US DHS Mr Singh Post : ‘मिस्टर सिंह, देश छोड़ो या नतीजा भुगतो’… US DHS की पोस्ट पर बवाल, सिख संगठनों ने बताया नस्लवादी
US DHS Mr Singh Post : अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) की सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। DHS की ओर से ‘Mr Singh’ को निशाना बनाकर शेयर की गई एक पोस्ट पर सिख और भारतीय-अमेरिकी संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई। संगठनों ने इस पोस्ट को नस्लवादी और सिख समुदाय को निशाना बनाने वाला बताया। विवाद बढ़ने के बाद DHS ने संबंधित पोस्ट को सोशल मीडिया से हटा दिया।
AI तस्वीर और ‘Mr Singh’ संदेश पर विवाद
DHS की ओर से शेयर की गई पोस्ट में AI से तैयार तस्वीरों और Transformers फिल्म के किरदारों का इस्तेमाल किया गया था। पोस्ट में एक दक्षिण एशियाई व्यक्ति को दिखाया गया और उसके साथ ‘Mr Singh’ का उल्लेख किया गया। एक संदेश में उसे अमेरिका छोड़ने के लिए कहा गया, जबकि दूसरी लाइन में अमेरिकी सड़कों से हटने और ड्राइविंग नहीं आने जैसी टिप्पणी की गई थी। यही भाषा विवाद का मुख्य कारण बनी।
यह पोस्ट DHS की उस व्यापक मुहिम का हिस्सा थी, जिसमें बिना उचित लाइसेंस के कमर्शियल वाहन चलाने वाले प्रवासियों पर कार्रवाई और ऐसे लोगों को अमेरिका छोड़ने के लिए प्रोत्साहित करने का संदेश दिया जा रहा है। लेकिन आलोचकों का कहना था कि किसी विशेष उपनाम और दक्षिण एशियाई पहचान वाले व्यक्ति को इस तरह पेश करना पूरे समुदाय को रूढ़ छवि में बांधने जैसा है।
‘Singh’ नाम को लेकर क्यों उठा सवाल?
इस विवाद का सबसे अहम पहलू ‘Singh’ उपनाम है। यह सिख समुदाय में व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाला उपनाम है। ऐसे में सिख संगठनों ने सवाल उठाया कि सरकारी एजेंसी के प्रचार में ‘Mr Singh’ को एक नकारात्मक और आपत्तिजनक संदर्भ में दिखाने से समुदाय के लाखों लोगों के बारे में गलत धारणा बन सकती है।
सिख संगठनों ने कहा कि किसी व्यक्ति की कथित गलती या कानूनी स्थिति को उसके धर्म, उपनाम या समुदाय की पहचान से जोड़कर पेश नहीं किया जाना चाहिए। इसी वजह से इस पोस्ट को केवल इमिग्रेशन नीति का हिस्सा नहीं बल्कि पहचान आधारित प्रोफाइलिंग के संदर्भ में भी देखा गया।
सिख और हिंदू संगठनों ने जताई नाराजगी
DHS की पोस्ट सामने आने के बाद सिख और हिंदू संगठनों ने इसकी आलोचना की। Sikh Coalition ने कहा कि 9/11 के 25 साल बाद भी सिखों को उनके पहनावे और दिखावे के आधार पर निशाना बनाए जाने की चिंता बनी हुई है। संगठन ने इस बात पर भी जोर दिया कि अमेरिका में बड़ी संख्या में सिखों का उपनाम Singh है।
Hindu American Foundation ने भी पोस्ट हटाए जाने के बाद प्रतिक्रिया दी। संगठन ने कहा कि किसी संघीय एजेंसी की ओर से भारतीय या सिख व्यक्ति की racialised caricature का इस्तेमाल करना गंभीर चिंता का विषय है। संगठन ने यह भी कहा कि केवल पोस्ट हटाना पर्याप्त कदम नहीं माना जाना चाहिए।
पोस्ट में Transformers का इस्तेमाल भी विवाद में
DHS की पोस्ट में Transformers फ्रेंचाइजी के लोकप्रिय किरदार Optimus Prime जैसी छवि का इस्तेमाल किया गया था। पोस्ट को एक फिल्म पोस्टर की शैली में तैयार किया गया था और इसमें ‘deportation’ अभियान से जुड़े संदेश दिए गए थे। इस वजह से विवाद केवल सिख समुदाय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कॉपीराइट और ब्रांड के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठे।
Hasbro, जो Transformers फ्रेंचाइजी की मालिक कंपनी है, ने कहा कि DHS की ओर से इस्तेमाल की गई सामग्री के लिए कंपनी की अनुमति नहीं ली गई थी और यह Transformers ब्रांड या Hasbro का प्रतिनिधित्व नहीं करती।
DHS ने पोस्ट क्यों हटाई?
पोस्ट के सामने आने के बाद भारतीय-अमेरिकी समूहों, सिख संगठनों और कई अमेरिकी नेताओं की ओर से आलोचना शुरू हुई। बढ़ते विवाद के बीच DHS ने संबंधित पोस्ट को हटा दिया। हालांकि, विभाग की ओर से पोस्ट हटाने का स्पष्ट कारण सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया।
रिपोर्टों के मुताबिक, DHS ने आलोचनाओं के जवाब में उस व्यक्ति को लेकर अपना पक्ष रखा, जिसे पोस्ट से जोड़ा जा रहा था। विभाग का कहना था कि पोस्ट एक विशेष मामले और कमर्शियल ड्राइविंग से जुड़े मुद्दे के संदर्भ में थी। लेकिन आलोचकों ने कहा कि किसी खास व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई का संदेश देने के लिए समुदाय की पहचान से जुड़े उपनाम का इस्तेमाल उचित नहीं था।
किस मामले से जुड़ा था विवाद?
कुछ रिपोर्टों के अनुसार DHS ने इस पोस्ट को भारतीय ट्रक ड्राइवर हरजिंदर सिंह से जुड़े एक मामले के संदर्भ में बताया। हरजिंदर सिंह पर फ्लोरिडा में एक घातक सड़क दुर्घटना से संबंधित गंभीर आरोप हैं और उन्होंने आरोपों से इनकार किया है। DHS ने अपने अभियान में कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस और इमिग्रेशन स्थिति से जुड़े मुद्दों को उठाया था।
हालांकि, आलोचकों का कहना था कि किसी एक व्यक्ति से जुड़े मामले को व्यापक समुदाय की पहचान से जोड़ना उचित नहीं है। यही वजह है कि पोस्ट को लेकर विवाद तेजी से बढ़ गया और इसे racial profiling के आरोपों से जोड़ा गया।
9/11 की बरसी से पहले क्यों बढ़ी संवेदनशीलता?
इस विवाद का समय भी महत्वपूर्ण रहा। यह मामला 9/11 हमलों की 25वीं बरसी के ठीक आसपास सामने आया। सिख संगठनों ने इस संदर्भ को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया, क्योंकि 9/11 के बाद अमेरिका में सिख समुदाय के लोगों को भी उनकी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के कारण भेदभाव और हिंसा का सामना करना पड़ा था।
इसी पृष्ठभूमि में संगठनों ने कहा कि सरकारी संचार में किसी समुदाय की पहचान को नकारात्मक तरीके से पेश करने से पुराने पूर्वाग्रह और भेदभाव फिर से मजबूत हो सकते हैं।
Self-Deport अभियान क्या है?
DHS की यह पोस्ट ऐसे समय में सामने आई जब अमेरिकी प्रशासन CBP Home कार्यक्रम के जरिए पात्र undocumented migrants को स्वेच्छा से अमेरिका छोड़ने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। इस कार्यक्रम के तहत पात्र लोग देश छोड़ने की अपनी इच्छा दर्ज करा सकते हैं और उन्हें यात्रा सहायता तथा निर्धारित आर्थिक सहायता मिलने की व्यवस्था बताई गई है।
यानी DHS का मूल अभियान इमिग्रेशन और self-deportation नीति से जुड़ा था, लेकिन ‘Mr Singh’ पोस्ट के कारण चर्चा का केंद्र नीति से हटकर समुदाय की पहचान और सरकारी प्रचार के तरीके पर आ गया।
पोस्ट हटने के बाद भी विवाद जारी
DHS द्वारा पोस्ट हटाए जाने के बावजूद विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। भारतीय-अमेरिकी और सिख संगठनों ने सरकारी एजेंसियों से ऐसे संदेशों में ज्यादा सावधानी बरतने की मांग की है। उनका कहना है कि इमिग्रेशन कानूनों को लागू करना सरकार का अधिकार हो सकता है, लेकिन इसके प्रचार में किसी धर्म, समुदाय, नस्ल या सांस्कृतिक पहचान को नकारात्मक रूप में पेश नहीं किया जाना चाहिए।
इस पूरे विवाद ने अमेरिका में इमिग्रेशन नीति और सरकारी सोशल मीडिया संचार को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक ओर प्रशासन अवैध इमिग्रेशन और बिना उचित लाइसेंस वाले कमर्शियल ड्राइवरों पर कार्रवाई को अपनी नीति का हिस्सा बता रहा है, वहीं दूसरी ओर समुदाय और नागरिक अधिकार संगठन इस बात पर जोर दे रहे हैं कि कानून लागू करने की प्रक्रिया में किसी पूरे समुदाय को रूढ़ छवि के साथ पेश नहीं किया जाना चाहिए।
फिलहाल ‘Mr Singh’ वाली DHS पोस्ट हटाई जा चुकी है, लेकिन इसे लेकर उठे सवाल अमेरिकी इमिग्रेशन नीति, सरकारी प्रचार और सिख-अमेरिकी समुदाय की पहचान से जुड़े मुद्दों पर चर्चा को आगे बढ़ा रहे हैं।
