माटी कला योजना से बदली दोधराम की किस्मत: ₹1.42 लाख के लोन से शुरू किया व्यवसाय, अब हर महीने कमा रहे ₹20,000
खुरजा से मशीनें लाकर शुरू किया कुल्हड़ और लस्सी गिलास बनाने का काम, गांव के ही 3 लोगों को दिया रोजगार
–पहले हाथ से बनते थे मात्र 500 कुल्हड़, अब मशीनों से हर दिन तैयार हो रहे 1500 बर्तन, फिनिशिंग में भी आया निखार
- रिपोर्ट: शाहबाज़ खां
रामपुर। प्रदेश सरकार की ‘मुख्यमंत्री माटी कला योजना’ से जुड़कर सदर तहसील के बड़ापुरा गांव निवासी दोधराम ने अपनी तकदीर खुद लिखी है। कभी होटलों में मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करने वाले दोधराम आज खुद का व्यवसाय चला रहे हैं। महज 6-7 महीने पहले योजना के तहत ₹1.42 लाख का ऋण लेकर उन्होंने आधुनिक तरीके से मिट्टी के बर्तन बनाने का काम शुरू किया। आज वह न केवल हर महीने ₹20,000 की शानदार आमदनी कर रहे हैं, बल्कि अपने ही गांव के दो-तीन अन्य लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं।
होटल की मजदूरी से लेकर खुद के व्यवसाय तक का सफर
दोधराम पहले होटलों में मजदूरी का काम करते थे, जहां आमदनी बेहद कम थी और परिवार का गुजारा मुश्किल से होता था। साल 2025 की शुरुआत में उन्होंने मुख्यमंत्री माटी कला योजना की जानकारी हासिल की। इसके बाद उन्होंने विभाग के माध्यम से 15 दिनों का प्रशिक्षण प्राप्त किया, जिसमें उनके साथ 20-25 अन्य लोग भी शामिल थे। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उन्होंने ₹1,42,000 का ऋण लिया, जिसकी वजह से आज वह अपना व्यापार करने में सक्षम है।
खुरजा से मशीनें लाकर बढ़ाया उत्पादन
बैंक से लोन का पैसा मिलने के बाद दोधराम ने खुरजा जाकर मशीनें खरीदीं। पहले उनके परिवार के लोग मिट्टी के बर्तन हाथ से बनाते थे, जिससे दिनभर में बमुश्किल 400 से 500 कुल्हड़ ही बन पाते थे। लेकिन अब मशीनों के इस्तेमाल से हर दिन 1000 से 1500 कुल्हड़ और लस्सी के गिलास तैयार हो रहे हैं। मशीनों के उपयोग से उत्पादों की फिनिशिंग भी काफी बेहतर हो गई है और लोकल मार्केट में उनकी अच्छी मांग है।
गांव के लोगों को दिया रोजगार
दोधराम का यह काम सिर्फ उनके परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि गांव के अन्य लोगों के लिए भी वरदान साबित हो रहा है। अपने व्यवसाय को बढ़ाने के साथ ही उन्होंने बड़ापुरा गांव के ही तीन अन्य लोगों को अपने साथ रोजगार से जोड़ा है। कभी खुद मजदूरी की तलाश करने वाले दोधराम अब दूसरों को रोजगार देने वाले सफल उद्यमी बन गए हैं।
बदली जिंदगी की तस्वीर
मुख्यमंत्री माटी कला योजना ने दोधराम के जीवन स्तर को पूरी तरह से बदल दिया है। उनका कहना है कि पहले दूसरों के यहां मजदूरी करने में काफी परेशानी होती थी, लेकिन अब अपने ही घर में छांव में बैठकर सुकून से काम करते हैं। सर्दी-गर्मी की कोई मार नहीं झेलनी पड़ती और महीने के अंत में ₹20,000 तक की सुखद बचत हो जाती है।
पारंपरिक कारीगरों को स्वावलंबी बना रही योजना
रामपुर जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी का कहना है कि ‘मुख्यमंत्री माटी कला योजना’ का मुख्य उद्देश्य हमारे पारंपरिक कारीगरों को आधुनिक तकनीक से जोड़कर उन्हें स्वावलंबी बनाना है। बड़ापुरा के दोधराम की सफलता इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि यदि सही मार्गदर्शन और आर्थिक सहायता मिले, तो ग्रामीण क्षेत्रों में भी रोजगार के बड़े अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
