टीईटी अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों का हंगामा, कलेक्ट्रेट पर किया प्रदर्शन

  • रिपोर्ट- शिवेंदु श्रीवास्तव

सोनभद्र। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बृहस्पतिवार को जिले के सैकड़ों शिक्षक कलेक्ट्रेट परिसर में इकठ्ठा हुए और जमकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान शिक्षकों ने कलेक्ट्रेट गेट से लेकर मुख्य भवन तक पैदल मार्च निकालते हुए अपनी आवाज बुलंद की। प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों का कहना था कि वर्ष 2011 के बाद नियुक्त सभी शिक्षकों पर दोबारा टीईटी परीक्षा थोपना सरासर गलत है। उन्होंने तर्क दिया कि जिस समय जो योग्यता परीक्षा लागू थी, उसी के आधार पर चयन प्रक्रिया पूरी की गई थी, ऐसे में अब सेवा में कार्यरत शिक्षकों को दोबारा परीक्षा देने के लिए मजबूर करना अन्यायपूर्ण है।
पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष रवि भूषण ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने शिक्षकों में असुरक्षा और चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। आदेश के मुताबिक यदि शिक्षक दो वर्षों में परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर पाए तो उन्हें सेवा से बाहर कर दिया जाएगा, जबकि जिनकी सेवा पांच साल से कम है, उन्हें ही आंशिक राहत दी गई है। शिक्षकों ने सवाल उठाया कि जब नियुक्ति के समय उनकी योग्यता मान्य थी तो अब उसे अवैध ठहराना तर्कसंगत नहीं है। साथ ही 2017 में संसद में पारित कानून को भी शिक्षकों ने काला कानून करार दिया और सरकार से इसे वापस लेने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी प्रतिनिधि को सौंपा। शिक्षकों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

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