बिहार में वायरल वीडियो के बाद बड़ी कार्रवाई: पिस्टल तानने की घटना पर थाना प्रभारी समेत तीन पुलिसकर्मी निलंबित
बिहार में वायरल वीडियो के बाद बड़ी कार्रवाई, तीन पुलिसकर्मी निलंबित
- रिपोर्ट: सुरजीत सिंह
भोजपुर (बिहार)। भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलाउंटी गांव में पुलिस कार्रवाई के दौरान सामने आए एक वायरल वीडियो ने पुलिस विभाग में हलचल मचा दी है। वीडियो में एक युवक को पुलिस टीम के सामने पिस्टल तानते और धमकी देते हुए देखा गया, जिसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लेते हुए तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है।
थाना प्रभारी पर गिरी पहली गाज
शाहाबाद रेंज के डीआईजी डॉ. सत्यप्रकाश ने शाहपुर थाना प्रभारी (एसएचओ) राजेश कुमार मलाकार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। प्रारंभिक जांच में कर्तव्य निर्वहन में गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई।
यह फैसला भोजपुर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) राज के प्रस्ताव के आधार पर लिया गया। इसके अलावा मौके पर मौजूद एक सब इंस्पेक्टर और एक कांस्टेबल को भी निलंबित कर दिया गया है।
अवैध हथियार रखने की सूचना पर गांव पहुंची थी पुलिस
पुलिस को सूचना मिली थी कि आरोपी भरत भूषण तिवारी अवैध हथियार रखता है और सार्वजनिक रूप से उसका प्रदर्शन करता है। इसी सूचना के आधार पर पुलिस टीम बिलाउंटी गांव पहुंची थी।
हालांकि, ऑपरेशन के दौरान हालात अचानक तनावपूर्ण हो गए और बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में आरोपी पुलिसकर्मियों के सामने खुलेआम पिस्टल लहराते और उन्हें धमकाते हुए दिखाई दिया।
वीडियो वायरल होने के बाद उठे कई सवाल
वायरल वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली, तैयारी और मौके पर प्रतिक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े हो गए। वरिष्ठ अधिकारियों ने पूरे घटनाक्रम की समीक्षा कर विभागीय जांच शुरू कर दी।
जांच में पाया गया कि संवेदनशील और जोखिमपूर्ण परिस्थिति के बावजूद मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी अपेक्षित सतर्कता, तैयारी और त्वरित कार्रवाई नहीं दिखा सके। इसी आधार पर संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई।
एनकाउंटर के बाद हुई आरोपी की मौत
पुलिस के अनुसार, बाद में भरत भूषण तिवारी से जुड़ी मुठभेड़ के दौरान दोनों पक्षों के बीच गोलीबारी हुई, जिसमें वह घायल हो गया। उसे इलाज के लिए पीएमसीएच में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
हालांकि, फिलहाल इस पूरे मामले में जनचर्चा और विभागीय जांच का मुख्य केंद्र वायरल वीडियो और पुलिस की जवाबदेही को लेकर उठ रहे सवाल बने हुए हैं।
