सहसवान राजकीय महाविद्यालय में हिंदी दिवस की धूम, कविता वाचन से विद्यार्थियों ने बांधा समां
‘हिंदी एक दिन नहीं, हर दिन’ के संदेश के साथ मनाया हिंदी दिवस
Sahaswan: संघटक राजकीय महाविद्यालय सहसवान में 14 सितंबर को ‘हिंदी एक दिन नहीं, हर दिन’ के संदेश के साथ हिंदी दिवस समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने कविता वाचन, भाषण, गजल, रंगोली, हुनर हाट और विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से हिंदी भाषा के प्रति अपने प्रेम और प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण राष्ट्रीय गीतकार डॉ. उर्मिलेश शंखधार की कविताओं पर आधारित कविता वाचन प्रतियोगिता रही। छात्र-छात्राओं ने उनकी कविताओं का सस्वर वाचन कर कार्यक्रम में साहित्यिक रंग भर दिया।
कविता वाचन प्रतियोगिता में अबुतुराब समर प्रथम
प्रतियोगिता में अबुतुराब समर ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि जिकरा बी द्वितीय और गुलिस्तां बी तृतीय स्थान पर रहीं। प्रतियोगिता में अंजलि, गुलिस्तां बी, रानी, सिद्धि माहेश्वरी, अलैना और जिकरा बी सहित कई विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया। निर्णायक मंडल में डॉ. सरला चक्रवर्ती, दीप्ति गुप्ता और कवि ओजस्वी जौहरी शामिल रहे।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि ममता सेवी संस्था की संस्थापक एवं समाजसेवी वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. ममता नौगरैया रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. गुरुदीप सिंह उप्पल ने की। विशिष्ट अतिथियों में बिल्सी के प्रसिद्ध कवि ओजस्वी जौहरी और विष्णु असावा शामिल रहे।
प्राचार्य डॉ. गुरुदीप सिंह उप्पल ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हिंदी ऐसी भाषा है, जिसके माध्यम से हम अपने भाव और उद्गार प्रभावी ढंग से व्यक्त कर सकते हैं।
डॉ. ममता नौगरैया ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को हिंदी साहित्य को समझने का अवसर देते हैं। गीत, गजल और कविता के माध्यम से विद्यार्थियों में मौलिक चिंतन को गति मिलती है।
निर्णायक मंडल की सदस्य डॉ. सरला चक्रवर्ती ने हिंदी को देश की आन, बान और शान बताया। वहीं कवि विष्णु असावा और ओजस्वी जौहरी ने अपनी कविताओं के माध्यम से हिंदी की महत्ता और भारतीय संस्कृति में उसके योगदान को रेखांकित किया।
शिक्षकों ने भी प्रस्तुत किए कविता, गजल और दोहे
हिंदी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शुभ्रा माहेश्वरी ने विद्यार्थियों से घर से ही हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने का आह्वान किया। उन्होंने हिंदी में हस्ताक्षर करने और सोशल मीडिया पर हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग की अपील की। अपनी काव्यमय प्रस्तुति के माध्यम से उन्होंने हिंदी को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का संदेश दिया।
डॉ. सुरजीत सिंह मौर्य ने हिंदी को राजभाषा बताते हुए इसके निरंतर प्रयोग पर जोर दिया और गजल के माध्यम से अपने विचार रखे। डॉ. शुभ्रा शुक्ला ने कबीर और रहीम के दोहों की प्रस्तुति दी। डॉ. ब्रह्मस्वरूप ने विद्यार्थियों को अनुशासित जीवन जीने और सफलता के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में डॉ. रजनी गुप्ता, डॉ. नवीन, डॉ. सौरभ नागर, डॉ. राजेश, डॉ. ब्रह्मस्वरूप सिंह, डॉ. टेकचंद, डॉ. नीति सक्सेना और डॉ. सुरजीत सिंह मौर्य समेत कई शिक्षकों ने अपने विचार रखे।
रंगोली, सेल्फी प्वाइंट और हुनर हाट बने आकर्षण
कार्यक्रम की शुरुआत जिकरा बी की सरस्वती वंदना से हुई। विद्यार्थियों ने भाषण, गजल, कविता और हास्य रचनाओं की प्रस्तुतियां दीं। अबुतराब समर, अब्दुल सहसवानी, सना बी, शौफ मोहम्मद, शिफा रहमान, रिद्धि माहेश्वरी, सिद्धि माहेश्वरी और मन्तशा सहित विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों की खूब सराहना बटोरी।
हिंदी दिवस समारोह में सेल्फी प्वाइंट, रंगोली, हुनर हाट शॉप, गोलगप्पा स्टॉल और विद्यार्थियों की हस्तशिल्प कला विशेष आकर्षण रहे। रिद्धि और सिद्धि माहेश्वरी के हस्तशिल्प, छात्राओं द्वारा बनाई गई रंगोली तथा आन्या साहू और जिकरा द्वारा तैयार सेल्फी प्वाइंट ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।
दिल्ली से छात्र खाबर हसन ने ऑनलाइन प्रस्तुति देकर हिंदी के प्रति अपने भाव व्यक्त किए। उनकी प्रस्तुति ने भी कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
प्रतिभागियों और कॉलेज टॉपर को किया सम्मानित
ममता सेवी संस्था और संघटक राजकीय महाविद्यालय सहसवान के संयुक्त तत्वावधान में सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया गया। महाविद्यालय की एमए होम साइंस की टॉपर इला सक्सेना को भी सम्मानित किया गया।
डॉ. ममता नौगरैया ने महाविद्यालय को अपनी पुस्तकें भी भेंट कीं, जिनमें सब कुछ संभव है, रसोई शिक्षा, जल संरक्षण, कारगिल शहीद, प्रकृति, वृद्धावस्था और साइबर अलर्ट सहित अन्य पुस्तकें शामिल रहीं।
इस अवसर पर डॉ. ममता नौगरैया, दीप्ति गुप्ता और डॉ. सरला चक्रवर्ती ने महाविद्यालय के शिक्षकों को पटका पहनाकर सम्मानित किया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. शुभ्रा माहेश्वरी ने किया, जबकि संयोजन डॉ. शुभ्रा माहेश्वरी और डॉ. सुरजीत सिंह मौर्य ने किया। अंत में डॉ. शुभ्रा माहेश्वरी ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। शिक्षणेत्तर कर्मचारियों में मनोज कुमार, रोदास, संदीप और आशीष का विशेष सहयोग रहा।
