बुधवार व्रत: गणेश और बुध देव की पूजा से मिलेगा बुद्धि-ज्ञान और सुख-समृद्धि का वरदान

हिंदू धर्म में बुधवार का दिन भगवान गणेश और बुध देव को समर्पित माना जाता है। इस दिन विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से बुद्धि, ज्ञान, व्यापार और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। मान्यता है कि पौष माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर पड़ने वाला बुधवार विशेष फलदायी होता है। इस दिन विघ्नहर्ता गणेश जी की आराधना करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और बुध ग्रह से जुड़े दोषों का निवारण भी होता है।

पौष शुक्ल चतुर्थी का महत्व

पौष माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि बुधवार को पड़ रही है। इस दिन सूर्य धनु राशि में विराजमान रहेंगे, जबकि चंद्रमा शाम 7 बजकर 46 मिनट तक मकर राशि में और इसके बाद कुम्भ राशि में प्रवेश करेंगे। यह तिथि गणेश पूजन और बुध ग्रह शांति के लिए शुभ मानी जाती है।

बुध ग्रह दोष का निवारण

द्रिक पंचांग के अनुसार, इस बुधवार को अभिजीत मुहूर्त नहीं है। राहुकाल दोपहर 12 बजकर 21 मिनट से 1 बजकर 38 मिनट तक रहेगा। इस दिन कोई विशेष पर्व नहीं है, लेकिन जिन जातकों की कुंडली में बुध ग्रह से संबंधित दोष हैं, वे बुधवार का व्रत और पूजा करके लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

सुख-समृद्धि और ज्ञान में वृद्धि

पौराणिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि बुधवार के दिन गजानन महाराज की विशेष पूजा और व्रत करने से बुद्धि, विवेक, ज्ञान और आर्थिक समृद्धि में वृद्धि होती है। विद्यार्थियों और व्यापारियों के लिए यह दिन विशेष रूप से लाभकारी माना गया है।

इन बातों से करें परहेज

यदि किसी कारणवश व्रत न रख सकें, तो भी इस दिन मांस-मदिरा का सेवन, झूठ बोलना, किसी का अपमान करना, बाल या दाढ़ी कटवाना जैसी चीजों से परहेज करना चाहिए।

व्रत की विधि

धर्म ग्रंथों के अनुसार, बुधवार व्रत की शुरुआत किसी भी शुक्ल पक्ष के पहले बुधवार से की जा सकती है। लगातार 12 बुधवार व्रत रखने के बाद विधिपूर्वक उद्यापन करने का विधान है।

पूजा करने की विधि

ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। इसके बाद पूजा स्थल को स्वच्छ कर गंगाजल से शुद्ध करें। चौकी पर वस्त्र बिछाकर पूजन सामग्री रखें और ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) की ओर मुख करके आसन पर बैठें।

श्री गणेश को दूर्वा और पीले पुष्प अर्पित करें, वहीं बुध देव को हरे रंग के वस्त्र चढ़ाएं। पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप करें—
“ॐ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥”

व्रत कथा और पारण

पूजा के बाद व्रत कथा सुनें, गणेश जी को हलवे का भोग लगाएं और श्री गणेश व बुध देव की आरती करें। अंत में प्रसाद का वितरण करें और शाम के समय फलाहार से व्रत का पारण करें।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस विधि से बुधवार का व्रत रखने पर जीवन में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और गणेश व बुध देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

डिस्क्लेमर- यहां दी गई जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं। khabrejunction.com इनकी पुष्टि नहीं करता। 

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