UP Project Praveen 2026: प्रोजेक्ट प्रवीण से हुनरमंद बनेंगी बेटियां, 71 कस्तूरबा विद्यालयों की 2,672 छात्राओं को मिलेगी स्किल ट्रेनिंग

 71 कस्तूरबा विद्यालयों में शुरू होगी कौशल विकास की ट्रेनिंग

UP Project Praveen 2026: उत्तर प्रदेश सरकार का प्रयास है कि छात्राओं को केवल किताबी शिक्षा तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें ऐसे व्यावहारिक कौशल भी सिखाए जाएं, जो आगे चलकर उनके करियर में मददगार साबित हों। इसी उद्देश्य से प्रोजेक्ट प्रवीण के अंतर्गत कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की छात्राओं को कौशल विकास प्रशिक्षण से जोड़ने की तैयारी की गई है।

इस योजना के तहत प्रदेश के 71 विद्यालयों की 2,672 छात्राओं को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है। प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए संबंधित संस्थानों और जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाइयों को आवश्यक तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रशिक्षण की शुरुआत 2 नवंबर 2026 से करने की तैयारी है। इसके लिए छात्राओं का पंजीकरण, प्रशिक्षण केंद्रों की स्वीकृति और बैच बनाने जैसी प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि प्रशिक्षण की व्यवस्था समय पर तैयार हो, जिससे निर्धारित तारीख से कक्षाएं शुरू की जा सकें।

इस पहल के माध्यम से छात्राओं को स्कूल में पढ़ाई के साथ नई तकनीकों और व्यावसायिक क्षेत्रों की जानकारी मिलेगी। इससे उन्हें अपनी रुचि और योग्यता के अनुसार भविष्य के करियर विकल्पों को समझने में भी मदद मिल सकती है।

 

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UP Project Praveen 2026: AI से लेकर हेल्थकेयर तक, इन क्षेत्रों में मिलेगा प्रशिक्षण

प्रोजेक्ट प्रवीण के तहत छात्राओं को आधुनिक रोजगारपरक क्षेत्रों में प्रशिक्षित किया जाएगा। इसमें ऐसे विषयों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिनका उपयोग विभिन्न उद्योगों और कार्यक्षेत्रों में किया जा सकता है।

प्रमुख प्रशिक्षण क्षेत्र इस प्रकार हैं:

– आईटी और आईटीईएस: कंप्यूटर, सूचना प्रौद्योगिकी और डिजिटल सेवाओं से संबंधित कौशल।
– आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): नई तकनीक की बुनियादी समझ और उसके उपयोग से परिचित कराना।
– हेल्थकेयर: स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित व्यावसायिक जानकारी और आवश्यक कौशल।
– अपैरल सेक्टर: परिधान उद्योग और उससे जुड़ी कार्य प्रक्रियाओं की जानकारी।
– ग्रीन जॉब्स: पर्यावरण संरक्षण और हरित अर्थव्यवस्था से जुड़े रोजगार क्षेत्रों का परिचय।
– मीडिया एंड एंटरटेनमेंट: मीडिया और रचनात्मक उद्योगों से जुड़े कौशल की जानकारी।

इन क्षेत्रों में प्रशिक्षण देने का उद्देश्य छात्राओं को बदलते रोजगार बाजार की जरूरतों से परिचित कराना है। तकनीकी ज्ञान के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलने से वे आगे की पढ़ाई, कौशल आधारित पाठ्यक्रमों और करियर के विभिन्न विकल्पों के बारे में बेहतर निर्णय ले सकती हैं।

हालांकि, सभी 71 विद्यालयों में कौन-सा पाठ्यक्रम उपलब्ध होगा, यह संबंधित विद्यालय और प्रशिक्षण व्यवस्था के अनुसार तय होगा।

UP Project Praveen 2026: 300 घंटे का होगा प्रशिक्षण कार्यक्रम

प्रोजेक्ट प्रवीण के अंतर्गत छात्राओं के लिए प्रशिक्षण की अधिकतम अवधि 300 घंटे निर्धारित की गई है। कार्यक्रम को इस तरह संचालित करने की तैयारी है कि छात्राओं की नियमित पढ़ाई के साथ कौशल विकास की गतिविधियां भी चल सकें।

प्रशिक्षण में केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक ज्ञान और कार्यक्षेत्र में उपयोग होने वाले कौशल पर भी ध्यान दिया जाएगा। इससे छात्राओं को संबंधित क्षेत्र की बुनियादी समझ विकसित करने का अवसर मिलेगा।

इसके अतिरिक्त, छात्राओं के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से संबंधित पाठ्यक्रम अथवा ‘युवा AI फॉर ऑल’ मॉड्यूल का अध्ययन अनिवार्य किया गया है। इससे उन्हें नई तकनीक की शुरुआती जानकारी प्राप्त करने और डिजिटल दुनिया में हो रहे बदलावों को समझने में मदद मिल सकती है।

आज शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और सेवा क्षेत्र में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ रहा है। ऐसे में स्कूली स्तर पर डिजिटल साक्षरता और तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराना छात्राओं के भविष्य के लिए उपयोगी हो सकता है।

UP Project Praveen 2026: व्यक्तित्व विकास और संवाद कौशल पर भी जोर

प्रोजेक्ट प्रवीण में तकनीकी प्रशिक्षण के साथ सॉफ्ट स्किल्स यानी व्यवहारिक और व्यक्तित्व विकास से जुड़े कौशल भी महत्वपूर्ण होंगे। किसी भी कार्यक्षेत्र में सफल होने के लिए विषय की जानकारी के साथ संवाद करने, अपनी बात स्पष्ट रूप से रखने और दूसरों के साथ मिलकर काम करने की क्षमता भी जरूरी होती है।

इसी को ध्यान में रखते हुए छात्राओं को संवाद कौशल और व्यक्तित्व विकास से जुड़ी जानकारी देने की योजना है। इससे उन्हें अपनी बात आत्मविश्वास के साथ रखने और आगे की पढ़ाई या नौकरी से संबंधित अवसरों के लिए तैयारी करने में सहायता मिल सकती है।

स्कूल स्तर पर इस तरह का प्रशिक्षण छात्राओं को अपनी क्षमताएं पहचानने का अवसर भी देता है। वे विभिन्न क्षेत्रों की जानकारी प्राप्त कर सकती हैं और अपनी रुचि के अनुसार आगे की पढ़ाई या प्रशिक्षण का विकल्प चुन सकती हैं।

इस पहल का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि छात्राओं को कम उम्र से ही कौशल आधारित शिक्षा का अनुभव मिलेगा। इससे पारंपरिक पढ़ाई और व्यावसायिक प्रशिक्षण के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने में मदद मिल सकती है।

UP Project Praveen 2026: सात कार्यदिवस के भीतर उपलब्ध करानी होगी अध्ययन सामग्री

प्रशिक्षण कार्यक्रम को व्यवस्थित ढंग से संचालित करने के लिए अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने से संबंधित निर्देश भी दिए गए हैं। निर्धारित व्यवस्था के अनुसार, कक्षाएं शुरू होने के सात कार्यदिवस के भीतर छात्राओं को पाठ्य-पुस्तकें और अन्य शिक्षण सामग्री उपलब्ध करानी होगी।

प्रशिक्षण प्रदाताओं को सामग्री वितरण से संबंधित प्रमाण मिशन पोर्टल पर अपलोड करना होगा। इससे प्रशिक्षण की प्रक्रिया पर निगरानी रखने और निर्धारित दिशा-निर्देशों के पालन की जानकारी प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के निदेशक पुलकित खरे ने संबंधित प्रशिक्षण प्रदाताओं और जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाइयों को समय पर तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए हैं। इसमें प्रशिक्षण केंद्रों की स्वीकृति, छात्राओं का पंजीकरण और बैच निर्माण जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं।

समयबद्ध तरीके से प्रशिक्षण शुरू होने से छात्राओं को निर्धारित अवधि में पाठ्यक्रम पूरा करने का अवसर मिलेगा। साथ ही, प्रशिक्षण की गुणवत्ता और नियमित संचालन सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण होगा।

UP Project Praveen 2026: योगी सरकार का लक्ष्य: शिक्षा के साथ आत्मनिर्भर बनें बेटियां

उत्तर प्रदेश में कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को रोजगार से जुड़ी क्षमताएं प्रदान करने पर जोर दिया जा रहा है। प्रोजेक्ट प्रवीण इसी दिशा में संचालित पहल है, जिसके तहत नियमित शिक्षा के साथ व्यावसायिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाता है।

कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की छात्राओं को इस कार्यक्रम से जोड़ने का उद्देश्य उनके लिए कौशल विकास के अवसर बढ़ाना है। इससे उन्हें तकनीकी और व्यावसायिक क्षेत्रों की जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

प्रशिक्षण पूरा करने के बाद छात्राएं संबंधित विषयों में आगे की पढ़ाई, अतिरिक्त कौशल प्रशिक्षण या अन्य करियर विकल्पों के बारे में विचार कर सकती हैं। हालांकि, प्रशिक्षण प्राप्त करना अपने आप में नौकरी की गारंटी नहीं है। रोजगार के अवसर छात्राओं की योग्यता, आगे की शिक्षा, उपलब्ध पदों और संबंधित क्षेत्र की जरूरतों पर निर्भर करेंगे।

प्रोजेक्ट प्रवीण के तहत 71 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की 2,672 छात्राओं को कौशल प्रशिक्षण देने की योजना उत्तर प्रदेश में बालिका शिक्षा के साथ व्यावसायिक दक्षता विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यदि प्रशिक्षण समय पर और गुणवत्तापूर्ण तरीके से संचालित होता है, तो छात्राओं को आधुनिक तकनीक, व्यावहारिक कौशल और भविष्य के करियर विकल्पों को समझने में मदद मिल सकती है।

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