डालमिया दादरी से चरखी दादरी बनने तक का इतिहास, जानिए रामकिशन गुप्ता के संघर्ष की कहानी

गुस्ताखी माफ़ हरियाणा -पवन कुमार बंसल

हरियाणा के नए बने जिले चरखी दादरी का नाम कभी डालमिया दादरी हुआ करता था। यह नाम उद्योगपति सेठ डालमिया के नाम पर पड़ा था। बाद में सांसद रहे रामकिशन गुप्ता के लंबे संघर्ष के बाद इसका नाम बदलकर चरखी दादरी रखा गया, जो आगे चलकर जिला बना।

इस बात का प्रमाण पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ द्वारा वर्ष 1958 में जारी दसवीं कक्षा के रिजल्ट पत्र में भी मिलता है। उस प्रमाण पत्र में स्कूल का नाम “गवर्नमेंट हाई स्कूल, डालमिया दादरी” दर्ज है। यह रिजल्ट पत्र दरियाव सिंह का है, जो बाद में ढाणी फौगाट स्कूल से हेडमास्टर पद से सेवानिवृत्त हुए।

एक दिन सुबह की सैर के दौरान उनसे मुलाकात हुई तो उन्होंने यह जानकारी साझा की। उस समय उनकी बात पर सहज विश्वास नहीं हुआ, लेकिन बाद में उन्होंने अपना पुराना रिजल्ट पत्र दिखाकर इस तथ्य की पुष्टि कर दी। इन दिनों वे गुरुग्राम के सेक्टर-56 स्थित हिओ सोसाइटी में रह रहे हैं।

दादरी का नाम बदलने के लिए उस समय बड़ा आंदोलन चला था। चूंकि उत्तर प्रदेश में भी दादरी नाम का शहर है, इसलिए अलग पहचान बनाए रखने के उद्देश्य से निकटवर्ती गांव “चरखी” को जोड़कर इसका नाम “चरखी दादरी” रखा गया।

दरअसल, बहुत पहले सेठ डालमिया ने दादरी में सीमेंट फैक्ट्री स्थापित की थी। उसी के कारण यह इलाका “डालमिया दादरी” कहलाने लगा। बाद में यह फैक्ट्री बीमार इकाई घोषित हुई और सीमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने इसका अधिग्रहण कर लिया।

चरखी दादरी को जिला बनाए जाने पर निश्चित रूप से रामकिशन गुप्ता की आत्मा को संतोष मिला होगा। दादरी क्षेत्र में शिक्षा के प्रसार में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। उन्होंने यहां एक कॉलेज की स्थापना भी करवाई, जिसका शिलान्यास पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रताप सिंह कैरों ने किया था।

रामकिशन गुप्ता आज़ाद हिंद फौज से जुड़े रहे और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के करीबी माने जाते थे। उनके ज्ञानी जैल सिंह और फिरोज गांधी से भी घनिष्ठ संबंध थे। स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के कारण उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा।

वे वास्तव में इस मिट्टी के सच्चे सपूत थे। उन्होंने “दादरी एजुकेशन सोसाइटी” की स्थापना की, जिसके अंतर्गत आज भी दादरी में कई शिक्षण संस्थान संचालित हो रहे हैं। हरियाणा सरकार को उनकी स्मृति में चरखी दादरी में कोई महत्वपूर्ण स्मारक या संस्थान स्थापित करना चाहिए।

Pawan Kumar Bansal
Author and Journalist
Gurgaon Haryana
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