समाज में जब कोई आपका हक छीनने की कोशिश करता है, जब सत्ता या सिस्टम के पहियों में आपकी आवाज दब जाती है — तब जो आपकी बात को दुनिया और प्रशासन तक पहुंचाता है, वह है पत्रकार।
जब दबंग आपका अधिकार छीनता है,
जब प्रशासन का कोई कर्मचारी आपको बेवजह परेशान करता है,
जब आपकी आवाज ऊपर तक नहीं पहुंच पाती,
जब कोई लेखपाल, प्रधान या अधिकारी अन्याय करता है,
जब किसी कार्यक्रम को प्रचारित करने की जरूरत होती है,
जब समाज की बुराइयों को उजागर करना हो,
जब आपके बच्चे को स्कूल में कोई प्रताड़ित करता है,
जब आपकी फसल बर्बाद होती है और मुआवज़े की जरूरत होती है,
जब आप घर बैठे दुनिया की खबरें जानना चाहते हैं,
जब सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता,
जब कोई हादसा होता है —
हर बार आप किसी न किसी पत्रकार की ओर देखते हैं।
तो सोचिए — क्या वह व्यक्ति जो धूप, बारिश, सर्दी और रात के अंधेरे में भी समाज को सच दिखाने के लिए जुटा रहता है, उसे सम्मान, सहयोग और सराहना नहीं मिलनी चाहिए?
हम यह नहीं कहते कि हर पत्रकार बेदाग होता है, लेकिन सभी पत्रकारों को बदनाम करना भी उतना ही गलत है।
पत्रकार न हों तो आपका सच कहीं खो जाएगा। इसलिए अगली बार किसी पत्रकार को देखकर उसे केवल एक ‘मीडियावाला’ न कहें, बल्कि उसकी मेहनत को समझें।
क्योंकि हम न हों, तो ज्ञान गुम हो जाएगा…
