दूरसंचार विभाग, हरियाणा एलएसए द्वारा सिरसा, हरियाणा में सुरक्षित दूरसंचार प्रथाओं एवं साइबर धोखाधड़ी रोकथाम पर हितधारक कार्यशाला एवं जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन
ऐलनाबाद,सिरसा, 16 अप्रैल( एम पी भार्गव ) 2026: दूरसंचार विभाग हरियाणा एलएसए ने सिरसा पुलिस के सहयोग से टैगोर ऑडिटोरियम, चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा में एक प्रभावी संवाद कार्यक्रम का सफल आयोजन किया। इस बैठक की संयुक्त अध्यक्षता श्री राधाचरण शाक्य, अतिरिक्त महानिदेशक दूरसंचार, हरियाणा एलएसए एवं श्री दीपक सहारण, पुलिस अधीक्षक (SP) सिरसा ने की। इस कार्यक्रम में 100 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, दूरसंचार सेवा प्रदाता (TSP) के अधिकारी तथा जिले भर के प्वाइंट्स ऑफ सेल (PoS) शामिल थे। यह कार्यक्रम सुरक्षित दूरसंचार प्रथाओं को बढ़ावा देने एवं साइबर धोखाधड़ी के विरुद्ध सामूहिक प्रयासों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अतिरिक्त महानिदेशक, हरियाणा एलएसए ने राष्ट्र निर्माण एवं माननीय प्रधानमंत्री के डिजिटल भारत दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में सुरक्षित संचार की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। उन्होंने दूरसंचार सेवाओं के दुरुपयोग के माध्यम से बढ़ते साइबर धोखाधड़ी एवं ठगी के मामलों पर चिंता व्यक्त की और सभी हितधारकों द्वारा सतर्कता एवं सक्रिय उपाय अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने साइबर धोखाधड़ी से निपटने के लिए दूरसंचार विभाग द्वारा अपनाए गए विभिन्न तंत्रों की जानकारी दी, जिनमें अवैध गतिविधियों में संलिप्त मोबाइल नंबरों की पहचान एवं ट्रैकिंग हेतु सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर (CEIR) तथा संचार साथी पोर्टल का उपयोग शामिल है। अतिरिक्त महानिदेशक ने यह भी बताया कि गृह मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C), राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) तथा बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों के सेवा केंद्रों के सहयोग से वित्तीय जोखिम संकेतक (FRIs) विकसित किए जा रहे हैं, जो दूरसंचार के दुरुपयोग से उत्पन्न संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की पहचान एवं चिन्हांकन में सहायक हैं।
नागरिकों को साइबर धोखाधड़ी की रिपोर्टिंग हेतु प्रमुख माध्यमों की जानकारी भी दी गई, जिनमें त्वरित रिपोर्टिंग के लिए 1930 हेल्पलाइन तथा www.cybercrime.gov.in पोर्टल शामिल हैं, जिससे समय पर हस्तक्षेप कर वित्तीय नुकसान से बचाव किया जा सकता है। प्रतिभागियों को सुरक्षित बैंकिंग एवं वित्तीय लेन-देन के लिए 1600 श्रृंखला के उपयोग के बारे में भी अवगत कराया गया तथा दूरसंचार सेवाओं के जिम्मेदार उपयोग एवं सतर्कता के महत्व पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम में सिम प्राप्ति प्रक्रिया का भी विस्तार से विवरण दिया गया तथा PoS संचालकों एवं TSPs के लिए आवश्यक सावधानियों पर प्रकाश डाला गया, जिससे सिम के दुरुपयोग को रोका जा सके। संचार साथी प्लेटफॉर्म के अंतर्गत विभिन्न नागरिक-केंद्रित पहलों की जानकारी भी साझा की गई, जिनमें संदिग्ध कॉल एवं संदेशों की रिपोर्टिंग हेतु ‘चक्षु’, खोए/चोरी हुए मोबाइल को ब्लॉक करने की सुविधा, अपने नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शनों की जानकारी, ‘नो योर मोबाइल हैंडसेट’ (KYM) तथा अंतरराष्ट्रीय कॉल ट्रैकिंग हेतु RICWIN शामिल हैं।
चर्चा के दौरान एसपी सिरसा ने नागरिकों की साइबर सुरक्षा संबंधी चिंताओं के समाधान हेतु DoT की पहल की सराहना की तथा कानून प्रवर्तन एजेंसियों (LEAs), TSPs एवं DoT के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कॉल्स, वर्चुअल कॉल्स एवं वीपीएन के दुरुपयोग से संबंधित मुद्दों पर भी सहयोग की अपेक्षा व्यक्त की। DoT ने आश्वासन दिया कि इन मुद्दों का समाधान विधि के प्रचलित प्रावधानों के अंतर्गत पूर्ण क्षमता एवं समन्वय के साथ किया जाएगा।
कार्यक्रम का समापन एक संवादात्मक सत्र के साथ हुआ, जिसमें PoS संचालकों एवं पुलिस अधिकारियों के प्रश्नों का संतोषजनक समाधान किया गया। DoT ने जन-जागरूकता, निवारक उपायों एवं कानून प्रवर्तन एजेंसियों एवं सेवा प्रदाताओं के साथ समन्वित प्रयासों के माध्यम से नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, जिससे एक सुरक्षित, विश्वसनीय एवं जिम्मेदार दूरसंचार पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण हो सके।
