US Russia Sanctions Bill: भारत पर 100% टैरिफ का खतरा! रूस से तेल खरीदने पर ट्रंप को मिलेगी बड़ी ताकत?
US Russia Sanctions Bill: रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत और अमेरिका के बीच पहले से चल रही तनातनी के बीच अमेरिकी संसद में एक अहम रूस-सैंक्शन बिल चर्चा में है। इस बिल में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले बड़े देशों पर भारी टैरिफ लगाने का प्रावधान किया गया है। प्रस्तावित कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कुछ देशों के सामान पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने की शक्ति मिल सकती है।
इस प्रावधान को लेकर भारत पर भी नजरें टिकी हैं, क्योंकि भारत रूस से कच्चे तेल का एक बड़ा खरीदार है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत पर अभी 100 फीसदी टैरिफ लागू हो गया है। बिल को अमेरिकी सीनेट में मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में इसकी आगे की प्रक्रिया और अंतिम मंजूरी अभी महत्वपूर्ण है।
रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर निशाना
रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार किए गए इस कानून में उन देशों को निशाना बनाने की व्यवस्था है, जो रूसी ऊर्जा उत्पादों की खरीद जारी रखते हैं। संशोधित प्रस्ताव में शीर्ष रूसी तेल खरीदारों पर अधिकतम 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने की संभावना रखी गई है।
इसका सीधा असर भारत जैसे देशों पर पड़ सकता है, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदते हैं। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित कानून के संभावित टैरिफ प्रावधानों को लेकर अमेरिका में भी सांसदों के बीच चिंता जताई गई है।
सीनेट में बिल पास, अब हाउस पर नजर
रूस पर नए प्रतिबंधों से जुड़े इस बिल को अमेरिकी सीनेट ने अगस्त में 86-11 वोट से पारित किया था। अब इसकी अगली बड़ी परीक्षा प्रतिनिधि सभा में होनी है। मौजूदा स्थिति में हाउस में बिल के पारित होने को लेकर पूरी तरह निश्चितता नहीं है।
अगर प्रतिनिधि सभा से भी बिल पारित होता है और यह कानून बनता है, तो इसके प्रावधान अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस के प्रमुख ऊर्जा खरीदारों पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए अतिरिक्त अधिकार दे सकते हैं।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बिल?
भारत लंबे समय से रूस से कच्चा तेल खरीद रहा है। यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों और आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए रूसी तेल की खरीद जारी रखी है।
भारत का तर्क रहा है कि ऊर्जा सुरक्षा और भारतीय उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए देश को अलग-अलग स्रोतों से तेल खरीदने की जरूरत है। रूस से मिलने वाला कच्चा तेल कई मौकों पर अंतरराष्ट्रीय बाजार के मुकाबले आकर्षक कीमतों पर उपलब्ध रहा है।
ऐसे में अगर अमेरिका रूसी ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाता है, तो भारत के लिए इसका असर केवल अमेरिका को होने वाले निर्यात तक सीमित नहीं रहेगा। इससे व्यापार, कंपनियों की लागत और भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों पर भी असर पड़ सकता है।
100% टैरिफ का मतलब क्या है?
अगर किसी देश के सामान पर 100 फीसदी टैरिफ लगाया जाता है, तो अमेरिकी बाजार में उस सामान की लागत काफी बढ़ सकती है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी भारतीय उत्पाद की कीमत 100 डॉलर है और उस पर 100 फीसदी आयात शुल्क लगाया जाता है, तो टैरिफ के तौर पर 100 डॉलर और जुड़ सकते हैं।
हालांकि वास्तविक कीमत पर असर उत्पाद, व्यापार व्यवस्था और कंपनियों की लागत संरचना पर निर्भर करेगा। इसलिए 100 फीसदी टैरिफ का मतलब यह नहीं है कि हर भारतीय उत्पाद की अंतिम कीमत बिल्कुल दोगुनी ही हो जाएगी।
क्या भारत पर तुरंत लगेगा 100% टैरिफ?
नहीं। फिलहाल इसे संभावित खतरे के तौर पर देखना चाहिए, तत्काल लागू हो चुके शुल्क के तौर पर नहीं।
अमेरिकी सीनेट से बिल पारित होने के बाद भी इसे कानून बनने के लिए आगे की विधायी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके अलावा प्रस्तावित व्यवस्था राष्ट्रपति को अधिकार देती है, जिसका इस्तेमाल किस देश के खिलाफ, कब और किस स्तर पर किया जाएगा, यह अलग निर्णय का विषय हो सकता है।
मौजूदा रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में बिल को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है।
ट्रंप के पास बढ़ सकती है टैरिफ लगाने की ताकत
इस बिल की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह अमेरिकी राष्ट्रपति को विदेशी देशों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव डालने के लिए ज्यादा अधिकार देने की कोशिश करता है।
बिल के समर्थकों का उद्देश्य रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना और उसके ऊर्जा कारोबार से जुड़े देशों को रूस के साथ व्यापार कम करने के लिए मजबूर करना है। वहीं आलोचकों को चिंता है कि इतने व्यापक टैरिफ अधिकारों का असर अमेरिका के सहयोगी देशों और वैश्विक व्यापार पर भी पड़ सकता है।
भारत-रूस व्यापार के सामने नई चुनौती
भारत और रूस के रिश्ते लंबे समय से रणनीतिक रहे हैं। ऊर्जा के अलावा दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार और अन्य क्षेत्रों में भी संबंध हैं। हालिया BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच भी दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने और व्यापार बढ़ाने पर चर्चा हुई।
ऐसे समय में अमेरिका की ओर से रूसी तेल खरीद को लेकर संभावित अतिरिक्त प्रतिबंध भारत के लिए कूटनीतिक और आर्थिक चुनौती बन सकते हैं।
आगे क्या होगा?
अब सबसे महत्वपूर्ण नजर अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की कार्रवाई पर है। अगर बिल हाउस से भी पारित होता है और आगे कानून बनता है, तो भारत समेत रूस के बड़े ऊर्जा खरीदारों पर अमेरिकी नीति का दबाव और बढ़ सकता है।
हालांकि अभी कई चरण बाकी हैं और 100 फीसदी टैरिफ का प्रावधान अपने आप लागू नहीं हुआ है। इसलिए फिलहाल भारत के लिए सबसे अहम बात यह है कि अमेरिका में बिल किस अंतिम रूप में कानून बनता है और राष्ट्रपति इसका इस्तेमाल किस तरह करते हैं।
भारत के लिए चुनौती यह होगी कि वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा और रूस के साथ व्यापारिक संबंधों को बनाए रखते हुए अमेरिका के साथ अपने महत्वपूर्ण आर्थिक रिश्तों को भी संतुलित करे। आने वाले दिनों में इस बिल की अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में स्थिति इस पूरे मामले की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।
