क्या घर में कुत्ता पालना शास्त्रों के अनुसार सही है? प्रेमानंद जी महाराज ने दिया जवाब, जानिए क्या है मान्यता

नई दिल्ली। आजकल घरों में कुत्ता पालना आम हो गया है। लोग उन्हें परिवार के सदस्य की तरह मानते हैं, गाड़ियों में घुमाते हैं, अपने साथ सुलाते हैं और बच्चों की तरह प्यार करते हैं। लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में जब एक भक्त ने संत प्रेमानंद जी महाराज से पूछा कि क्या घर में कुत्ता पालना शास्त्रों के अनुसार सही है, तो इस पर उन्होंने विस्तृत जवाब दिया।

प्रेमानंद जी महाराज ने कहा कि कुत्ते-बिल्ली भी भगवान के बनाए जीव हैं और उन्हें भी इस सृष्टि में जीने का उतना ही अधिकार है जितना मनुष्य को। ऐसे में उन्हें पालना या उनसे प्रेम करना शास्त्र विरोधी नहीं है।

हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शास्त्रों के अनुसार कुत्ता ‘द्वारपाल’ होता है और उसका स्थान घर के बाहर होता है। अगर कोई कुत्ता पालता है तो उसे घर के भीतर नहीं बल्कि बाहर रखना चाहिए।

महाराज ने आगे कहा कि कुत्ते से दुलार करें, उसका ध्यान रखें, अगर वह बीमार हो जाए तो इलाज कराएं। लेकिन कुत्ते को रसोई, मंदिर या बेडरूम में लेकर न जाएं, क्योंकि इससे घर में बीमारियां फैल सकती हैं और देवी-देवता की कृपा भी बाधित हो सकती है।

इस संदर्भ में उन्होंने समझाया कि प्रेम करना गलत नहीं, लेकिन मर्यादा का पालन जरूरी है। पशु-पक्षियों से प्रेम करें, पर धार्मिक मर्यादाओं का भी ध्यान रखें।

यह विचार धार्मिक आस्था पर आधारित हैं और हर व्यक्ति की सोच अलग हो सकती है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी पशुओं के साथ प्रेम और देखभाल को सकारात्मक माना जाता है, लेकिन धार्मिक रूप से क्या उचित है, यह व्यक्ति की व्यक्तिगत आस्था पर निर्भर करता है।

 

डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं। khabrejunction.Com इसकी पुष्टि नहीं करता। किसी भी निर्णय से पूर्व संबंधित विषय के एक्सपर्ट से सलाह अवश्य लें।

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