प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के मत्स्य विभाग ने मत्स्य पालन और राजस्व व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव किया है। अब प्रयागराज की छह प्रमुख नदियों में मत्स्य आखेट (मछली पकड़ने) के लिए पट्टों का आवंटन नीलामी के माध्यम से किया जाएगा। पहली बार इन जलक्षेत्रों को 38 अलग-अलग जोन में विभाजित किया गया है, जिससे मत्स्यजीवियों को पारदर्शी व्यवस्था का लाभ मिलेगा और विभाग की आय में भी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
नई व्यवस्था के तहत गंगा, यमुना, टोंस, बेलन, वरुण और मनसेता नदियों के विभिन्न हिस्सों को तीन से आठ किलोमीटर लंबे जोन में बांटा गया है। प्रत्येक जोन के लिए अलग-अलग न्यूनतम नीलामी मूल्य निर्धारित किया गया है। विभाग के अनुसार सबसे कम न्यूनतम नीलामी मूल्य 20,360 रुपये रखा गया है, जबकि बेलन नदी के एक जोन के लिए सर्वाधिक 54,285 रुपये का न्यूनतम मूल्य तय किया गया है।
जलक्षेत्रों का विभाजन मेजा, कोरांव, हंडिया, बारा, सदर और फूलपुर तहसीलों के अंतर्गत किया गया है। सदर तहसील में यमुना नदी के मैनापुर-असरावे खुर्द से विरसिंहपुर और आदमपुर से करहेड़ा तक जोन बनाए गए हैं। वहीं बारा तहसील में यमुना नदी के इरादतगंज, कंजासा, कन्या, मझियारी और अमिलिया समेत विभिन्न क्षेत्रों में पांच-पांच किलोमीटर के जोन निर्धारित किए गए हैं।
मेजा तहसील में गंगा और टोंस नदी के 10 जोन, करछना में गंगा, यमुना और टोंस के आठ जोन तथा हंडिया तहसील में गंगा नदी के दो जोन बनाए गए हैं। इसके अलावा कोरांव में बेलन और टोंस नदी तथा फूलपुर तहसील में गंगा, वरुण और मनसेता नदी के जलक्षेत्रों को भी अलग-अलग जोन में विभाजित किया गया है।
मत्स्य विभाग का मानना है कि नई व्यवस्था से पट्टों के आवंटन में पारदर्शिता बढ़ेगी, मत्स्यजीवियों को स्पष्ट और व्यवस्थित अवसर मिलेंगे तथा विभाग के राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे नदियों में मत्स्य संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होने की भी संभावना है।
