विजय कुमार सिन्हा फिर बनें बिहार के डिप्टी सीएम,कार्यकर्ताओं में जश्न का माहौल
1990 में लिया राजनीतिक अवतार , 2017 में पहली बार बने बिहार कैबिनेट में मंत्री
लखीसराय। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की ऐतिहासिक जीत के बाद भाजपा ने अपने विधायी दल के उपनेता के रूप में विजय कुमार सिन्हा को चुना है। 243 सीटों वाली विधानसभा में एनडीए ने 202 सीटें हासिल कर महागठबंधन को धूल चटा दी। भाजपा को 89 और जेडीयू को 85 सीटें मिलीं। इस अप्रत्याशित सफलता के बीच विजय कुमार सिन्हा का यह चयन बिहार की राजनीति में भूमिहार समुदाय के प्रभावशाली चेहरे के रूप में उनकी बढ़ती साख को दर्शाता है।श्री सिन्हा पहले से हीं बिहार के उप मुख्यमंत्री हैं।उन्होंने लखीसराय विधानसभा सीट से अपनी पांचवीं लगातार जीत दर्ज की।उन्होंने कांग्रेस के अमरेश कुमार अनीश को 24940 वोटों के भारी अंतर से हराया। उन्हें 122408 वोट मिले।चुनाव परिणाम के बाद कहा कि लोगों का यह विश्वास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जोड़ी पर है। यह जीत बिहार के युवाओं , किसानों और महिलाओं के भविष्य के लिए है। विजय कुमार सिन्हा का जन्म 05 जून 1967 को बिहार के लखीसराय जिले के तिलकपुर गांव में एक साधारण परिवार में हुआ था। उनके पिता शारदा रमन सिंह एक स्कूल शिक्षक थे,जबकि मां सुरमा देवी गृहिणी। श्री सिन्हा ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय स्तर पर पूरी की और 1989 में बेगूसराय के पॉलिटेक्निक कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा हासिल किया। शिक्षा के दौरान ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की छात्र शाखा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़े। यहां से उनकी राजनीतिक यात्रा की नींव पड़ी। सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री के बावजूद विजय सिन्हा ने इंजीनियरिंग के क्षेत्र में करियर बनाने के बजाय राजनीति को अपनाया।1986 में उन्होंने सुशीला देवी से विवाह किया। उन्हें दो बेटे और दो बेटियां हैं।
विजय कुमार सिन्हा का राजनीतिक उदय भाजपा के निचले स्तर से शुरू हुआ। 1990 के दशक में वे भाजपा के स्थानीय कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय रहे। लेकिन 2005 में लखीसराय विधानसभा सीट से पहली बार विधायक बने। तब से वे इस सीट पर अडिग हैं। 2010 में आरजेडी के फुलेना सिंह को , 2015 में जेडीयू के रामानंद मंडल को और 2020 में कांग्रेस के अमरेश कुमार को हराकर जीत का परचम लहराते आए हैं। 2025 की जीत ने उनके पांच दशकों के विधायकी सफर को और मजबूत किया। पहली बार 2017 में नीतीश कुमार सरकार में उन्हें श्रम संसाधन विभाग का मंत्री बनाया गया। मंत्री रहते उन्होंने श्रमिकों के कल्याण और औद्योगिक नीतियों पर फोकस किया। 2020 में एनडीए की जीत के बाद श्री सिन्हा को बिहार विधानसभा का स्पीकर चुना गया। यह भाजपा का बिहार में पहला ऐसा पद था। उनके कार्यकाल में सदन की कार्यवाही में उनकी आक्रामक शैली चर्चा का विषय बनी। उन्होंने विपक्ष के हमलों का कड़ा जवाब दिया। लेकिन 2022 में जब नीतीश कुमार ने महागठबंधन के साथ गठबंधन किया तो अविश्वास प्रस्ताव के दबाव में उन्हें स्पीकर पद से इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद वे विपक्ष के नेता (एलओपी) बने और महागठबंधन सरकार पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने तमिलनाडु में बिहारियों के कथित उत्पीड़न जैसे मुद्दों पर सरकार को कटघरे में खड़ा किया। जनवरी 2024 में जब नीतीश कुमार फिर एनडीए में लौटे तो श्री सिन्हा को सम्राट चौधरी के साथ उप मुख्यमंत्री बनाया गया। उन्होंने सड़क निर्माण , कला-संस्कृति एवं युवा मामलों , खनन एवं भूविज्ञान जैसे विभाग संभाले। फरवरी 2025 में कृषि विभाग मिला। यहां उन्होंने किसान कल्याण योजनाओं को गति दी। श्री सिन्हा की छवि एक आक्रामक और साहसी राजनेता की है। 2020-22 में स्पीकर के रूप में नीतीश कुमार से उनकी कई टकराहटें हुईं , जैसे विधानसभा की वर्षगांठ समारोह के निमंत्रण में मुख्यमंत्री का नाम न जोड़ना। भूमिहार समुदाय से आने के कारण वे भाजपा के ऊपरी जाति नेतृत्व को मजबूत करने का प्रतीक बने हुए हैं। चुनौतियों के बीच 2025 चुनाव में सिन्हा का काफिला लखीसराय के खोरियारी गांव में ग्रामीणों के गुस्से का शिकार बना। टूटी सड़कों और खराब जल निकासी को लेकर गांव वालों ने उनके वाहन पर जूते और गाय का गोबर फेंका। श्री सिन्हा ने जवाब में तीखे शब्द बोले और सत्ता में लौटने पर “छाती पर बुलडोजर” चलाने की धमकी दी। इस घटना की व्यापक आलोचना हुई। विपक्ष ने इसे “राजनीतिक अहंकार” करार दिया। फिर भी मतदाताओं ने उन्हें भारी बहुमत दिया , जो उनकी मजबूत जमीन को दर्शाता है। विजय कुमार सिन्हा का राजनीतिक सफर लोगों के लिए प्रेरणादायक है। विजय कुमार सिन्हा को दुबारा डिप्टी सीएम बनाए जाने पर भाजपा कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।
