महुआ मोइत्रा के कार्यालय के बाहर हंगामा, अंडे और सब्जियां फेंके जाने का आरोप; भाजपा समर्थकों पर साधा निशाना

  • रिपोर्ट: सुरजीत सिंह

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में राजनीतिक माहौल के बीच बुधवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद महुआ मोइत्रा के कार्यालय के बाहर जमकर विरोध प्रदर्शन हुआ। प्रदर्शन के दौरान कार्यालय पर कथित तौर पर अंडे, सब्जियां और अन्य सामान फेंके गए। घटना के समय महुआ मोइत्रा कार्यालय के अंदर मौजूद थीं।

महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर घटना का वीडियो साझा करते हुए आरोप लगाया कि प्रदर्शन करने वाले भाजपा समर्थक थे। उन्होंने कहा कि करीब एक घंटे तक प्रदर्शनकारी उनके कार्यालय के बाहर नारेबाजी करते रहे और अंडे व सब्जियां फेंकते रहे, जबकि मौके पर मौजूद पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की।

सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में बड़ी संख्या में लोग काले झंडे लेकर प्रदर्शन करते दिखाई दे रहे हैं। प्रदर्शनकारियों के हाथों में अंडे और सब्जियां भी नजर आ रही हैं। वहीं, घटनास्थल पर पुलिस बल की मौजूदगी भी देखी जा सकती है। महुआ मोइत्रा का दावा है कि उन्होंने मामले की जानकारी राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को भी दी, लेकिन तत्काल कार्रवाई नहीं हुई।

पहले भी टीएमसी नेताओं को बनाया जा चुका है निशाना
यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले 16 जून को टीएमसी नेता कुणाल घोष की प्रेस वार्ता के दौरान भी उन पर अंडा फेंका गया था। इसके अलावा उदयन गुहा, सुजॉय हाजरा और बप्पादित्य दासगुप्ता समेत कई अन्य टीएमसी नेताओं के साथ भी विरोध प्रदर्शन के दौरान ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। टीएमसी इन घटनाओं के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराती रही है, जबकि भाजपा का कहना है कि यह स्थानीय लोगों के विरोध का परिणाम है।

अभिषेक बनर्जी पर भी हुआ था हमला
हाल ही में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी पर भी सोनारपुर में विरोध प्रदर्शन के दौरान अंडे, पत्थर और चप्पल फेंके गए थे। उस घटना के बाद उन्होंने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे।

मिड-डे मील में अंडे के मुद्दे पर भी रही हैं मुखर
महुआ मोइत्रा ने हाल ही में पश्चिम बंगाल के कुछ स्कूलों में मिड-डे मील से अंडे हटाकर केवल शाकाहारी विकल्प दिए जाने के मुद्दे पर भी सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि अंडा बच्चों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन का महत्वपूर्ण स्रोत है और इसे भोजन से हटाना उचित नहीं है। इस मुद्दे पर उन्होंने राज्य सरकार की नीति पर भी सवाल खड़े किए थे।

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