गाजीपुर डंपिंग ग्राउंड के कूड़ा ट्रक किसके संरक्षण में बन रहे हैं जानलेवा?

अबूपुर हादसे में कई घायल — जिम्मेदार कौन: नगर निगम, ठेका कंपनी या प्रशासन?

गाजियाबाद। गाजीपुर डंपिंग ग्राउंड से रिसाइक्लिंग के नाम पर चल रहे कूड़ा लदे ट्रकों की लापरवाही अब आमजन की जान पर भारी पड़ने लगी है। अबूपुर के पास एक कूड़ा लदे ट्रक से अचानक भारी मात्रा में कचरा सड़क पर गिर गया, जिससे कई वाहन आपस में टकरा गए। इस हादसे में आधा दर्जन से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह हादसा किसी संयोग का परिणाम नहीं, बल्कि लंबे समय से जारी प्रशासनिक अनदेखी का नतीजा है।

स्थानीय नागरिकों ने नगर निगम गाजियाबाद, कूड़ा ढुलाई का ठेका संभालने वाली निजी एजेंसी और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। लोगों का कहना है कि रोजाना दो दर्जन से अधिक कूड़ा लदे ट्रक बिना ढंके और ओवरलोड होकर मेरठ, शामली और मुजफ्फरनगर की पेपर मिलों की ओर भेजे जाते हैं, लेकिन इस अवैध और खतरनाक ढुलाई पर रोक लगाने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती।

हादसे के बाद मौके पर जो दृश्य सामने आया, उसने एक ओर सिस्टम की खामियों को उजागर किया तो दूसरी ओर मानवता और जिम्मेदारी की मिसाल भी पेश की। घटना की सूचना मिलते ही निर्वाण फाउंडेशन के संस्थापक ईश्वर चंद्र मौके पर पहुंचे। ग्रामवासियों की सूचना पर जिला पंचायत प्रत्याशी कुणाल चौधरी भी तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे और पुलिस को सूचित किया।

मौके पर पहुंची पुलिस टीम के पुलिसकर्मी नरेंद्र सहित अन्य जवानों ने न केवल स्थिति का जायजा लिया, बल्कि स्वयं सड़क पर उतरकर हाथ-पैर और आवश्यक औजारों की मदद से कूड़े के ढेर को हटाने में जुट गए। पुलिस द्वारा की गई इस मेहनत के वीडियो और फोटो भी मौके पर रिकॉर्ड किए गए, जो जनहित में उनकी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी को दर्शाते हैं।

कुणाल चौधरी एवं ईश्वर चंद्र द्वारा तत्काल ट्रैक्टर की व्यवस्था कराई गई। इसके बाद पुलिस, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों के संयुक्त प्रयास से रात करीब 11 बजे तक सड़क को पूरी तरह साफ कर यातायात बहाल किया जा सका।

निर्वाण फाउंडेशन के संस्थापक ईश्वर चंद्र ने कहा,
“जब पुलिसकर्मी खुद सड़क पर उतरकर कूड़ा साफ करने को मजबूर हों और जिम्मेदार विभाग चुप्पी साधे रहें, तो सवाल सिर्फ एक हादसे का नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की जवाबदेही का है।”

अब जनता के मन में कई सवाल खड़े हो रहे हैं—
क्या कूड़ा ढोने वाले ट्रकों को बिना ढंके और ओवरलोड चलाने की अनुमति किसने दी?
क्या दोषी ट्रक चालक और ठेका एजेंसी पर एफआईआर दर्ज होगी?
क्या नगर निगम और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी?

या फिर हर बार की तरह जमीनी स्तर पर काम करने वाले पुलिसकर्मी ही व्यवस्था की कमियों को ढकते रहेंगे और असली जिम्मेदार बच निकलेंगे?

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