पीएम ई-ड्राइव योजना से EV सेक्टर को बूस्ट; सरकार ने बांटे 2,281 करोड़ के इंसेंटिव, 8.2% तक पहुंची इलेक्ट्रिक वाहनों की पैठ
भारी उद्योग राज्य मंत्री ने संसद में दी 'पीएम ई-ड्राइव योजना' की विस्तृत जानकारी। योजना के तहत 10,900 करोड़ रुपये का बजट तय, अब तक 23 लाख से ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहनों को मिला सब्सिडी का लाभ।
- रिपोर्ट: प्रमोद यादव
New Delhi: भारत सरकार की ‘पीएम ई-ड्राइव योजना’ (PM E-DRIVE) देश में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की रफ्तार तेजी से बढ़ा रही है। भारी उद्योग राज्य मंत्री श्री भूपतिराजू श्रीनिवास वर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि इस योजना का कुल परिव्यय ₹10,900 करोड़ है। इसका मुख्य उद्देश्य देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाना, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना और घरेलू निर्माण को बढ़ावा देना है। 22 जुलाई 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, योजना के तहत 23.22 लाख से अधिक इलेक्ट्रिक वाहनों (जिसमें 20.56 लाख से ज्यादा सिर्फ टू-व्हीलर हैं) को प्रोत्साहन दिया गया है, जिसके लिए कंपनियों (OEM) को ₹2,281.94 करोड़ की सब्सिडी दी जा चुकी है।
ई-स्कूटर से लेकर ई-बस और ट्रक तक पर बंपर छूट
सरकार ने सभी श्रेणियों के वाहनों के लिए प्रोत्साहन दरें तय की हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (e-2W) के लिए ₹5,000 प्रति kWh (अधिकतम ₹10,000 प्रति वाहन) की सब्सिडी दी जा रही है। वहीं, ई-रिक्शा, ई-कार्ट और बड़े कमर्शियल ई-ट्रक व ई-एंबुलेंस के लिए भी बैटरी क्षमता और वाहन के कुल भार (GVW) के आधार पर लाखों रुपये तक की छूट का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही सार्वजनिक परिवहन को स्वच्छ बनाने के लिए 14,000 ई-बसों का आवंटन भी किया गया है।
8.2% तक पहुंची देश में EV की पैठ
सरकारी नीतियों का सीधा असर सड़कों पर दिखने लगा है। जहां वित्त वर्ष 2019-20 में देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की पैठ मात्र 0.7% थी, वह वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 8.2% हो गई है। ‘मेक इन इंडिया’ के तहत ईवी मॉडलों के स्थानीयकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही बैटरी निर्माण के लिए 18,100 करोड़ रुपये के बजट के साथ PLI योजना भी लागू की गई है ताकि देश में 50 GWh क्षमता की बैटरी निर्माण इकाइयां स्थापित हो सकें।
चार्जिंग स्टेशनों का जाल और ‘विकसित भारत 2047’
ईवी खरीदारों की सबसे बड़ी चिंता यानी ‘चार्जिंग’ को दूर करने के लिए सरकार ने ₹2,000 करोड़ का अलग से फंड आवंटित किया है। अब तक 3 तेल विपणन कंपनियों और 9 राज्यों को 6,562 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन लगाने के लिए ₹689 करोड़ मंजूर किए जा चुके हैं। सरकार का लक्ष्य टियर-II, टियर-III शहरों और आकांक्षी जिलों तक इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को पहुंचाना है, ताकि ‘विकसित भारत @2047’ के दृष्टिकोण को साकार किया जा सके
