लोकगायिका नेहा सिंह राठौर को बिन माँगी सलाह – अभिव्यक्ति की आज़ादी तो ठीक लेकिन युद्ध के समय भाषा संतुलित होनी चाहिए i

ग़ुस्ताखी माफ़ हरियाणा – पवन कुमार बंसल

नेहा सिंह राठौर का सत्ता से सवाल पूछना तो ठीक लेकिन युद्ध जैसे समय पर थोड़ा संयम बरतना चाहिए।  मेरे काफ़ी पाठक पूछ रहे हैं कि आपने लोकगायिका नेहा सिंह राठौर के बारे कुछ नहीं लिखा,  बता दें कि मैडम राठौर लोकप्रिय गायिका जो सत्ता से टकराती है। आवाज सुरीली और चेहरा फ़ोटोजेनिक सीजफायर को लेकर मोदी से पूछे उनके सवालों को लेकर सोशल मीडिया पर उनकी ज़बरदस्त ट्रॉलिंग हो रही है, भाजपा के आईटी सेल ने तो भाषा की गरिमा भी नहीं रखी। मेरा निजी विचार तो यह है कि जहां मैं अभिव्यक्ति की आज़ादी की वकालत करता हूं वही नाज़ुक समय में देश की सुरक्षा के बारे सवाल अवॉयड करने चाहिए। वैसे भी जनता सब जानती है, दुमछला   मैं तो यही कहूँगा, मेरे कलाम से बेहतर है मेरी ख़ामोशी ने कितने सवालों की आबरू रख ली, किसी ने अपना सफ़ीना डूबो के साहिल पर हजारों डूबने वालो की आबरू रख लीं..

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