बेटा विकलांग है, और वह खुद भी दिल की मरीज है। इतनी कठिन परिस्थितियों में वह पेंशन की राशि पर ही निर्भर थी। लेकिन जब वह बैंक पहुंची, तो उसे जवाब मिला – “आप तो रिकॉर्ड में मरी हुई हैं, आपको 4 साल से पेंशन मिल रही थी, अब वह राशि वापस देनी होगी।”

इस अमानवीय व्यवहार और लापरवाही पर बैंक अधिकारी कोई जवाब देने को तैयार नहीं हैं। बुजुर्ग महिला अब इंसाफ के लिए अधिकारियों और मीडिया के चक्कर काट रही है, लेकिन अभी तक उसे न तो पेंशन बहाल हुई है और न ही ₹85 हज़ार की राशि लौटाई गई है।

यह मामला न केवल सरकारी तंत्र की खामियों को उजागर करता है, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर करता है कि जिन योजनाओं को बुजुर्गों के लिए सुरक्षा कवच माना जाता है, यदि वहीं उनके लिए संकट बन जाएँ, तो फिर वे कहां जाएँगे?

अब ज़रूरत है कि प्रशासन इस मामले में तुरंत जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करे और महिला को न्याय दिलाया जाए।

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