कालियावाला शहीदी कुएं पर 1857 की प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के 282 शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि

बीएसएफ, भारतीय सेना, पंजाब पुलिस और प्रशासन ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर शहीदों को किया नमन

-शहीदी कुएं को राष्ट्रीय स्मारक और संग्रहालय बनाने की मांग फिर उठी

-एसडीएम डॉ. चारूमिता बोलीं— नई पीढ़ी को इतिहास से जोड़ना हम सभी की साझा जिम्मेदारी

  • रिपोर्ट: ललित शर्मा

Ajnala: वर्ष 1857 की प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान शहीद हुए 282 वीर सैनिकों की स्मृति में आज अजनाला स्थित ऐतिहासिक कालियावाला शहीदी कुएं पर श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर बीएसएफ, भारतीय सेना, पंजाब पुलिस, सिविल प्रशासन, पूर्व सैनिकों तथा बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने शहीद स्मारक पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके बलिदान को नमन किया।

समारोह के दौरान बीएसएफ के जवानों ने शहीदों को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इसके साथ ही दो मिनट का मौन रखकर देश की एकता, अखंडता और शहीदों के सर्वोच्च बलिदान को सदैव याद रखने का संकल्प लिया गया। वक्ताओं ने कहा कि 1857 के ये वीर शहीद भारत की आजादी की लड़ाई के पहले महान योद्धा थे, जिनकी कुर्बानी देशवासियों को हमेशा राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा देती रहेगी।

पंजाब राज्य सूचना आयोग के सदस्य परवीन कुमार ने बताया कि वर्ष 2023 से सिविल प्रशासन, भारतीय सेना, बीएसएफ और पूर्व सैनिकों के सहयोग से प्रत्येक वर्ष 1 अगस्त को यह श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किया जाता है। उन्होंने बताया कि 1857 में चार अंग्रेज अधिकारियों को मारने के बाद ये सैनिक रावी नदी के रास्ते अजनाला पहुंचे थे, जहां उन्हें गिरफ्तार कर 1 अगस्त को गोलियां मारकर शहीद कर दिया गया और उनके शव इसी कुएं में डाल दिए गए थे। उन्होंने कहा कि इस गौरवशाली इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाना बेहद आवश्यक है।

गुरुद्वारा कमेटी के सचिव काबल सिंह शाहपुर ने कहा कि कई वर्षों से शहीदी कुएं तक जाने के लिए चौड़ी सड़क बनाने की मांग की जा रही है। उन्होंने बताया कि खुदाई के दौरान कुएं से गोलियां, सिक्के, कड़े, अंगूठियां तथा अन्य ऐतिहासिक वस्तुएं मिली हैं। उन्होंने मांग की कि इन अमूल्य धरोहरों को सुरक्षित रखने के लिए यहां एक आधुनिक संग्रहालय बनाया जाए, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक और विद्यार्थी इस ऐतिहासिक विरासत को नजदीक से जान सकें।

इस अवसर पर अजनाला की एसडीएम डॉ. चारूमिता ने कहा कि 1857 के शहीदों की स्मृति को जीवित रखना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि हर वर्ष अधिक से अधिक लोगों को इस समारोह में भाग लेना चाहिए, ताकि बच्चों और युवाओं को देश के वीर शहीदों के इतिहास की जानकारी मिल सके। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यदि स्मारक के विकास और अन्य सुविधाओं से संबंधित लिखित मांगें प्रशासन के पास आती हैं, तो उन्हें पूरा करने के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा।

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