Meerut Central Market Rehabilitation Policy: मेरठ सेंट्रल मार्केट के 650 व्यापारियों के लिए पुनर्वास नीति, सरकारी जमीन पर मिलेंगी लीज की दुकानें

शास्त्रीनगर में ध्वस्तीकरण से प्रभावित कारोबारियों को राहत देने की तैयारी, सरकार ने कई स्थानों पर दुकानें बनाने की योजना बनाई; छह महीने में आवंटन प्रक्रिया शुरू करने का दावा

Meerut Central Market Rehabilitation Policy:  शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट में दुकानों के ध्वस्तीकरण के बाद प्रभावित कारोबारियों के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने पुनर्वास की दिशा में कदम उठाने की बात कही है। सरकार करीब 650 प्रभावित व्यापारियों के लिए नई पुनर्वास नीति तैयार करने की प्रक्रिया में है। इसके तहत सरकारी जमीन पर कॉम्प्लेक्स विकसित कर व्यापारियों को दुकानें लीज पर उपलब्ध कराने की योजना बताई गई है। जनप्रतिनिधियों के अनुसार दुकान मालिकों के साथ-साथ किरायेदारों को भी इस व्यवस्था में शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है।

इस मामले को लेकर बुधवार को मेरठ के सर्किट हाउस में जनप्रतिनिधियों ने प्रेसवार्ता की। इसके बाद गुरुवार को संभावित स्थानों का निरीक्षण और सर्वे भी किया गया। प्रस्तावित योजना का उद्देश्य ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से प्रभावित कारोबारियों को दोबारा व्यापार के लिए स्थान उपलब्ध कराना बताया गया है। हालांकि, पुनर्वास नीति की विस्तृत शर्तें अभी सार्वजनिक नहीं की गई हैं। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की ओर से कहा गया है कि चुनावी आचार संहिता के कारण नीति का पूरा विवरण फिलहाल सामने नहीं रखा जा रहा है।

650 कारोबारियों के पुनर्वास की तैयारी

सेंट्रल मार्केट प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल उन कारोबारियों के सामने है, जिनकी दुकानें ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से प्रभावित हुई हैं। सरकार की ओर से सामने आई योजना के मुताबिक करीब 650 दुकानदारों को वैकल्पिक दुकानें उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। इनमें ऐसे कारोबारी भी शामिल बताए गए हैं जो दुकानों के मालिक थे और वे लोग भी जो किराये की दुकानों से अपना कारोबार चला रहे थे।

राज्य मंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर और अन्य जनप्रतिनिधियों के अनुसार पुनर्वास के लिए सरकारी विभागों की जमीनों को चिह्नित किया गया है। इन स्थानों पर कॉम्प्लेक्स बनाकर दुकानें उपलब्ध कराने की योजना है। प्रस्तावित व्यवस्था में व्यापारियों से दुकान की कीमत के रूप में बड़ी रकम लेने के बजाय लीज और नाममात्र के किराये की बात कही गई है।

हालांकि, दुकान का अंतिम आकार, लीज की अवधि, किराये की राशि, पात्रता और आवंटन की विस्तृत प्रक्रिया जैसी जानकारियां आधिकारिक नीति जारी होने के बाद ही स्पष्ट होंगी।

कई स्थानों पर दुकानें बनाने की योजना

व्यापारियों के पुनर्वास के लिए मेरठ में अलग-अलग स्थानों की पहचान की गई है। जागरण की रिपोर्ट के अनुसार आवास विकास और नगर निगम से जुड़े कुल छह भूखंडों को संभावित रूप से इस्तेमाल करने की योजना बताई गई है। इनमें रंगोली मंडप के पास सामुदायिक भवन की जमीन, जागृति विहार सेक्टर-7, हापुड़ रोड, नई सड़क स्थित नगर निगम का नया कार्यालय परिसर, सूरजकुंड रोड स्थित महापौर शिविर कार्यालय और सूरजकुंड रोड का एक अन्य भूखंड शामिल हैं। इन स्थानों पर कुल करीब 640 दुकानों की क्षमता का उल्लेख किया गया है।

गुरुवार को कुछ प्रस्तावित स्थानों का निरीक्षण भी किया गया। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक कम्युनिटी सेंटर और रंगोली मंडप के पास की जगह तथा जागृति विहार क्षेत्र में संभावित स्थानों का सर्वे किया गया। निरीक्षण के दौरान जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों ने उपलब्ध जमीन और प्रस्तावित दुकान निर्माण की संभावनाओं का जायजा लिया।

इससे संकेत मिलता है कि पुनर्वास की प्रक्रिया को केवल एक स्थान तक सीमित रखने के बजाय शहर के अलग-अलग हिस्सों में दुकानें उपलब्ध कराने के विकल्प पर भी काम किया जा रहा है।

छह महीने में आवंटन प्रक्रिया शुरू करने का दावा

राज्य मंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर के अनुसार प्रभावित व्यापारियों को दुकानों के आवंटन पत्र देने की प्रक्रिया करीब छह महीने के भीतर शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे दुकानों का निर्माण पूरा होगा, उसी के अनुसार आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है।

यह समयसीमा फिलहाल सरकार और जनप्रतिनिधियों की ओर से बताई गई योजना का हिस्सा है। वास्तविक आवंटन की तारीख निर्माण कार्य, नीति की स्वीकृति, पात्रता निर्धारण और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगी।

व्यापारियों के लिए महत्वपूर्ण बात यह होगी कि अंतिम पुनर्वास नीति में पात्रता कैसे तय की जाती है। खासकर मालिक और किरायेदार दोनों को शामिल करने की बात कही गई है, इसलिए दुकानदारों के दस्तावेज, पुराने कारोबार का रिकॉर्ड और दुकान से संबंधित अधिकारों की जांच की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो सकती है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बढ़ा मामला

सेंट्रल मार्केट विवाद की पृष्ठभूमि लंबे समय से चली आ रही है। जनप्रतिनिधियों ने प्रेसवार्ता में इस मामले के पुराने घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि विवाद की शुरुआत वर्षों पहले हुई थी और मामला हाईकोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। जनप्रतिनिधियों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शास्त्रीनगर क्षेत्र में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई हुई।

सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि आवासीय परिसरों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर अदालत के आदेशों का पालन किया जा रहा है। वहीं प्रभावित कारोबारियों के पुनर्वास के लिए वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करने की प्रक्रिया पर जोर दिया जा रहा है।

इस पूरे मामले में अदालत के आदेश और स्थानीय स्तर पर व्यापारियों की स्थिति, दोनों महत्वपूर्ण पक्ष हैं। इसलिए पुनर्वास योजना को लागू करते समय न्यायालय के निर्देशों और संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना जरूरी होगा।

नई सर्वे रिपोर्ट तैयार करने की बात

सेंट्रल मार्केट विवाद के साथ मेरठ के अन्य क्षेत्रों में भी व्यावसायिक गतिविधियों और भवनों को लेकर चर्चा तेज हुई है। राज्य मंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर ने शहर में दोबारा सर्वे कराने की बात कही है। उनके अनुसार दिसंबर से पहले सभी जोन का री-सर्वे कराने की तैयारी है, जिसके बाद वास्तविक स्थिति के आधार पर नई रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

सरकार की ओर से कहा गया है कि इस सर्वे के बाद प्राप्त जानकारी को आगे की कार्रवाई और न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेजों में इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, सर्वे की अंतिम रिपोर्ट और उसके आधार पर होने वाली कार्रवाई की विस्तृत जानकारी अभी सामने आना बाकी है।

व्यापारियों के लिए क्या होगा नई योजना का मतलब?

यदि प्रस्तावित पुनर्वास नीति अपने बताए स्वरूप में लागू होती है, तो प्रभावित कारोबारियों को दोबारा कारोबार शुरू करने के लिए वैकल्पिक स्थान मिल सकता है। लीज आधारित दुकान मिलने की स्थिति में कारोबारी को नया व्यवसायिक परिसर विकसित करने के लिए अलग से जमीन खरीदने की जरूरत नहीं होगी। लेकिन लीज की शर्तें, किराया, दुकान का क्षेत्रफल और आवंटन की पात्रता नीति जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि जिस कारोबारी की पहले जितनी बड़ी दुकान थी, उसके अनुरूप दुकान उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। हालांकि, उपलब्ध जमीन और प्रस्तावित दुकानों की संख्या को देखते हुए अंतिम आवंटन किस आधार पर होगा, यह विस्तृत नीति आने के बाद ही पता चलेगा।

व्यापारियों की प्रतिक्रिया और आगे की चुनौती

सेंट्रल मार्केट के ध्वस्तीकरण के बाद कारोबारियों के सामने रोजी-रोटी और कारोबार को दोबारा खड़ा करने की चुनौती बनी हुई है। पुनर्वास नीति की घोषणा से वैकल्पिक दुकान मिलने की उम्मीद जरूर बनी है, लेकिन व्यापारियों के लिए यह भी महत्वपूर्ण होगा कि नई दुकानें पुराने बाजार से कितनी दूरी पर होंगी और वहां ग्राहकों की पहुंच कैसी होगी।

गुरुवार को प्रस्तावित स्थानों के निरीक्षण से यह साफ है कि सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधि अब पुनर्वास के लिए जमीन और निर्माण की संभावनाओं पर काम कर रहे हैं। हालांकि, योजना को जमीन पर लागू करने के लिए नीति को अंतिम रूप देना, जमीन की उपलब्धता, निर्माण, पात्रता सूची और आवंटन जैसे कई चरण पूरे करने होंगे।

साथ ही, पुनर्वास नीति की घोषणा को लेकर कुछ सवाल भी उठाए गए हैं। अमर उजाला की एक रिपोर्ट में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुदीप जैन ने चुनावी आचार संहिता के दौरान इस घोषणा को लेकर सवाल उठाए और निर्वाचन आयोग से मामले की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। यह एक राजनीतिक पक्ष की आपत्ति है; इसे नीति की वैधता पर अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता।

अब नीति के अंतिम प्रारूप का इंतजार

मेरठ सेंट्रल मार्केट के करीब 650 प्रभावित व्यापारियों के लिए सरकार द्वारा प्रस्तावित पुनर्वास नीति अब इस पूरे विवाद का अगला महत्वपूर्ण चरण है। सरकार की ओर से सरकारी जमीन पर दुकानें बनाने, उन्हें लीज पर देने और मालिकों के साथ किरायेदारों को भी योजना में शामिल करने की बात कही गई है। करीब छह महीने में आवंटन प्रक्रिया शुरू करने का दावा भी किया गया है।

फिलहाल व्यापारियों की नजर इस बात पर है कि सरकार की अंतिम नीति कब जारी होती है और उसमें पात्रता, दुकान का आकार, लीज अवधि, किराया, आवंटन प्रक्रिया तथा निर्माण की समयसीमा को लेकर क्या प्रावधान किए जाते हैं। इन बिंदुओं के स्पष्ट होने के बाद ही यह तय हो सकेगा कि प्रभावित कारोबारियों को प्रस्तावित पुनर्वास व्यवस्था का वास्तविक लाभ किस तरह मिलेगा।

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