जिला चिकित्सालय रामपुर में एक और सफल थ्रॉम्बोलिसिस

हार्ट अटैक के मरीज को समय पर मिला जीवनरक्षक उपचार, मेरठ किया गया रेफर

Rampur: जिला चिकित्सालय की इमरजेंसी में एक और हृदयाघात के मरीज का सफलतापूर्वक थ्रॉम्बोलिसिस किया गया। मरीज सुबह सीने में दर्द की शिकायत लेकर जिला चिकित्सालय की इमरजेंसी में पहुंची थी। चिकित्सकों द्वारा तत्काल ईसीजी किए जाने पर इन्फेरियर वाॅल एमआई (हार्ट अटैक) की पुष्टि हुई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए मेरठ मेडिकल कॉलेज के कार्डियोलॉजिस्ट से तत्काल संपर्क कर विशेषज्ञ चिकित्सकीय सलाह प्राप्त की गई। इसके बाद डॉ. प्रशांत एवं इमरजेंसी टीम द्वारा मरीज का सफलतापूर्वक थ्रॉम्बोलिसिस किया गया। उपचार के बाद मरीज की स्थिति स्थिर होने पर उसे आगे के बेहतर उपचार के लिए एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज, मेरठ रेफर कर दिया गया।

मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बी.सी. सक्सेना ने बताया कि शासन के निर्देशों के अनुपालन में जिला चिकित्सालय रामपुर में एसटेमी(STEMI) (एसटी-सेगमेंट एलिवेशन मायोकार्डियल इन्फार्क्शन) प्रोग्राम संचालित किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य हार्ट अटैक के मरीजों को समय रहते जीवनरक्षक उपचार उपलब्ध कराकर उनकी जान बचाना है।

उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम के तहत मेरठ मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध हृदय रोग विशेषज्ञों से व्हाट्सऐप ग्रुप के माध्यम से 24×7 संपर्क एवं चिकित्सकीय परामर्श की सुविधा उपलब्ध है। किसी मरीज की ईसीजी में हार्ट अटैक की पुष्टि होने पर विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार तत्काल थ्रॉम्बोलिसिस किया जाता है, जिससे बंद रक्त वाहिका को खोलने और हृदय की मांसपेशियों को होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिलती है। इसके बाद मरीज को आवश्यकतानुसार उच्च चिकित्सा केंद्र के लिए रेफर किया जाता है।

डॉ. सक्सेना ने बताया कि हार्ट अटैक के पहले 90 मिनट के भीतर जीवनरक्षक इंजेक्शन दिए जाने पर उपचार की सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है। बाजार में इस इंजेक्शन की कीमत लगभग 40 हजार रुपये है, जबकि जिला चिकित्सालय में एसटेमी कार्यक्रम के अंतर्गत यह दवा मरीजों को निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है।

उन्होंने बताया कि जिला चिकित्सालय में एसटेमी कार्यक्रम के तहत एक बेड भी आरक्षित किया गया है, ताकि हार्ट अटैक के मरीजों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराया जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि अब तक इस प्रकार के तीन मरीजों को जीवनरक्षक इंजेक्शन देकर थ्रॉम्बोलिसिस किया जा चुका है। इससे पहले 20 अगस्त 2026 (गुरुवार) को भी जिला चिकित्सालय में एक मरीज का सफल थ्रॉम्बोलिसिस किया गया था। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने उपचार में शामिल चिकित्सकों एवं इमरजेंसी टीम को बधाई देते हुए कहा कि मरीजों के प्रति इसी प्रकार तत्परता, संवेदनशीलता और समन्वय के साथ कार्य करते रहें, ताकि हार्ट अटैक के मरीजों को गोल्डन टाइम में जीवनरक्षक उपचार उपलब्ध कराया जा सके।

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