स्वर्ग की इन अप्सराओं ने तोड़ी थी महान ऋषियों की तपस्या, एक कथा से जुड़ा पापमोचनी एकादशी व्रत

नई दिल्ली। हिंदू धर्मग्रंथों और पुराणों में स्वर्ग की अप्सराओं से जुड़ी कई रोचक कथाएं मिलती हैं। कहा जाता है कि जब किसी ऋषि-मुनि की कठोर तपस्या से देवताओं का सिंहासन डोलने लगता था, तब देवराज इंद्र उन्हें विचलित करने के लिए अप्सराओं को पृथ्वी पर भेजते थे। अपनी सुंदरता और नृत्य से ये अप्सराएं कई बार महान ऋषियों की तपस्या भंग कर देती थीं। इन्हीं कथाओं में से एक घटना से पापमोचनी एकादशी व्रत की शुरुआत भी जुड़ी मानी जाती है।

मेनका और महर्षि विश्वामित्र

सबसे प्रसिद्ध कथा अप्सरा मेनका और महर्षि विश्वामित्र की है। पुराणों के अनुसार विश्वामित्र की कठोर तपस्या से इंद्र चिंतित हो गए थे। उन्होंने मेनका को उनकी तपस्या भंग करने के लिए भेजा। मेनका के सौंदर्य और नृत्य से ऋषि का मन विचलित हो गया और उनकी तपस्या भंग हो गई। बाद में उनसे शकुंतला का जन्म हुआ।

प्रम्लोचा और ऋषि कंदु

ब्रह्म पुराण में अप्सरा प्रम्लोचा और ऋषि कंदु की कथा मिलती है। कहा जाता है कि प्रम्लोचा की सुंदरता से ऋषि इतने मोहित हो गए कि उन्हें समय का ध्यान ही नहीं रहा। वर्षों तक वे मोह में डूबे रहे और उनका तप भंग हो गया। बाद में उन्हें इस घटना पर गहरा पश्चाताप हुआ।

घृताची और महर्षि भरद्वाज

अप्सरा घृताची का उल्लेख भी कई पौराणिक कथाओं में मिलता है। कहा जाता है कि घृताची को देखकर महर्षि भरद्वाज का मन विचलित हो गया था। इसी प्रसंग से आगे चलकर द्रोणाचार्य के जन्म की कथा जुड़ी है, जो महाभारत में कौरवों और पांडवों के गुरु बने।

मंजुघोषा और ऋषि मेधावी

पद्म पुराण के अनुसार अप्सरा मंजुघोषा को ऋषि मेधावी की तपस्या भंग करने के लिए भेजा गया था। जब ऋषि को अपनी गलती का एहसास हुआ तो उन्होंने क्रोध में मंजुघोषा को श्राप दे दिया। बाद में इस पाप से मुक्ति के लिए पापमोचनी एकादशी व्रत करने की कथा बताई गई, जिसे आज भी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

रंभा और विश्वामित्र का श्राप

एक बार फिर इंद्र ने विश्वामित्र की तपस्या को भंग करने के लिए अप्सरा रंभा को भेजा, लेकिन इस बार ऋषि को देवताओं की योजना का आभास हो गया। क्रोधित होकर उन्होंने रंभा को श्राप दे दिया कि वह लंबे समय तक पत्थर बनकर रहेंगी।

इन पौराणिक कथाओं में तप, संयम और क्रोध की शक्ति के साथ-साथ यह संदेश भी छिपा है कि मनुष्य को अपने संकल्प और आत्मसंयम को बनाए रखना चाहिए।

Leave A Reply

Your email address will not be published.