- रिपोर्ट: प्राची सिंह
वृंदावन। वृंदावन के प्रसिद्ध संत श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज को लेकर इन दिनों भक्तों के बीच कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। उनकी सेहत को देखते हुए आश्रम प्रबंधन ने हाल ही में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं, जिसके बाद श्रद्धालुओं के मन में दीक्षा और दर्शन को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, मई 2026 के अंतिम सप्ताह में डॉक्टरों की एक विशेष टीम ने महाराज जी के स्वास्थ्य की जांच के बाद उन्हें पूर्ण आराम की सलाह दी। बताया जाता है कि वे लंबे समय से पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज (PKD) से पीड़ित हैं और नियमित डायलिसिस पर हैं। स्वास्थ्य पर अधिक दबाव न पड़े, इसके लिए उनकी प्रसिद्ध सुबह 3 बजे की पदयात्रा को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। आश्रम की ओर से इसकी आधिकारिक घोषणा भी की गई।
इसके बाद महाराज जी के एकांतिक वार्तालाप और दीक्षा कार्यक्रमों को भी अस्थायी रूप से रोक दिया गया। हर महीने बड़ी संख्या में श्रद्धालु उनसे दीक्षा लेने के लिए पंजीकरण कराते हैं, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में नई दीक्षा प्रक्रिया को अगले आदेश तक स्थगित रखा गया है। आश्रम का कहना है कि महाराज जी के पूर्ण स्वस्थ होने के बाद ही इस संबंध में आगे निर्णय लिया जाएगा।
स्वास्थ्य लाभ के लिए महाराज जी को यमुना तट स्थित उनकी निजी साधना स्थली ‘यमुना कुटिया’ में रखा गया है। यहां उनके आराम और उपचार को प्राथमिकता दी जा रही है। आश्रम प्रशासन ने कुटिया के आसपास सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी है तथा बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। केवल चिकित्सकों और सीमित सेवादारों को ही वहां रहने की अनुमति है।
यमुना कुटिया में रहने के दौरान महाराज जी ने मौन एकांतवास भी शुरू किया है। आश्रम की ओर से जारी संदेश में उन्होंने भक्तों से निरंतर नाम-जप और भक्ति में जुड़े रहने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि भले ही वे प्रत्यक्ष रूप से भक्तों के बीच उपस्थित न हों, लेकिन उनका आशीर्वाद सदैव भक्तों के साथ है।
इस बीच आश्रम प्रबंधन ने सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक अफवाहों का खंडन करते हुए स्पष्ट किया है कि महाराज जी सुरक्षित हैं और चिकित्सकों की निगरानी में स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। आश्रम ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करें।
डिस्क्लेमर: यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध धार्मिक एवं सामाजिक जानकारी पर आधारित है। श्रद्धालु किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले आधिकारिक स्रोतों से जानकारी की पुष्टि अवश्य करें।
