अमृतसर में अवैध नशा मुक्ति केंद्र पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 43 लोगों को किया रेस्क्यू

मुख्य संचालक कुलदीप कुमार उर्फ चौहान समेत 6 गिरफ्तार, दो आरोपियों पर पहले से एनडीपीएस एक्ट के मामले दर्ज

-नशा पीड़ितों को अवैध रूप से रखा जाता था बंद, मारपीट और जबरन दवाइयां देने के आरोप

-पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त कार्रवाई, दवाइयों और नशीले पदार्थों की सप्लाई के स्रोतों की जांच जारी

  • रिपोर्ट: ललित शर्मा

अमृतसर कमिश्नरेट पुलिस ने शहर में अवैध रूप से चल रहे एक नशा मुक्ति केंद्र का भंडाफोड़ करते हुए बड़ी कार्रवाई की है। थाना गेट हकीमां क्षेत्र में मिली गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर 43 लोगों को रेस्क्यू किया, जिन्हें कथित तौर पर अवैध रूप से केंद्र में रखा गया था। इस मामले में मुख्य संचालक कुलदीप कुमार उर्फ चौहान और उसके बेटे सहित कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

एडीसीपी विशालजीत सिंह ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि थाना गेट हकीमां की एसएचओ मनजीत कौर को अवैध डी-एडिक्शन सेंटर चलने की सूचना मिली थी। इसके बाद एसीपी सेंट्रल सुरिंदर सिंह की निगरानी में पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर सिविल सर्जन कार्यालय से संपर्क किया। स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ संयुक्त रूप से केंद्र पर छापेमारी की गई।

जांच के दौरान सामने आया कि यह अवैध नशा मुक्ति केंद्र कुलदीप कुमार उर्फ चौहान और उसका बेटा चला रहे थे। पुलिस ने बताया कि केंद्र में मौजूद 43 लोगों को रेस्क्यू कर सरकारी मान्यता प्राप्त नशा मुक्ति केंद्रों में भेज दिया गया है। गिरफ्तार किए गए छह आरोपियों में से जसपाल और करमजीत के खिलाफ पहले से ही एनडीपीएस एक्ट के तहत मामले दर्ज हैं।

पुलिस के अनुसार केंद्र में रखे गए लोगों को गैरकानूनी तरीके से बंद करके रखा जाता था और उनके साथ मारपीट की जाती थी। इसके अलावा उन्हें कौन-कौन सी दवाइयां दी जाती थीं तथा ये दवाइयां और अन्य सामग्री कहां से लाई जाती थी, इसकी भी गहन जांच की जा रही है।

रेस्क्यू किए गए एक युवक पवनदीप सिंह ने बताया कि वह पिछले तीन महीने से अधिक समय से इस निजी नशा मुक्ति केंद्र में रह रहा था, जहां हर महीने 15 हजार रुपये शुल्क लिया जाता था। उसने आरोप लगाया कि केंद्र में मरीजों के साथ मारपीट की जाती थी और उन्हें गोलियां दी जाती थीं। उसने यह भी दावा किया कि केंद्र में रह चुके कुछ लोगों की छुट्टी मिलने के बाद नशे की ओवरडोज के कारण मौत हो चुकी है।

एडीसीपी विशालजीत सिंह ने कहा कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि केंद्र में इस्तेमाल की जा रही दवाइयों, नशीले पदार्थों और अन्य सामग्री की आपूर्ति कहां से हो रही थी। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान जो भी नए तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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