अमृतसर। भारत सरकार ने एक बार फिर मानवता और विश्वास की मिसाल पेश करते हुए पाकिस्तान के 67 कैदियों को रिहा कर दिया है। इनमें 53 मछुआरे और 14 सिविल कैदी शामिल हैं। सभी कैदी लंबे समय से भारत की अलग-अलग जेलों में सज़ा काट रहे थे। आज इन्हें अटारी-वाघा बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तानी रेंजर्स के हवाले किया गया।
प्रोटोकॉल अधिकारी अरुण माहल ने जानकारी दी कि रिहा किए गए कैदियों में गुजरात की जेलों से 21, राजस्थान से 1, पोरबंदर से 39, हैदराबाद और लुधियाना से एक-एक तथा अमृतसर की जेलों से 4 कैदी शामिल हैं। सभी की इमिग्रेशन और कस्टम प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्हें पाकिस्तान को सौंपा गया।
रिहाई के दौरान कैदियों ने अपनी-अपनी कहानियाँ साझा कीं।
एक कैदी ने बताया कि वह स्नैपचैट पर एक लड़की से प्यार में अंधा होकर भारत आया था और सरहद पार करने पर उसे 4 साल जेल में रहना पड़ा।
दूसरे कैदी ने कहा कि घरेलू झगड़े के चलते उसने पाकिस्तान छोड़ा और भारत आया, जहाँ उसे 5 साल की सज़ा मिली।
वहीं, एक मछुआरे ने बताया कि वह सिर्फ 16 साल की उम्र में गलती से भारतीय जल सीमा में प्रवेश कर गया था। उसके साथ 15 और लोग थे, जिनमें से 2 की मौत हो गई। अब वह अपने पिता के साथ रिहा हुआ है, लेकिन उसने भारत सरकार से अपील की कि उसके बाकी साथियों को भी छोड़ा जाए।
गौरतलब है कि हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादियों द्वारा निर्दोष लोगों की हत्या के बाद भारत-पाक संबंधों में तनाव बढ़ गया था। इसके बावजूद भारत सरकार का यह कदम मानवता और पड़ोसी देश के साथ भरोसे को मज़बूत करने वाला माना जा रहा है।
