मनुष्य को भजन,कीर्तन,स्मरण और सत्संग के माध्यम से अपने जीवन को सफल बनाना चाहिए

श्रीमद् भागवत कथा – द्वितीय दिवस का वर्णन

ऐलनाबाद, 04 मई (एम पी भार्गव ) खंड के गांव उमेदपुरा में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के द्वितीय दिवस पर पूज्य गुरुदेव श्री शुकदेव जी महाराज के प्रेरणादायक प्रवचनों से वातावरण भक्तिमय हो उठा। कथा के प्रारंभ में गुरुदेव ने मानव जीवन की सार्थकता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि मनुष्य को भजन, कीर्तन, स्मरण और सत्संग के माध्यम से अपने जीवन को सफल बनाना चाहिए।
उन्होंने ध्यान, आत्मचिंतन, प्राणायाम, प्रत्याहार एवं इंद्रिय-निग्रह की महत्ता बताते हुए कहा कि ये साधन मनुष्य को सच्चे मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। गुरुदेव ने सगुण भक्ति एवं निष्काम कर्म के महत्व को समझाते हुए बताया कि भगवान की भक्ति से ही जीवन में सच्ची शांति और मुक्ति प्राप्त होती है।
कथा के दौरान श्री सृष्टि की उत्पत्ति का विस्तार से वर्णन किया गया तथा बताया गया कि भगवान ने इस सृष्टि को अपने स्वरूप से प्रकट किया है और समस्त जगत में परमात्मा ही व्याप्त है।
द्वितीय स्कंध के अंतर्गत श्री विदुर-मैत्रेय संवाद का वर्णन करते हुए गुरुदेव ने बताया कि भगवान द्वारा जय-विजय को दिए गए शाप के माध्यम से यह शिक्षा मिलती है कि जीवन में विनम्रता, शालीनता एवं सद्व्यवहार अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि संतों और सेवकों के व्यवहार से ही व्यक्ति के संस्कार, विचार और जीवन-दृष्टि का पता चलता है।
अंत में भगवान वाराह अवतार द्वारा हिरण्याक्ष के वध का वर्णन करते हुए कथा का समापन किया गया। कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और सभी ने भक्तिभाव से कथा का श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त किया।

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