लगातार बारिश ने अजनाला के सब्जी उत्पादक किसानों की बढ़ाई मुश्किलें, करेला की फसल बुरी तरह तबाह
खेतों में सड़ गई करेला की बेलें, पीले पड़े फल मंडियों में बेचने लायक नहीं रहे
-10 रुपये किलो खरीद, 50 रुपये किलो बिक्री पर किसानों का फूटा गुस्सा, सरकार से नीति बनाने की मांग
-सब्जी उत्पादकों ने चेताया- समय रहते समाधान नहीं हुआ तो किसान छोड़ देंगे सब्जी की खेती
Amritsar: लगातार हो रही भारी बारिश ने पंजाब के सब्जी उत्पादक किसानों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। अमृतसर जिले के अजनाला क्षेत्र के गांव रोखा में करेला और अन्य सब्जियों की खेती करने वाले किसान प्राकृतिक मार से जूझ रहे हैं। लगातार बारिश के कारण खेतों में खड़ी सब्जियों को भारी नुकसान पहुंचा है, जबकि सबसे ज्यादा असर करेला की फसल पर देखने को मिल रहा है। किसानों का कहना है कि फसल पूरी तरह खराब होने से उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है
पीड़ित किसानों ने बताया कि लगातार बारिश के कारण करेला की बेलों में गलन शुरू हो गई है। बेलें सड़ने लगी हैं और फलों का रंग भी पीला पड़ गया है। गुणवत्ता खराब होने के कारण मंडियों में व्यापारी इन करेलों को खरीदने से इनकार कर रहे हैं। मजबूर होकर कई किसानों को अपनी पूरी फसल काटनी पड़ी, जिससे उनकी महीनों की मेहनत और लागत पर पानी फिर गया।
किसानों का कहना है कि प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान के साथ-साथ उन्हें मंडियों में भी उचित दाम नहीं मिल रहे हैं। उनका आरोप है कि किसानों से करेला और अन्य सब्जियां करीब 10 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदी जाती हैं, जबकि यही सब्जियां बाजार में 50 रुपये प्रति किलो या उससे अधिक कीमत पर बेची जाती हैं। इस व्यवस्था में सबसे अधिक नुकसान किसान को उठाना पड़ता है, जबकि बिचौलियों को फायदा मिलता है।
सब्जी उत्पादक किसानों ने पंजाब सरकार से मांग की है कि राज्य में सब्जियों के विपणन के लिए प्रभावी नीति बनाई जाए और सब्जियों का न्यूनतम समर्थन मूल्य या न्यूनतम बिक्री दर तय की जाए, ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके। किसानों का कहना है कि यदि सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाती है तो सब्जी उत्पादकों को राहत मिल सकती है।
किसानों ने यह भी मांग की कि मौसम के दौरान हिमाचल प्रदेश, शिमला और अन्य राज्यों से आने वाली सब्जियों पर नियंत्रण या आवश्यक प्रतिबंध लगाया जाए, ताकि पहले पंजाब के किसानों की उपज राज्य की मंडियों में बिक सके। उनका कहना है कि बाहरी राज्यों की सस्ती आवक के कारण स्थानीय किसानों की सब्जियां औने-पौने दामों में बिकती हैं।
पीड़ित किसानों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया तो आने वाले समय में बड़ी संख्या में किसान सब्जी की खेती छोड़ने को मजबूर हो जाएंगे। इसका असर न केवल किसानों की आय पर पड़ेगा, बल्कि पंजाब में सब्जियों के उत्पादन और आम लोगों तक उनकी उपलब्धता पर भी दिखाई देगा।
