हरियाणा प्रदेश में उच्च शिक्षा के स्तर को और सुधार की दरकार…NIRF की टॉप -100 की ओवरऑल सूची में हरियाणा का नाम नहीं i
गुस्ताखी माफ हरियाणा – पवन कुमार बंसल
हमारे जागरूक पाठक सतीश मेहरा के सौजन्य से..हरियाणा प्रदेश में उच्च शिक्षा के स्तर को और सुधार की दरकार..
NIRF की टॉप -100 की ओवरऑल सूची में हरियाणा का नाम नहीं…
शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर यानी चार सितंबर को शिक्षा मंत्रालय द्वारा एनआईआरएफ ( नेशनल इंस्टीट्यूट रैंकिंग फ्रेमवर्क) की सूची जारी की गई और इसे आमजन के लिए मंत्रालय की वेबसाइट पर प्रकाशित भी किया गया। जब NIRF की इस है की सूची को देखा तो ओवरऑल की टॉप -100 सूची में हरियाणा का नाम ढूंढने से भी दिखाई नहीं दिया। मन बहुत व्यथित हुआ, जब हरियाणा प्रदेश खेती ,खाद्यान्न, दुग्ध उत्पादन, ऑटो उत्पादन के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों में अहम स्थान रखता है और जिस प्रदेश में राज्य और निजी क्षेत्र के चार दर्जन सेबी अधिक विश्वविद्यालय और अन्य बड़े शिक्षण संस्थान हो तथा प्रदेश की सीमा राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से तीन ओर से सटी हुई हो, ऐसे में वहां का एक भी शिक्षण संस्थान टॉप -100 की सूची में नहीं स्थान नहीं बन पाया हो, यह आमजन के साथ-साथ सरकार के लिए निश्चित रूप से चिंता का विषय होना चाहिए।
हैरत की बात यह भी है कि पिछले 6 वर्ष से हरियाणा का कोई भी शिक्षण संस्थान ऊपरी सौ में स्थान नहीं बना पाया, जबकि हरियाणा के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। यूपीएससी द्वारा हर वर्ष ली जाने वाली अनेक प्रतियोगी परीक्षाओं में हरियाणा के युवाओं ने अपनी छाप छोड़ी है। जनसंख्या औसत वह क्षेत्रफल के आधार पर बात की जाए तो इन परीक्षाओं में प्रदेश के युवाओं का पूरा दबदबा रहा है। यह अलग बात है कि प्रदेश के यह युवा दिल्ली में चंडीगढ़ के संस्थानों से शिक्षित होते हैं।
देश में 29 सितंबर 2015 को तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्री द्वारा यह शिक्षण संस्थाओं के मापदंड तय करने की पद्धति को शुरू किया गया था। NIRF में शिक्षण संस्थानों का मूल्यांकन पाँच मुख्य मानकों के आधार पर तय किया जाता है जैसे: शिक्षण, सीखने और संसाधन (Teaching, Learning and Resources), अनुसंधान और व्यावसायिक अभ्यास (Research and Professional Practice), स्नातक परिणाम (Graduation Outcomes), आउटरीच और समावेशिता (Outreach and Inclusivity), और धारणा (Perception)। इन मानकों को अलग-अलग 17 कैटेगरी में जारी किया जाता है। इन श्रेणियों में ओवरआल विश्वविद्यालय,कालेज,शोध संस्थान, इनोवेशन ,राज्य विश्वविद्यालय,मुक्त विश्वविद्यालय, स्किल विश्वविद्यालय, सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी),इंजीनियरिंग,मैनेजमेंट,फार्मेसी, कानून,मेडिकल व डेंटल शामिल हैं।
एनआईआरएफ 2025 इंडिया रैंकिंग में हरियाणा के सरकारी विश्वविद्यालय पिछड़े हैं, जबकि निजी संस्थान बेहतर प्रदर्शन कर आगे निकले हैं।
पंजाब ने कई श्रेणियों में बाजी मारी। हरियाणा को ओवरऑल टॉप-100 में तो जगह नहीं मिल पाई, लेकिन कौशल और कृषि श्रेणी में कुछ संस्थानों ने राज्य की साख बनाए रखी है । शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी 2025 इंडिया रैंकिंग रिपोर्ट ने हरियाणा की उच्च शिक्षा की तस्वीर साफ कर दी है। राज्य के सरकारी विश्वविद्यालय पिछड़ते दिखे हैं, जबकि निजी विश्वविद्यालयों ने अपनी स्थिति सुधारी है। पड़ोसी पंजाब हर मोर्चे पर आगे निकल चुका है।
एनआईआरएफ की 2025 इंडिया रैंकिंग में एसडीजी टॉप-10 में राज्य का कोई भी संस्थान जगह नहीं बना पाया। शोध संस्थानों की टॉप-50 सूची में भी हरियाणा का नाम नहीं है, जबकि पंजाब के चार संस्थान शामिल हैं। कॉलेज श्रेणी में भी हरियाणा को एक भी स्थान नहीं मिला। ओवरऑल टॉप-100 में लगातार छह साल से राज्य का कोई संस्थान जगह नहीं बना पाया है। इसके उलट पंजाब के छह विश्वविद्यालय इसमें शामिल हुए हैं। यह तस्वीर हरियाणा की उच्च शिक्षा की कमजोर स्थिति को उजागर करती है।
2025 इंडिया रैंकिंग रिपोर्ट में
“प्रबंधन श्रेणी” में हरियाणा के चार संस्थान टॉप-100 में शामिल हुए हैं। इनमें गुरुग्राम का एमडीआई 9वें, आईआईएम रोहतक 19वें, ग्रेट लेक्स 50वें और बीएमएल मुंजाल यूनिवर्सिटी 77वें स्थान पर है। “फार्मेसी” श्रेणी में छह संस्थानों को जगह मिली। इनमें महर्षि मार्कंडेश्वर 26वें और एमडीयू 43वें स्थान पर रहे हैं। “विश्वविद्यालयों” की बात करें तो महर्षि मार्कंडेश्वर 85वें और मानव रचना इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट 96वें स्थान पर रहे। वहीं, “स्टेट यूनिवर्सिटी” श्रेणी में जीजेयू हिसार 32वें, कुरुक्षेत्र विवि 35वें और एमडीयू 46वें स्थान पर रहे हैं। विधि श्रेणी के टॉप-40 में हरियाणा का सिर्फ एक संस्थान एमिटी यूनिवर्सिटी 39वें स्थान पर है। “आर्किटेक्चर व प्लानिंग” श्रेणी में कोई संस्थान शामिल नहीं हो पाया, जबकि पंजाब के तीन संस्थान इसमें जगह बना चुके हैं। राहत की बात यह है कि पलवल का श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय भारत में तीसरे स्थान पर आया है। यह देश का पहला सरकारी कौशल विश्वविद्यालय है जहां दोहरे शिक्षा मॉडल की व्यवस्था है। यह उपलब्धि हरियाणा के लिए एक मजबूत पक्ष साबित हुई है। “कृषि व संबद्ध क्षेत्रों” की श्रेणी में करनाल का एनडीआरआई तीसरे साल लगातार दूसरे स्थान पर रहा। हिसार का चौ. चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय 10वें, राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी संस्थान सोनीपत 22वें और लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय 37वें नंबर पर आया। “डेंटल कॉलेजों” में रोहतक का पीजी डेंटल साइंस 12वें और फरीदाबाद का मानव रचना 33वें स्थान पर रहा। “मेडिकल श्रेणी” में अंबाला का महर्षि मार्कंडेश्वर मेडिकल कॉलेज 33वें स्थान पर है। “इंजीनियरिंग” में सिर्फ एनआईटी कुरुक्षेत्र को 85वां स्थान मिला है।
हरियाणा की उच्च शिक्षा प्रणाली में विशेषकर सरकारी विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों व अन्य शिक्षण संस्थानों में सुधार की बेहद आवश्यकता है। हालांकि प्रदेश के कई निजी क्षेत्र के संस्थानों ने बेहतर प्रदर्शन किया है, लेकिन सरकारी संस्थानों को शिक्षा के स्तर को सुधारने की आवश्यकता है। इसके लिए सरकार और शिक्षा विभाग को मिलकर काम करना होगा। देश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 लागू की गई है। प्रदेश सरकार पिछले कई वर्षों से दम भर रही है कि हरियाणा नई शिक्षा नीति को लागू करने वाला पहले प्रदेश है। दूसरी ओर हरियाणा पिछले 6 वर्ष से उच्च शिक्षा में निरंतर पिछड़ा है। राज्य सरकार द्वारा प्रदेश की उच्च शिक्षा स्थिति के सुधार पर बल देने की दरकार है। दुमछला आईi जनाब शिक्षा मंत्री को
तो अंग्रेजी आती नहीं i
