महज 6 साल में ही दरक गया 146 करोड़ का ROB, जांच के घेरे में इंजीनियर और संवेदक,निरीक्षण करने पहुंचे प्रधान सचिव
लखीसराय(सरफराज आलम)करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किया गया लखीसराय बायपास रेल ओवरब्रिज महज छह वर्ष के भीतर ही तकनीकी खामियों की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। पुल में उभरी दरारों ने न केवल निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। स्थिति इतनी गंभीर मानी जा रही है कि प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से भारी वाहनों के आवागमन पर रोक लगा दी है।
मंगलवार को पथ निर्माण विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार पाल स्वयं लखीसराय पहुंचे और पुल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी शैलेन्द्र कुमार, पुलिस अधीक्षक प्रेरणा कुमार तथा विभागीय अधिकारी भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने पुल के विभिन्न हिस्सों का बारीकी से जायजा लिया और तकनीकी रिपोर्ट की समीक्षा की।
प्रधान सचिव ने बताया कि IIT पटना द्वारा कराए गए सेफ्टी ऑडिट में कई तकनीकी कमियां सामने आई हैं। इन खामियों को दूर करने के लिए विशेषज्ञों की निगरानी में व्यापक जीर्णोद्धार कार्य कराया जाएगा। मरम्मत कार्य की पूरी प्रक्रिया IIT पटना के तकनीकी मार्गदर्शन में होगी ताकि भविष्य में किसी प्रकार का खतरा उत्पन्न न हो।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि निर्माण में लापरवाही या गुणवत्ता से समझौते के लिए जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। प्रारंभिक जांच के आधार पर संबंधित अभियंताओं, अधिकारियों और संवेदकों की भूमिका की जांच की जा रही है। दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ अन्य कानूनी कदम भी उठाए जाएंगे।
फिलहाल सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पुल के दोनों ओर बैरिकेडिंग कर दी गई है और भारी वाहनों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लागू रहेगा। प्रशासन ने लोगों से वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की अपील की है।
गौरतलब है कि वर्ष 2020 में लगभग 146 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह पुल शहर के यातायात का प्रमुख माध्यम माना जाता है। इतने कम समय में पुल में दरारें सामने आने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं।
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