Amritsar:आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम से लापता हुआ 15 वर्षीय बच्चा लगभग 2500 किलोमीटर का सफर तय करके अमृतसर पहुंच गया। रेलवे चाइल्ड हेल्प डेस्क, बाल सुरक्षा विभाग और बाल कल्याण समिति की मुस्तैदी के कारण तीन दिनों की कोशिश के बाद बच्चे को उसके माता-पिता से मिलवा दिया गया। बच्चे के परिवार के लिए यह पल बेहद भावुक रहा, जब उन्हें पता चला कि उनका बच्चा पंजाब में सुरक्षित है।
बाल कल्याण समिति अमृतसर के एडवोकेट एम.के. शर्मा ने बताया कि 6 अगस्त 2026 को रेलवे पुलिस द्वारा सूचना मिली थी कि रेलवे स्टेशन पर एक 15 वर्षीय बच्चा लापता हालत में मिला है। सूचना मिलते ही रेलवे चाइल्ड हेल्प डेस्क की टीम मौके पर पहुंची और बच्चे को रेस्क्यू कर सुरक्षित हिरासत में लिया गया।
काउंसलिंग के दौरान पता चला कि बच्चा आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम से संबंधित है। बच्चा तेलुगु भाषा बोलता था, जिसके कारण उससे बातचीत कर पूरा पता और परिवार संबंधी जानकारी हासिल करना टीम के लिए बड़ी चुनौती बन गया। इसके बावजूद टीम ने लगातार बातचीत और उपलब्ध जानकारी के आधार पर बच्चे के घर और इलाके की पहचान करने की कोशिश जारी रखी।
बच्चे की सुरक्षा और देखभाल सुनिश्चित करने के लिए उसे चिल्ड्रन होम फॉर बॉयज़ भेजा गया। इसके साथ ही विशाखापट्टनम प्रशासन, पुलिस और वहां की चाइल्ड वेलफेयर कमेटी से संपर्क किया गया। लगातार तालमेल के बाद बच्चे के परिवार का पता लगाया गया और उन्हें अमृतसर पहुंचने के लिए कहा गया।
रविवार को बच्चे के माता-पिता अमृतसर पहुंचे। जरूरी दस्तावेजों की जांच और बच्चे की सहमति के बाद उसे माता-पिता के हवाले कर दिया गया। परिवार ने अमृतसर की टीम का धन्यवाद किया और बताया कि तीन दिनों की चिंता और तलाश के बाद उन्हें फोन के माध्यम से पता चला कि उनका बच्चा पंजाब में सुरक्षित है।
परिवार के सदस्यों के अनुसार स्कूल में बच्चे के हाथ से लैपटॉप या टैबलेट गिरकर टूट गया था। इस कारण शिक्षक द्वारा उसे डांटा गया और पुलिस में शिकायत करने की बात कही गई। इससे डरकर बच्चा घर लौट आया, स्कूल की वर्दी बदली और परिवार को बिना बताए घर से निकल गया। बाद में परिवार ने विशाखापट्टनम पुलिस में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई।
इसी दौरान अमृतसर बस स्टैंड के पास लगभग 20 दिन की एक नवजात बच्ची को लावारिस छोड़े जाने का मामला भी सामने आया है। बस स्टैंड पुलिस पोस्ट द्वारा बाल कल्याण समिति को सूचित किए जाने के बाद छुट्टी के दिन भी टीम ने तुरंत कार्रवाई की। बच्ची को सुरक्षित तरीके से चाइल्ड केयर संस्था में भेजने के लिए सी.डब्ल्यू.सी. द्वारा आवश्यक आदेश जारी किए गए हैं।
बाल कल्याण समिति ने कहा कि पारिवारिक या सामाजिक समस्याओं का समाधान बच्चों को छोड़ना या उनके साथ मारपीट करना नहीं है। बच्चों को प्यार, समझदारी और बातचीत के माध्यम से संभालने की आवश्यकता है। अधिकारियों ने माता-पिता से अपील की कि बच्चों की समस्याओं को समझने और उनसे खुलकर बात करने की कोशिश की जाए।
एडवोकेट एम.के. शर्मा ने लोगों से अपील की कि यदि कोई बच्चा लावारिस हालत में मिले, बाल मजदूरी करवाई जा रही हो, बच्चे के साथ अत्याचार हो रहा हो या बाल विवाह का मामला सामने आए तो तुरंत चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर सूचना दी जाए। उन्होंने कहा कि समय पर मिली जानकारी किसी बच्चे को मुसीबत से बचाने और उसे सुरक्षित परिवार तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा सकती है।
उन्होंने बताया कि अमृतसर रेलवे स्टेशन पंजाब का एक महत्वपूर्ण रेलवे केंद्र होने के कारण दूसरे राज्यों से भी कई बच्चे यहां पहुंच जाते हैं। रेलवे चाइल्ड हेल्प डेस्क द्वारा हर महीने औसतन करीब 20 बच्चों को रेस्क्यू कर उनके परिवारों या संबंधित राज्यों की बाल सुरक्षा एजेंसियों तक पहुंचाने के लिए कार्रवाई की जाती है। यह मामला भी इस बात का उदाहरण है कि सरकारी बाल सुरक्षा प्रणाली और समाज की जागरूकता मिलकर बच्चों को सुरक्षित भविष्य दे सकती है।
