भक्ति और साहित्य के महान साधक तुलसीदास की जयंती पर व्यक्तित्व-कृतित्व पर हुआ मंथन
• रामचरितमानस के रचयिता तुलसीदास के जीवन एवं साहित्यिक योगदान को किया गया याद
- रिपोर्ट: सौरभ श्रीवास्तव
घोरावल(सोनभद्र)। क्षेत्र के कोहरथा गांव में गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती मनाई गई। कार्यक्रम में वक्ताओं ने उनके जीवन, व्यक्तित्व एवं साहित्यिक योगदान पर प्रकाश डालते हुए बताया कि गोस्वामी तुलसीदास का जन्म सन 1532 ईस्वी में उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के राजापुर गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम आत्माराम दुबे और माता का नाम हुलसी बताया गया। उनका बचपन का नाम रामबोला था। उन्होंने महाकाव्य श्रीरामचरितमानस की रचना अवधी भाषा में की। वक्ताओं ने बताया कि गुरु नरहरी दास ने उन्हें शिक्षा-दीक्षा प्रदान की। पत्नी रत्नावली की बात से प्रभावित होकर उनके मन में संसार के प्रति वैराग्य उत्पन्न हुआ और वे भगवान श्रीराम की भक्ति में लीन हो गए।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने तुलसीदास जी के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख करते हुए उनके रामभक्ति एवं साहित्य के क्षेत्र में योगदान को याद किया। उनकी प्रसिद्ध चौपाई “संवत सोलह सौ असी, असी गंग के तीर। श्रावण शुक्ला सप्तमी, तुलसी तज्यो शरीर।” का उल्लेख करते हुए बताया गया कि उनका अंतिम समय काशी के अस्सी घाट से जुड़ा है। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने गोस्वामी तुलसीदास जी को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर मंथन किया। इस अवसर पर दिवाकर पाठक, आशुतोष मिश्रा, प्रवीण त्रिपाठी, श्रीपति त्रिपाठी, आशीष त्रिपाठी, गुड्डू चौबे, अंजन चौबे एवं दिव्यांश चौबे सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
