पहाड़ों की नदियां नहीं, अमृतसर की नहर में तैयार हो रहे पंजाब के पहले राफ्टर
तारांवाला पुल के पास UBDC नहर में सुबह-शाम 3-3 घंटे चल रही राफ्टिंग की ट्रेनिंग
-खालसा कॉलेज, खालसा यूनिवर्सिटी और खालसा कॉलेज फॉर वूमेन के खिलाड़ी टीम में शामिल
-17 सितंबर से देवप्रयाग में राष्ट्रीय राफ्टिंग प्रतियोगिता, पंजाब की टीम पहली बार लेगी हिस्सा
Amritsar: पंजाब में एडवेंचर स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने की दिशा में एक नई पहल शुरू हुई है। अमृतसर में पंजाब की पहली रिवर राफ्टिंग टीम तैयार की जा रही है। खास बात यह है कि जिन नदियों और तेज बहाव वाले पहाड़ी इलाकों में आमतौर पर रिवर राफ्टिंग की ट्रेनिंग होती है, वहां जाने से पहले खिलाड़ियों को अमृतसर की UBDC नहर में बेसिक ट्रेनिंग दी जा रही है। तारांवाला पुल के पास नहर में खिलाड़ी सुबह और शाम करीब तीन-तीन घंटे अभ्यास कर रहे हैं।
पंजाब एसोसिएशन फॉर राफ्टिंग एंड एडवेंचर स्पोर्ट्स की ओर से तैयार की जा रही इस टीम में खालसा कॉलेज, खालसा यूनिवर्सिटी और खालसा कॉलेज फॉर वूमेन से जुड़े छात्र-छात्राएं शामिल हैं। वर्तमान में करीब 11 से 12 खिलाड़ी प्रशिक्षण ले रहे हैं। इनमें लड़के और लड़कियां दोनों शामिल हैं। खिलाड़ियों को राफ्ट चलाने के साथ-साथ पानी की धारा को समझने, टीम के बीच तालमेल बनाने और मुश्किल परिस्थितियों में सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू करने की ट्रेनिंग भी दी जा रही है।

एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी कैप्टन अजय वर्मा ने बताया कि वह मर्चेंट नेवी से करीब 40 वर्ष की सेवा के बाद वर्ष 2020 में सेवानिवृत्त हुए और अमृतसर के रहने वाले हैं। उन्होंने बताया कि पंजाब में एडवेंचर स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने और युवाओं को इस खेल का एक्सपोजर देने के उद्देश्य से एसोसिएशन बनाई गई है। उनके मुताबिक पंजाब में पहली बार रिवर राफ्टिंग टीम तैयार की जा रही है और इसके लिए आवश्यक राफ्टिंग स्ट्रक्चर व उपकरण बाहर से मंगवाए गए हैं।
उन्होंने बताया कि नहर में प्रशिक्षण के लिए डिप्टी कमिश्नर और कैनाल विभाग के सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर से अनुमति ली गई है। फिलहाल यह बेसिक ट्रेनिंग है। इसके बाद खिलाड़ियों को ऐसे स्थान पर एडवांस ट्रेनिंग दी जाएगी, जहां पानी का बहाव अधिक तेज हो और कई रैपिड्स मौजूद हों। उन्होंने कहा कि राफ्टिंग के लिए केवल तैराकी आना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि राफ्ट को संतुलित रखना, तेज बहाव में सही दिशा में आगे बढ़ना और आपात स्थिति में साथी खिलाड़ी को सुरक्षित निकालना भी सीखना पड़ता है।
खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। प्रशिक्षण स्थल पर एंबुलेंस की व्यवस्था की गई है। खिलाड़ियों को हेलमेट, सेफ्टी जैकेट और अन्य व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण उपलब्ध करवाए गए हैं। इसके अलावा सेफ्टी कोच लगातार खिलाड़ियों की गतिविधियों पर नजर रखते हैं। ट्रेनिंग के दौरान यह भी सिखाया जा रहा है कि यदि राफ्ट पलट जाए तो उसे दोबारा सीधा कैसे करना है और यदि कोई खिलाड़ी पानी में गिर जाए तो उसे सुरक्षित बाहर कैसे निकालना है।
कोचिंग देने के लिए हिमाचल प्रदेश के शिमला से कोच भी पहुंचे हैं। कोच के मार्गदर्शन में खिलाड़ी रोजाना सुबह करीब छह बजे से प्रशिक्षण शुरू करते हैं और कई घंटे तक अभ्यास करते हैं। खिलाड़ियों का कहना है कि वे पहले से रोइंग, ड्रैगन बोट और अन्य वाटर स्पोर्ट्स में हिस्सा लेते रहे हैं। इसलिए उनके लिए राफ्टिंग बिल्कुल नया अनुभव नहीं है, लेकिन रिवर राफ्टिंग की तकनीक को पहली बार व्यवस्थित रूप से सीख रहे हैं।
खिलाड़ी प्रियांशप्रीत सिंह ने बताया कि सभी खिलाड़ी इस ट्रेनिंग को लेकर उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि टीम में शामिल अधिकांश खिलाड़ी खालसा कॉलेज और खालसा यूनिवर्सिटी से जुड़े हैं और पहले भी वाटर स्पोर्ट्स की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते रहे हैं। खिलाड़ियों को उम्मीद है कि वे राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पंजाब का बेहतर प्रतिनिधित्व करेंगे।
जानकारी के अनुसार 17 सितंबर से देवप्रयाग में राष्ट्रीय स्तर की राफ्टिंग प्रतियोगिता आयोजित होने जा रही है। प्रतियोगिता के लिए पंजाब की टीम को तैयार किया जा रहा है। खिलाड़ियों का कहना है कि यह उनके लिए पहला राष्ट्रीय राफ्टिंग अनुभव होगा, लेकिन टीम पूरी तैयारी और आत्मविश्वास के साथ प्रतियोगिता में उतरने की कोशिश करेगी।
एसोसिएशन का कहना है कि अमृतसर में राफ्टिंग की शुरुआत से पंजाब के युवाओं को एडवेंचर स्पोर्ट्स में आगे बढ़ने का नया अवसर मिलेगा। आने वाले समय में इस तरह की प्रतियोगिताओं में नियमित रूप से हिस्सा लेने और पंजाब में इस खेल को और विस्तार देने की योजना है। अब देखना होगा कि अमृतसर की नहर में तैयार हो रही पंजाब की यह पहली रिवर राफ्टिंग टीम राष्ट्रीय स्तर पर किस तरह का प्रदर्शन करती है।
