Rajasthan Politics: अशोक गहलोत का भाजपा पर हमला – ‘मुख्यमंत्री खुद पूछते हैं कि नाम शामिल हुए या नहीं’

जयपुर, 19 मई। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोमवार को एक बार फिर राज्य की भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार दिल्ली और नागपुर (RSS मुख्यालय) के दबाव में काम कर रही है और मुख्यमंत्री की भूमिका केवल औपचारिक रह गई है।

गहलोत ने कहा, “राज्य में लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी हो रही है। मुख्यमंत्री को यह तक पूछना पड़ता है कि ‘जो नाम मैंने सुझाए थे, वे सूची में शामिल हुए भी या नहीं?’ यह सत्ता की गरिमा और लोकतंत्र का अपमान है।”

 ‘दिल्ली और नागपुर से लिए जा रहे हैं फैसले’
गहलोत ने आरोप लगाया कि राजस्थान में सरकार का असली नियंत्रण भाजपा हाईकमान और संघ के पास है, जिससे मुख्यमंत्री तक अपनी बात नहीं रख पा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि

“आज सरकार पूरी तरह से दबाव में है। सारे फैसले दिल्ली या नागपुर से लिए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री का कोई स्वतंत्र निर्णय नहीं है।”

  पीएम मोदी के बीकानेर दौरे पर टिप्पणी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीकानेर दौरे का स्वागत करते हुए गहलोत ने कहा कि

“‘ऑपरेशन सिंदूर’ देशहित में उठाया गया कदम था और सभी दलों ने इसमें सरकार का समर्थन किया।”
हालांकि उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कश्मीर पर मध्यस्थता की पेशकश को लेकर केंद्र सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए।

“कश्मीर एक द्विपक्षीय मुद्दा है। ट्रंप का ट्वीट ‘पंचायती’ जैसा था। सरकार को इसमें तुरंत और स्पष्ट प्रतिक्रिया देनी चाहिए थी।”

 शशि थरूर की भूमिका पर प्रतिक्रिया
गहलोत ने कांग्रेस सांसद शशि थरूर को सरकार से जुड़ी भूमिका मिलने की चर्चा पर कहा कि

“थरूर योग्य नेता हैं, लेकिन अगर कोई प्रस्ताव मिला था, तो उन्हें पहले कांग्रेस नेतृत्व से चर्चा करनी चाहिए थी। यह संसदीय परंपरा और पार्टी की गरिमा से जुड़ा मामला है।”

 मुख्यमंत्री को मिल रही धमकियों पर जताई चिंता
गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को मिल रही जान से मारने की धमकियों पर चिंता जताई।
उन्होंने कहा,

“जब खुद मुख्यमंत्री सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिकों का क्या होगा? प्रशासन को इस पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए और मामले को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।”

  कंवरलाल मीणा की सदस्यता पर सवाल
गहलोत ने भाजपा विधायक कंवरलाल मीणा की सदस्यता को लेकर भी विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा:

“जब पीसीसी चीफ डोटासरा को सिर्फ मीडिया रिपोर्ट के आधार पर निलंबित कर दिया गया, तो सजा पाए कंवरलाल मीणा को अब तक क्यों नहीं बर्खास्त किया गया?”
उन्होंने आरोप लगाया कि
“स्पीकर आज निष्पक्ष नहीं हैं, बल्कि RSS की विचारधारा से प्रभावित हैं।”

गहलोत के बयान एक बार फिर राजस्थान की राजनीति में सत्ता और संगठन के बीच खींचतान और लोकतांत्रिक मर्यादाओं पर बहस को हवा दे रहे हैं। उनके आरोप भाजपा और संघ के खिलाफ एक सामाजिक और राजनीतिक विमर्श खड़ा करने की कोशिश माने जा रहे हैं, जिसे आने वाले दिनों में विपक्ष और ज्यादा जोर दे सकता है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.