UP School Rating 2026-27: यूपी के 1.88 लाख स्कूलों का स्व-मूल्यांकन पूरा, 31 अक्टूबर तक होगा भौतिक सत्यापन
क्या है स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग अभियान?
UP School Rating 2026-27: स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग यानी Swachh Evam Harit Vidyalaya Rating (SHVR) का उद्देश्य देश के स्कूलों में स्वच्छता, स्वास्थ्यकर वातावरण और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी अच्छी आदतों को बढ़ावा देना है। इस पहल के तहत विद्यालयों की विभिन्न व्यवस्थाओं का मूल्यांकन किया जाता है और उनके प्रदर्शन के आधार पर स्टार रेटिंग दी जाती है।
उत्तर प्रदेश में इस अभियान के अंतर्गत बड़ी संख्या में विद्यालयों ने अपनी व्यवस्थाओं का स्व-मूल्यांकन पूरा किया है। स्कूलों को निर्धारित प्रश्नावली के आधार पर अपनी सुविधाओं और व्यवस्थाओं की जानकारी पोर्टल पर जमा करनी होती है। इसके बाद अगले चरण में संबंधित अधिकारियों की ओर से भौतिक सत्यापन किया जाता है।
इस प्रक्रिया का मकसद केवल स्कूलों को रेटिंग देना नहीं, बल्कि उनमें स्वच्छता और पर्यावरण से संबंधित व्यवस्थाओं को लगातार बेहतर बनाने के लिए प्रोत्साहित करना भी है। स्वच्छ विद्यालयों में बच्चों को पढ़ाई के लिए बेहतर वातावरण मिल सकता है और उनमें साफ-सफाई के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित हो सकती है।
UP School Rating 2026-27: 1,74,754 विद्यालयों को मिली तीन स्टार या उससे अधिक रेटिंग
स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग 2026-27 के तहत उत्तर प्रदेश के 1,88,301 विद्यालयों ने स्व-मूल्यांकन पूरा किया है। इनमें से 1,74,754 विद्यालयों ने तीन स्टार या उससे अधिक की रेटिंग प्राप्त की है।
यह आंकड़ा अभियान में विद्यालयों की भागीदारी को दर्शाता है। हालांकि, स्व-मूल्यांकन के दौरान मिली रेटिंग को अंतिम जमीनी स्थिति का प्रमाण मानने से पहले भौतिक सत्यापन महत्वपूर्ण है। सत्यापन के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पोर्टल पर दर्ज जानकारी और विद्यालयों में उपलब्ध सुविधाओं के बीच कितना सामंजस्य है।
विद्यालयों की रेटिंग से संबंधित प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सत्यापन के दौरान निर्धारित मानकों का पालन करना जरूरी होगा। इससे मूल्यांकन को अधिक विश्वसनीय बनाने और स्कूलों की वास्तविक जरूरतों की पहचान करने में सहायता मिल सकती है।
UP School Rating 2026-27: 31 अक्टूबर तक पूरा होगा विद्यालयों का भौतिक सत्यापन
स्व-मूल्यांकन पूरा होने के बाद अब अभियान का दूसरा चरण शुरू किया जा रहा है। इसके अंतर्गत विद्यालयों में उपलब्ध सुविधाओं और पोर्टल पर दर्ज जानकारी की जांच की जाएगी। इस प्रक्रिया को 31 अक्टूबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
भौतिक सत्यापन के दौरान यह देखा जाएगा कि विद्यालयों ने स्व-मूल्यांकन में जिन व्यवस्थाओं की जानकारी दी है, वे वास्तव में मौजूद हैं या नहीं। इसके लिए निर्धारित प्रश्नावली और मूल्यांकन के मानकों का उपयोग किया जाएगा।
इस चरण में संबंधित अधिकारियों और मूल्यांकनकर्ताओं की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। उन्हें विद्यालयों की वास्तविक स्थिति का आकलन करते समय निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा, ताकि सभी स्कूलों का मूल्यांकन एक समान मानकों के आधार पर किया जा सके।
सत्यापन से प्राप्त जानकारी के आधार पर विद्यालयों की स्थिति को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी। साथ ही, जिन स्कूलों में सुविधाओं को मजबूत करने की जरूरत है, उनकी पहचान भी की जा सकेगी।
UP School Rating 2026-27: जिलाधिकारी की निगरानी में काम करेंगी मूल्यांकन समितियां
विद्यालयों के भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए जिलास्तर पर मूल्यांकन समितियों के माध्यम से निगरानी की जाएगी। निर्धारित व्यवस्था के अनुसार समिति की अध्यक्षता जिलाधिकारी या उनके नामित अधिकारी करेंगे।
समिति में शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ जलापूर्ति, स्वास्थ्य और अन्य संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों की सहभागिता का प्रावधान है। जरूरत के अनुसार निर्धारित मानकों के अनुरूप विशेषज्ञों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों को भी प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता है।
अलग-अलग विभागों की भागीदारी से विद्यालयों की व्यवस्थाओं का व्यापक आकलन करने में मदद मिल सकती है। उदाहरण के तौर पर, स्वच्छता और स्वास्थ्य से जुड़ी व्यवस्थाओं के मूल्यांकन में संबंधित विषयों की जानकारी रखने वाले अधिकारियों की भूमिका उपयोगी होगी।
जिलास्तर पर निगरानी का उद्देश्य सत्यापन कार्य को निर्धारित समयसीमा में पूरा करना और मूल्यांकन प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखना है।
UP School Rating 2026-27: शिक्षकों और अन्य विभागों के कर्मचारियों को मिल सकती है जिम्मेदारी
भौतिक सत्यापन के लिए डायट प्रशिक्षुओं, अकादमिक रिसोर्स पर्सन (ARP), स्टेट रिसोर्स ग्रुप (SRG), शिक्षक संकुल और संबंधित विभागों के पात्र मैदानी कर्मचारियों की सेवाएं ली जा सकती हैं।
इसके अलावा पंचायती राज, राजस्व, मनरेगा, बाल विकास एवं पुष्टाहार और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े पात्र कर्मचारियों तथा स्वयंसेवकों को भी निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार इस प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता है।
मूल्यांकनकर्ताओं को स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग की प्रश्नावली और प्रक्रिया की जानकारी होना आवश्यक है। इसके साथ एंड्रॉयड मोबाइल फोन, सक्रिय मोबाइल नंबर और ई-मेल जैसी तकनीकी आवश्यकताएं भी निर्धारित की गई हैं।
प्रत्येक मूल्यांकनकर्ता को अधिकतम 15 से 25 विद्यालय आवंटित किए जाने का प्रावधान है। विद्यालयों की भौगोलिक स्थिति और आपसी दूरी को ध्यान में रखते हुए क्लस्टर बनाने पर जोर दिया गया है। इससे एक ही क्षेत्र के विद्यालयों का सत्यापन व्यवस्थित तरीके से करने में सुविधा हो सकती है।
UP School Rating 2026-27: स्कूलों में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा
स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग का एक प्रमुख उद्देश्य बच्चों को स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक बनाना है। विद्यालयों में साफ-सफाई की नियमित व्यवस्था, स्वास्थ्यकर वातावरण और संसाधनों का जिम्मेदारी से इस्तेमाल बच्चों के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
इस तरह की पहल से स्कूलों में स्वच्छता संबंधी आदतों को प्रोत्साहित करने और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने में मदद मिल सकती है। विद्यालयों में स्वच्छता और हरित परिवेश से जुड़ी व्यवस्थाओं का नियमित आकलन होने से इन विषयों पर ध्यान बनाए रखने का अवसर भी मिलता है।
अभियान के अंतर्गत विद्यालयों का मूल्यांकन निर्धारित मानकों के अनुसार किया जाता है। इसका उद्देश्य स्कूलों को अपनी व्यवस्थाओं की समीक्षा करने और जहां सुधार की जरूरत हो, वहां आवश्यक कदम उठाने के लिए प्रेरित करना है।
यदि सत्यापन और उसके बाद सुधार की प्रक्रिया प्रभावी ढंग से संचालित होती है, तो इससे विद्यालयों में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण से संबंधित व्यवस्थाओं को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
UP School Rating 2026-27: स्कूल शिक्षा महानिदेशक ने बताई सत्यापन की अहमियत
स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी के अनुसार, स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग के माध्यम से प्रदेश के विद्यालयों में स्वच्छता, स्वास्थ्यकर वातावरण और पर्यावरणीय चेतना को बढ़ावा दिया जा रहा है।
उनके मुताबिक, दूसरे चरण में होने वाला भौतिक सत्यापन विद्यालयों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने में सहायता मिलेगी।
अब प्रदेश के विद्यालयों के स्व-मूल्यांकन के बाद ध्यान जमीनी स्तर पर उपलब्ध व्यवस्थाओं की जांच पर है। 31 अक्टूबर 2026 तक सत्यापन पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके बाद सामने आने वाली जानकारी से स्कूलों की स्वच्छता और हरित परिवेश से संबंधित व्यवस्थाओं की स्थिति को समझने में मदद मिल सकती है।
उत्तर प्रदेश के 1,88,301 विद्यालयों का स्व-मूल्यांकन पूरा होना स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग अभियान का महत्वपूर्ण पड़ाव है। अब 31 अक्टूबर तक होने वाला भौतिक सत्यापन यह सुनिश्चित करने की दिशा में अहम होगा कि विद्यालयों की रेटिंग वास्तविक व्यवस्थाओं के अनुरूप हो और स्कूलों में स्वच्छ, स्वस्थ तथा पर्यावरण-अनुकूल वातावरण विकसित करने के प्रयासों को मजबूती मिले।
