नई दिल्ली। भारत की सामरिक क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) एक और बड़ा कदम उठाने जा रहा है। K-4 सबमरीन-लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल (SLBM) के सफल परीक्षण के बाद अब भारत K-6 SLBM के परीक्षण की तैयारी में है। K-6 भारत की अब तक की सबसे उन्नत और शक्तिशाली परमाणु सक्षम मिसाइल मानी जा रही है, जो दुश्मन देशों के लिए गंभीर चुनौती साबित होगी।
K-6 मिसाइल की सबसे बड़ी ताकत इसकी लंबी रेंज और अत्यधिक गति है। जहां K-4 मिसाइल की रेंज लगभग 3,500 किलोमीटर है, वहीं K-6 की अनुमानित रेंज करीब 8,000 किलोमीटर होगी। इस रेंज के साथ K-6 पूरे चीन को अपनी जद में लेने में सक्षम होगी। इसकी गति मैक 7.5 के आसपास बताई जा रही है, जो इसे हाइपरसोनिक श्रेणी में शामिल करती है। इतनी तेज गति के कारण दुश्मन के डिफेंस सिस्टम के लिए इसे रोक पाना लगभग असंभव होगा।
K-6 SLBM की एक और बड़ी विशेषता यह है कि यह MIRV (मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल) तकनीक से लैस होगी। इस तकनीक के जरिए एक ही मिसाइल से कई वारहेड दागे जा सकेंगे। यानी एक ही लॉन्च में अलग-अलग लक्ष्यों पर एक साथ हमला संभव होगा। इससे भारत की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।
एक बार ऑपरेशनल होने के बाद K-6 मिसाइल परमाणु पनडुब्बियों से गहरे समुद्र में स्टील्थ पेट्रोलिंग के दौरान दूर-दराज के इलाकों को निशाना बनाने में सक्षम होगी। इसके विकास के साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा, जिनके पास एडवांस्ड SLBM तकनीक और अंतरमहाद्वीपीय हमले की क्षमता है।
गौरतलब है कि हाल ही में भारतीय नौसेना ने परमाणु-संचालित पनडुब्बी INS अरिघात से K-4 बैलिस्टिक मिसाइल का लगातार तीसरा सफल परीक्षण किया है। K-4 अब ऑपरेशनल रूप से तैयार मानी जा रही है। यह मिसाइल मैक 5 की गति हासिल कर सकती है और 2,000 किलोग्राम तक का पेलोड ले जाने में सक्षम है।
इन सफलताओं के साथ भारत ने जमीन, हवा, समुद्र और पानी के नीचे से परमाणु हथियार दागने की क्षमता हासिल कर ली है। K-6 के आने से भारत की न्यूक्लियर ट्रायड और अधिक सशक्त होगी, जिससे देश की सामरिक सुरक्षा को नई मजबूती मिलेगी।
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