- रिपोर्ट- विनोद मित्तल
नई दिल्ली: 7 अप्रैल 2026 को राष्ट्रीय सीमेंट एवं भवन सामग्री परिषद् (एनसीबी) ने “सीमेंट उद्योग में परियोजना प्रबंधन: चुनौतियाँ और अवसर” विषय पर एक सफल सेमिनार आयोजित किया, जिसमें उद्योग के अग्रणी विशेषज्ञों, परियोजना प्रबंधकों एवं सलाहकारों, शिक्षाविदों तथा प्रौद्योगिकी प्रदाताओं को एक साझा मंच पर एकत्रित किया गया, ताकि सीमेंट क्षेत्र में परियोजना क्रियान्वयन के बदलते परिदृश्य पर विचार-विमर्श किया जा सके।
सेमिनार का उद्घाटन मुख्य अतिथि श्री नीरज अखौरी, प्रबंध निदेशक, श्री सीमेंट लिमिटेड द्वारा तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में, भारत में कांगो गणराज्य के राजदूत श्री रेमंड सर्ज बाले की उपस्थिति में किया गया। इस अवसर पर डॉ. एल. पी. सिंह, महानिदेशक, एनसीबी एवं डॉ. एस. के. चतुर्वेदी, सचिव- एनसीबी भी उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में श्री नीरज अखौरी ने परियोजना प्रबंधन को सीमेंट उद्योग में “विकास की रीढ़” बताया। उन्होंने उद्योग के समक्ष आने वाली प्रमुख चुनौतियों जैसे भूमि अधिग्रहण, आपूर्ति श्रृंखला (supply chain) में व्यवधान एवं लागत में उतार-चढ़ाव, कुशल जनशक्ति की कमी तथा बहु-हितधारक समन्वय की बढ़ती जटिलता पर प्रकाश डाला। उन्होंने पश्चिम एशिया में चल रहे संकट का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे लॉजिस्टिक्स एवं ऊर्जा लागत में वृद्धि हुई है तथा परियोजना समयसीमा में अनिश्चितता बढ़ी है।
राजदूतश्री रेमंड सर्ज बाले ने राष्ट्र निर्माण एवं अवसंरचना विकास में सीमेंट उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि सड़क, आवास एवं औद्योगिक अवसंरचना के माध्यम से सीमेंट आर्थिक विकास की आधारशिला है। उन्होंने उद्योग जगत को अफ्रीका, विशेषकर कांगो गणराज्य में निवेश हेतु आमंत्रित किया, जो संसाधनों, बाजार तक पहुँच एवं निवेश के अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कांगो गणराज्य में 600 टीपीडी ग्रीनफील्ड सीमेंट संयंत्र परियोजना का उल्लेख किया, जिसे भारत सरकार के सहयोग से तथा एनसीबी द्वारा परियोजना प्रबंधन परामर्शदाता (PMC) के रूप में क्रियान्वित किया जा रहा है।
अपने स्वागत भाषण में डॉ. एल. पी. सिंह ने तेजी से विस्तार कर रहे भारतीय सीमेंट उद्योग (लगभग 700 मिलियन टन स्थापित क्षमता) में परियोजना प्रबंधन के रणनीतिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने योजना निर्माण, समय निर्धारण, जोखिम एवं अनुबंध प्रबंधन जैसे व्यावसायिक कौशलों के संस्थानीकरण की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. सिंह ने स्थिरता एवं डीकार्बोनाइजेशन की भूमिका को भी रेखांकित करते हुए भविष्य की परियोजनाओं में कार्बन कैप्चर, उपयोग एवं भंडारण (CCUS) के एकीकरण की आवश्यकता बताई। उन्होंने एनसीबी की अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति, विशेषकर कांगो गणराज्य में 600 टीपीडी सीमेंट संयंत्र के लिए PMC के रूप में इसकी भूमिका का भी उल्लेख किया।
सेमिनार में दो तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। प्रथम तकनीकी सत्र की अध्यक्षता श्री विमल जैन, तकनीकी एवं पूर्णकालिक निदेशक, हाइडेलबर्ग सीमेंट इंडिया लिमिटेड ने की, जिसमें EY, डालमिया सीमेंट, PMI, श्री सीमेंट एवं एनसीबी के विशेषज्ञों द्वारा सात प्रस्तुतियाँ दी गईं। द्वितीय तकनीकी सत्र की अध्यक्षता श्री पंकज केजरीवाल, कार्यकारी निदेशक, स्टार सीमेंट लिमिटेड ने की, जिसमें प्रोमैक, आईआईटी रुड़की, स्टार सीमेंट लिमिटेड, हाइडेलबर्ग सीमेंट इंडिया लिमिटेड एवं BOE कंसल्टिंग के विशेषज्ञों द्वारा पाँच प्रस्तुतियाँ दी गईं।
“सीमेंट उद्योग में परियोजना प्रबंधन में एआई के अवसर” विषय पर एक पैनल चर्चा भी आयोजित की गई, जिसमें उद्योग के वरिष्ठ विशेषज्ञों एवं नेताओं ने भाग लिया। इस सत्र का संचालन डॉ. कपिल कुकरेजा, सेमिनार के आयोजन सचिव ने किया। चर्चा में परियोजना क्रियान्वयन में दक्षता, निर्णय-निर्धारण एवं जोखिम न्यूनीकरण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की परिवर्तनकारी क्षमता को रेखांकित किया गया।
सेमिनार का समापन सार्थक चर्चाओं एवं ज्ञान के आदान-प्रदान के साथ हुआ, जिसमें सीमेंट उद्योग में दक्षता, स्थिरता एवं विकास को बढ़ावा देने हेतु सुदृढ़ परियोजना प्रबंधन पद्धतियों के महत्व की पुनः पुष्टि की गई।
