TMC में बगावत के संकेत! क्या ममता बनर्जी की पार्टी भी शिवसेना और NCP की राह पर?

  • रिपोर्ट: सुरजीत सिंह

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बढ़ती नाराजगी और नेताओं के पार्टी छोड़ने की घटनाओं ने राजनीतिक अटकलों को हवा दे दी है। चर्चा है कि महाराष्ट्र की शिवसेना और एनसीपी की तरह टीएमसी भी आंतरिक टूट का सामना कर सकती है।

इस पूरे विवाद के केंद्र में टीएमसी से निष्कासित नेता रिजू दत्ता हैं। उन्होंने दावा किया है कि पार्टी के 80 विधायकों में से 50 से अधिक विधायक खुद को “असली तृणमूल कांग्रेस” घोषित करने की तैयारी में हैं। उनके अनुसार, ये विधायक विधानसभा अध्यक्ष से मिलकर पार्टी पर दावा पेश कर सकते हैं। हालांकि, रिजू दत्ता स्वयं विधायक नहीं हैं।

विवाद तब और बढ़ गया जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पार्टी के दो विधायकों संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी को निष्कासित कर दिया। दोनों नेताओं ने आरोप लगाया था कि नेता प्रतिपक्ष से जुड़े एक प्रस्ताव में उनके फर्जी हस्ताक्षर किए गए थे। निष्कासन के बाद दोनों विधायकों ने अन्य विधायकों के साथ बैठक भी की, जिससे पार्टी में असंतोष की चर्चाएं और तेज हो गईं।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यदि किसी दल के दो-तिहाई विधायक अलग होकर नया गुट बनाते हैं, तो दलबदल कानून के तहत उन्हें कुछ परिस्थितियों में राहत मिल सकती है। टीएमसी के 80 विधायकों में से कम से कम 54 विधायकों का समर्थन किसी नए गुट को चाहिए होगा, तभी वह मान्यता का दावा कर सकेगा।

संविधान की दसवीं अनुसूची और 91वें संविधान संशोधन के तहत ऐसे मामलों में चुनाव आयोग और विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। यदि किसी गुट के पास पर्याप्त संख्या बल होता है, तो वह पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर भी दावा कर सकता है। अंतिम निर्णय चुनाव आयोग और जरूरत पड़ने पर अदालतों द्वारा लिया जाता है।

महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी में हुई टूट इसके प्रमुख उदाहरण हैं। शिवसेना में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में बड़ी बगावत हुई थी, जबकि एनसीपी में अजित पवार ने अलग रास्ता अपनाया था। दोनों मामलों में पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर लंबी कानूनी और राजनीतिक लड़ाई चली थी।

हालांकि, फिलहाल टीएमसी में किसी आधिकारिक विभाजन की पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन लगातार बढ़ती अंदरूनी खींचतान और नेताओं के बयानों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को गरमा दिया है। आने वाले दिनों में पार्टी के भीतर की स्थिति किस दिशा में जाती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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