देश में लगातार बढ़ती अग्निकांड की घटनाएं गंभीर चिंता का विषय : कुमारी सैलजा

ऐलनाबाद 24 जून(एम पी भार्गव) सिरसा लोकसभा क्षेत्र की सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा ने देश के विभिन्न हिस्सों में लगातार हो रही भीषण अग्निकांड की घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि यदि समय रहते सुरक्षा नियमों को सख्ती से लागू किया जाता और व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी होती, तो अनेक निर्दोष लोगों की जान बचाई जा सकती थी।
कुमारी सैलजा ने कहा कि वर्ष 1995 के डबवाली अग्निकांड ने पूरे विश्व को झकझोर दिया था। उस त्रासदी के बाद अग्नि सुरक्षा संबंधी अनेक नियम, कानून और दिशा-निर्देश बनाए गए, लेकिन दुर्भाग्य से उनका प्रभावी क्रियान्वयन आज भी सुनिश्चित नहीं हो पाया है। यही कारण है कि समय-समय पर देश के विभिन्न हिस्सों में दर्दनाक हादसे सामने आते रहते हैं।
सांसद ने कहा कि दक्षिण भारत में धार्मिक समारोहों के दौरान हुए अग्निकांड, मेरठ के विक्टोरिया पार्क में लगी आग, दिल्ली के होटल अग्निकांड, देशभर की पटाखा फैक्ट्रियों में होने वाली दुर्घटनाएं तथा हाल ही में लखनऊ के एक कोचिंग संस्थान में आग लगने से हुई युवाओं की मौतें इस बात का प्रमाण हैं कि अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अभी भी गंभीर कमियां बनी हुई हैं।
सैलजा ने कहा कि पिछले कई वर्षों में प्रशासनिक जवाबदेही कमजोर हुई है और भ्रष्टाचार के कारण अनेक स्थानों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जाती रही है। भवनों, शिक्षण संस्थानों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, धार्मिक स्थलों तथा औद्योगिक इकाइयों में अग्निशमन विभाग के नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
कुमारी सैलजा ने विशेष रूप से हरियाणा का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश के अनेक जिलों में अग्निशमन विभाग कर्मचारियों की भारी कमी से जूझ रहा है। कई स्थानों पर 40 से 50 प्रतिशत तक रिक्त पदों के बावजूद काम चलाया जा रहा है। इसके अतिरिक्त अग्निशमन विभाग के अनेक वाहन और उपकरण भी पुराने हो चुके हैं तथा उन्हें तत्काल आधुनिक बनाने की आवश्यकता है।
कुमारी सैलजा ने केंद्र और राज्य सरकारों से मांग की कि अग्निशमन विभाग में रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाए, आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए तथा सभी सार्वजनिक एवं निजी संस्थानों में अग्नि सुरक्षा नियमों की नियमित जांच कर उनके प्रभावी पालन को सुनिश्चित किया जाए। सांसद ने कहा कि मानव जीवन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और इस विषय में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं हो सकती।

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